Uttar Pradesh Assembly Elections: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनावों की सरगर्मी तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में विभिन्न क्षेत्रों के लोग योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यों की प्रशंसा करते नजर आ रहे हैं। जनता ने कानून-व्यवस्था, बुलडोजर कार्रवाई, विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को सराहा जा रहा है। हाल के ओपिनियन पोल्स में भी भाजपा को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि समाजवादी पार्टी PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
जनता की राय: योगी सरकार से संतुष्टि
वीडियो में लोग खुलकर बोल रहे हैं। एक व्यक्ति ने योगी जी की तुलना पुजारी से की—जैसे मंदिर में भगवान तक पहुंचने का माध्यम पुजारी होता है, वैसे ही राज्य की सुरक्षा और विकास के लिए योगी जी माध्यम हैं।
कानून-व्यवस्था पर जनता का कहना है कि मौजूदा सरकार में दंगे नहीं हुए। अतीक अहमद और विकास दुबे जैसे मामलों में समान कार्रवाई को न्याय की मिसाल बताया गया। अवैध कब्जों पर बुलडोजर एक्शन को अपराधियों के खिलाफ सख्ती का प्रतीक माना जा रहा है।
विकास के मोर्चे पर एयरपोर्ट, नेशनल हाईवे, इंटरसिटी और बुनियादी ढांचे की तारीफ हुई। मुस्लिम समुदाय के एक व्यक्ति वसीम ने भी कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” हो रहा है और सभी को योजनाओं का लाभ मिल रहा है। मुफ्त राशन जैसी स्कीमों की प्रशंसा करते हुए लोगों ने कहा कि आलोचना करने वाले भी इसका फायदा उठा रहे हैं।
विपक्ष पर तंज
अखिलेश यादव के महिलाओं को ₹400 सालाना देने के वादे पर सवाल उठे कि पैसा कहां से आएगा? योगी जी के “हिंदू होने” पर सवाल उठाने वालों को जवाब मिला कि पहले अपना प्रमाण देखें। जातिवाद के आरोपों को खारिज करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उदाहरण दिया गया।
निष्कर्ष स्वरूप ज्यादातर लोग 2027 में योगी सरकार की वापसी की उम्मीद जता रहे हैं।
सर्वे और राजनीतिक गतिविधियां
जनवरी 2026 के विभिन्न ओपिनियन पोल्स (यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया पर) में भाजपा को 230-260 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि सपा को 100-150 के आसपास। भाजपा नीत गठबंधन बहुमत से आगे है। भाजपा ने विधायकों का इंटरनल सर्वे शुरू कर दिया है, नेगेटिव रिपोर्ट वालों का टिकट कट सकता है।
दूसरी ओर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 28 मार्च से नोएडा से PDA भागीदारी रैलियों के जरिए अभियान शुरू करने वाले हैं। पश्चिमी यूपी से शुरुआत कर हारी सीटों पर फोकस होगा। टिकट वितरण में सर्वे और जमीन पर मेहनत को आधार बनाया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि कानून-व्यवस्था और विकास भाजपा के मजबूत मुद्दे हैं, जबकि सपा PDA और जातीय समीकरण पर जोर दे रही है। 2024 लोकसभा चुनावों में सपा-कांग्रेस गठबंधन की सफलता से विपक्ष उत्साहित है, लेकिन भाजपा का संगठन और योगी की लोकप्रियता बड़ा फैक्टर बनी हुई है।
आने वाले महीने दोनों पार्टियों के लिए निर्णायक होंगे। जनता की नब्ज विकास, सुरक्षा और समावेशी योजनाओं पर टिकी दिख रही है।

