रूस-भारत गैसोलीन डील: यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूस में पेट्रोल संकट गहराया, भारत से और ज़्यादा गैसोलीन मंगाने की तैयारी

रूस-भारत गैसोलीन डील: नई दिल्ली/मॉस्को। यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों पर लगातार किए जा रहे ड्रोन हमलों का असर अब रूस के घरेलू ईंधन बाज़ार पर साफ दिखने लगा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा निर्यातकों में शुमार रूस अब भारत से और अधिक गैसोलीन खरीदने की योजना बना रहा है, ताकि देश में फैल रहे पेट्रोल संकट को काबू में लाया जा सके।

संकट की शुरुआत कैसे हुई

पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने अपने ड्रोन हमलों का दायरा रूस की ऊर्जा अवसंरचना तक बढ़ा दिया है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की महत्वपूर्ण रिफाइनरियों को इतना नुकसान पहुंचाया है कि घरेलू ईंधन उत्पादन बीते दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। मई महीने में अकेले 16 रिफाइनरियों पर हमले हुए, और जून में कम से कम छह और रिफाइनरियां निशाना बनीं। इसका सीधा असर गैसोलीन उत्पादन पर पड़ा, जो करीब 25 प्रतिशत तक गिर गया। रिपोर्टों के अनुसार, जो रिफाइनरियां अभी भी चालू हैं, वे रोज़ाना करीब 85,000 टन गैसोलीन बना पा रही हैं, जबकि गर्मियों में रूस की घरेलू मांग करीब 1,10,000 टन प्रतिदिन है। यानी रोज़ाना करीब 25,000 टन का सीधा अंतर पैदा हो गया है, जो कुल घरेलू खपत का लगभग 20 प्रतिशत है।

देश भर में लंबी कतारें, राशनिंग और रिकॉर्ड कीमतें

इस कमी का असर रूस के दर्जनों क्षेत्रों में साफ नज़र आ रहा है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं, कई इलाकों में ईंधन की राशनिंग लागू कर दी गई है, और थोक गैसोलीन की कीमतें 100 रूबल प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी हैं। खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक सरकारी बैठक में यह स्वीकार किया कि यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रिफाइनरी संचालन को प्रभावित किया है और कई क्षेत्रों में ईंधन की कमी पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति को स्थिर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

भारत से पहली खेप पहले ही पहुंच चुकी

रॉयटर्स की पहले की रिपोर्टों के अनुसार, भारत से समुद्री मार्ग से रूस को गैसोलीन की आपूर्ति शुरू हो चुकी है। एक उद्योग सूत्र के मुताबिक कम से कम 60,000 मीट्रिक टन गैसोलीन पहले ही रवाना किया जा चुका है, जबकि दो टैंकर, जिनमें प्रत्येक में 30,000 से 40,000 टन ईंधन है, रूस के लिए रवाना हो चुके हैं। एक अन्य सूत्र के अनुसार रूस की योजना हर महीने विभिन्न देशों से कुल 4,00,000 टन गैसोलीन आयात करने की है, जिसमें पड़ोसी देश बेलारूस भी शामिल है।

टैक्स में बदलाव, सब्सिडी की तैयारी

रूस की संसद यानी स्टेट ड्यूमा ने पहले ही टैक्स कोड में संशोधन को मंज़ूरी दे दी है, जिसके तहत यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) से बाहर से गैसोलीन आयात करने वाली कंपनियों को सब्सिडी दी जाएगी। यह सब्सिडी भारतीय बाज़ार की कीमतों और वहां से शिपिंग लागत के आधार पर तय होगी। इससे साफ है कि मॉस्को अब भारत को एक दीर्घकालिक आपूर्तिकर्ता के तौर पर देख रहा है, न कि सिर्फ आपातकालीन विकल्प के तौर पर। गौरतलब है कि रूस पहले ही जेट फ्यूल के निर्यात पर रोक लगा चुका है, और डीज़ल निर्यात पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है, ताकि घरेलू बाज़ार में आपूर्ति बनी रहे।

भारत-रूस ऊर्जा संबंध और गहरे हुए

यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है जब भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। जून 2026 में भारत ने रूस से रोज़ाना करीब 2.7 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया, जो भारत के कुल तेल आयात का आधे से अधिक हिस्सा है मई में यह आंकड़ा 36.5 प्रतिशत था। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है। भारत इस कच्चे तेल के एक हिस्से को अपनी रिफाइनरियों में प्रोसेस करके गैसोलीन के रूप में दोबारा निर्यात करता है 2025 में भारत का गैसोलीन निर्यात रिकॉर्ड 4 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था। दिलचस्प बात यह भी है कि भारतीय गैसोलीन में इथेनॉल की मात्रा करीब 20 प्रतिशत होती है, जो रूस की अनुमत सीमा (10 प्रतिशत, जिसे पिछले साल ही बढ़ाया गया था) से लगभग दोगुनी है जिससे तकनीकी समायोजन की भी ज़रूरत पड़ सकती है।

आगे क्या

विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात की मिसाल है कि सिर्फ कच्चे तेल के भंडार होने से ऊर्जा सुरक्षा तय नहीं होती अगर रिफाइनिंग क्षमता ही ठप हो जाए, तो देश ईंधन की कमी से जूझ सकता है, भले ही वह तेल निर्यातक क्यों न हो। रूस की क्षतिग्रस्त रिफाइनरियों की मरम्मत में कितना समय लगेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, जिससे आने वाले महीनों में भारत से गैसोलीन आयात और बढ़ने की संभावना है। भारत और रूस, दोनों की सरकारों ने अभी तक इस पूरे मामले पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, और न ही आपूर्ति करने वाली भारतीय रिफाइनरी कंपनी की पहचान सार्वजनिक की गई है।

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