Lucknow Nagar Nigam Scam: लखनऊ नगर निगम में 1.14 करोड़ का EPF-ESI गबन, NSA ने पांच कंपनियों के खिलाफ दी तहरीर, FIR की प्रक्रिया शुरू

Lucknow Nagar Nigam Scam: लखनऊ नगर निगम में बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर हुआ है। 2013 से 2015 के बीच कार्यदायी संस्थाओं ने 5,000 से ज्यादा कर्मचारियों के ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) और ईएसआई (कर्मचारी राज्य बीमा) का करीब 1.14 करोड़ रुपये हड़प लिया। यह खुलासा पिछले साल कैग (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) रिपोर्ट के बाद गठित विधानसभा की लोक लेखा समिति की जांच में हुआ। समिति ने कर्मचारियों के फंड डकारने की पुष्टि की और संबंधित संस्थाओं से रिकवरी की सिफारिश की। इसके आधार पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी (NSA) डॉ. पीके श्रीवास्तव ने हजरतगंज कोतवाली में FIR दर्ज कराने के लिए तहरीर सौंपी है।

आरोपित कंपनियां और गबन की रकम
तहरीर में पांच कंपनियों पर मुख्य आरोप लगाए गए हैं, जिन्होंने राशि जमा नहीं की:
• मेसर्स राजश्री: 17.88 लाख + 14.31 लाख रुपये
• स्वच्छकार इंटरप्राइजेज: 3.57 करोड़ रुपये (कई चालान)
• पटवा एसोसिएट: 3.57 लाख रुपये
• ड्रैगन सिक्योरिटी: 10.73 लाख रुपये
• आर्यन सिक्योरिटी: 10.73 लाख रुपये
इसके अलावा शार्क सिक्योरिटी (25 लाख), ईगल हंटिंग (28.62 लाख) आदि का भी जिक्र है, लेकिन मुख्य तहरीर में करीब 64 लाख की रिकवरी बाकी कंपनियों से मांगी गई है।

लॉयन सिक्योरिटी क्यों बाहर?
लॉयन सिक्योरिटी और उससे जुड़ी कुछ फर्मों का नाम तहरीर में नहीं शामिल किया गया। नगर निगम का दावा है कि इन कंपनियों ने गबन की रकम वापस जमा करवा दी है। हालांकि, सवाल उठ रहे हैं कि घोटाला पकड़े जाने के बावजूद इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया? बल्कि शहर के तीन प्रमुख जोनों में कूड़ा उठान और रोड स्वीपिंग का ठेका भी दे दिया गया।

ताजा स्थिति और उठते सवाल
• NSA की तहरीर के बाद पुलिस FIR दर्ज करने की प्रक्रिया में है, लेकिन अभी मुकदमा दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
• लोक लेखा समिति ने सभी कार्यदायी संस्थाओं से सख्त रिकवरी की पैरवी की थी।
• विशेषज्ञों और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि भ्रष्टाचार उजागर तो हुआ, लेकिन जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई और बाकी रकम की वसूली कब होगी, यह बड़ा सवाल है।
• क्या नगर निगम कुछ कंपनियों को बचाने की कोशिश कर रहा है? यह भी जांच का विषय बना हुआ है।

यह मामला छोटे-मोटे कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा है, जिनकी मेहनत की कमाई ठेकेदारों ने हड़प ली। नगर निगम प्रशासन से पारदर्शी जांच और तेज कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।
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