वीडियो 7 फरवरी को पोस्ट हुआ था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हुई। भाजपा ने बैकलैश के बाद इसे डिलीट कर दिया। विपक्ष ने इसे “नफरत फैलाने” और “नरसंहार की कॉल” करार दिया है। कांग्रेस ने इसे “जेनोसाइड की कॉल” बताया और वीडियो बनाने वालों पर FIR व न्यायिक कार्रवाई की मांग की। टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने इसे “शर्मनाक” कहा और पीएम मोदी व गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की अपील की।
विपक्ष का आरोप है कि यह वीडियो बंगाली मूल मुसलमानों (जिन्हें हिमंता ‘मियां’ कहते हैं) को टारगेट करने का हिस्सा है। हाल ही में हिमंता ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 4-5 लाख ‘मियां’ वोट डिलीट करने की बात कही थी। उन्होंने कथित रूप से आर्थिक बहिष्कार की अपील भी की, जैसे रिक्शा चालकों को कम किराया देना ताकि वे परेशान होकर असम छोड़ दें। पूर्व राजनयिकों, एक्टिविस्ट्स और नागरिक समाज ने हिमंता के बयानों को “संविधान के अनुच्छेद 14 व 15 का उल्लंघन” बताया और राष्ट्रपति व सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान की मांग की।
भाजपा का पक्ष है कि वीडियो मूल रूप से हिमंता की शूटिंग प्रतियोगिता का था, जिसे AI से एडिट किया गया। पार्टी ने डिलीट कर इसे खारिज कर दिया। हिमंता ने ‘मियां’ टिप्पणियों पर सफाई दी कि उनका इशारा अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की ओर है, न कि सभी मुसलमानों की।
विवाद के बीच असम में बंगाली मूल मुसलमानों व घुसपैठ के मुद्दे पर सियासी तनाव बढ़ गया है। विपक्ष इसे “फासीवाद का चेहरा” बता रहा है, जबकि भाजपा इसे “विदेशी मुक्त असम” अभियान का हिस्सा मान रही है। मामला सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है और मानवाधिकार कार्यकर्ता नफरत फैलाने के आरोप लगा रहे हैं।

