नोएडा सेक्टर-22 में साइबर पुलिस ने फर्जी एविएशन जॉब रैकेट का पर्दाफाश किया। मेरठ के MBBS डॉक्टर अजय के इशारे पर चल रहे इस गिरोह ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम पर 1000 से अधिक बेरोजगार युवाओं को ठगा। पांच आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार।
नोएडा एयरपोर्ट जॉब स्कैम: नोएडा। राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में साइबर ठगी का एक बड़ा और सुनियोजित नेटवर्क सामने आया है, जिसने नौकरी की तलाश में भटक रहे देशभर के हजारों बेरोजगार युवाओं को अपना निशाना बनाया। नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने सेक्टर-22 में छापेमारी कर एक ऐसा फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा है, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और कई नामी एविएशन कंपनियों के नाम पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था।
कैसे हुआ भंडाफोड़?
साइबर डीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि 8 जुलाई को ‘प्रतिबिंब पोर्टल’ से मिली सूचना के आधार पर साइबर थाना पुलिस की टीम ने सेक्टर-22 स्थित लैम्बोदर इंस्टिट्यूट (Lambodar Institute) के दफ्तर पर छापा मारा। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने देखा कि दर्जनों युवक-युवतियां हेडफोन लगाकर लगातार फोन कॉल कर रहे थे। पुलिस ने मौके से पांच आरोपियों साकिब, अफरोज, सुमित गुप्ता, आमिर और आकाश उर्फ अमन को गिरफ्तार कर लिया।
पैरामेडिकल इंस्टिट्यूट से फर्जी कॉल सेंटर तक का सफर
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने शुरुआत में मेडिकल छात्रों को पढ़ाने के लिए एक पैरामेडिकल इंस्टिट्यूट खोला था। लेकिन जब यह धंधा घाटे में जाने लगा, तो गिरोह ने इसे फर्जी कॉल सेंटर में बदल दिया। पिछले करीब 6 महीने से यह नेटवर्क सेक्टर-22 से संचालित हो रहा था।
नोएडा एयरपोर्ट के नाम पर फर्जी वेबसाइट
आरोपियों ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ी एक फर्जी वेबसाइट भी तैयार कर रखी थी, जिसके जरिए नौकरी और अन्य सेवाओं के नाम पर आवेदन मंगवाकर लोगों से ठगी की जाती थी। इसके अलावा गिरोह निंबस एयरवेज, स्टार एयरवेज, एरोफ्लाई एविएशन अकादमी, फ्यूचर अकादमी ट्रेनिंग ऑफ एविएशन और कोर एविएशन जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम और लोगो का अवैध इस्तेमाल कर फर्जी ऑफर लेटर और प्रमाण-पत्र तैयार करते थे, ताकि अभ्यर्थी आसानी से झांसे में आ जाएं। ये दस्तावेज इतने असली दिखते थे कि नौकरी की तलाश में जुटे युवा तुरंत भरोसा कर लेते थे।
1000 से ज्यादा लोगों से ठगी की आशंका
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गिरोह पर एक हजार से अधिक लोगों से ठगी करने की आशंका जताई जा रही है। गिरोह गूगल पर नौकरी से जुड़े विज्ञापन चलाकर बेरोजगार युवाओं का डेटा जुटाता था। इसके बाद कॉल कर प्रोसेसिंग फीस, ट्रेनिंग चार्ज और कोर्स फीस के नाम पर पैसे ऐंठे जाते थे। रकम अलग-अलग किराए के या फर्जी (Mule) बैंक खातों में मंगाई जाती थी, जिसे बाद में आरोपियों के बीच आपस में बांट लिया जाता था। शिकायतें बढ़ने पर गिरोह पुलिस से बचने के लिए कंपनी का नाम, डेटा और कॉल सेंटर का ठिकाना तक बदल देता था — यानी यह ठगी का धंधा बार-बार अपना रूप बदलकर चल रहा था।
मास्टरमाइंड मेरठ का MBBS डॉक्टर, फरार
गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि इस पूरे नेटवर्क का असली सरगना मेरठ निवासी MBBS डॉक्टर अजय है, जो अभी पुलिस को चकमा देकर फरार है। पुलिस अब उसकी तलाश में जुटी है। गिरोह में आरोपी आकाश उर्फ अमन कॉलिंग के लिए सिम कार्ड का इंतजाम करता था, जबकि बाकी आरोपी कॉलिंग और फर्जी दस्तावेज बनाने का काम संभालते थे।
पुलिस को क्या-क्या मिला बरामद?
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में सबूत जब्त किए, जिनमें शामिल हैं, 18 मोबाइल फोन (9 एंड्रॉयड, 9 कीपैड), छह लैपटॉप और एक सीपीयू, पांच हेडफोन, नौ सिम कार्ड, दो चेकबुक, चार डेबिट कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड, कंपनियों की दो मोहरें, 13 फर्जी एविएशन सर्टिफिकेट, बड़ी संख्या में फर्जी ऑफर लेटर और एडमिशन कन्फर्मेशन लेटर, 76 पन्नों का कॉलिंग डेटा, कॉलिंग स्क्रिप्ट, डायरी और अन्य डिजिटल-दस्तावेजी सबूत
राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर भी दर्ज हैं शिकायतें
पुलिस जांच में सामने आया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर भी इस गिरोह के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज मिली हैं। इससे पता चलता है कि यह ठगी सिर्फ नोएडा-दिल्ली तक सीमित नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों तक फैली हुई थी। थाना साइबर क्राइम, नोएडा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
गौरतलब है कि नोएडा-दिल्ली एनसीआर में फर्जी जॉब कॉल सेंटर का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी नोएडा सेक्टर-3 में 14 आरोपियों को नौकरी के नाम पर ठगी करते पकड़ा गया था, जिनके पास से लाखों रुपये नकद और दर्जनों मोबाइल-सिम बरामद हुए थे। इसके अलावा वर्क फ्रॉम होम के नाम पर झारखंड से संचालित एक गिरोह का भी हाल ही में खुलासा हुआ था। इससे साफ है कि बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाने वाला यह साइबर ठगी नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। पुलिस ने आम जनता को सलाह दी है कि किसी भी नौकरी ऑफर के लिए पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और भर्ती प्रक्रिया की पुष्टि जरूर करें, और किसी भी तरह की “प्रोसेसिंग फीस” या “रजिस्ट्रेशन चार्ज” मांगे जाने पर सतर्क हो जाएं।

