कौन हैं IAS कृष्णा करुणेश? गोरखपुर से नोएडा तक का सफर, जानिए Noida Authority CEO की उपलब्धियां

नोएडा। उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण शहरी विकास प्राधिकरणों में शामिल नोएडा प्राधिकरण की कमान इन दिनों 2011 बैच के आईएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश के हाथों में है। गोरखपुर के जिलाधिकारी से लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और अब नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी तक का उनका प्रशासनिक सफर काफी विविधतापूर्ण रहा है।

कृष्णा करुणेश को ऐसे समय नोएडा की जिम्मेदारी मिली, जब शहर की बुनियादी सुविधाओं, जलभराव, सड़कों, बिल्डर-बायर्स विवाद, किसानों और आरडब्ल्यूए से जुड़े मुद्दों को लेकर प्राधिकरण पर लगातार सवाल उठ रहे थे। जनवरी 2026 में तत्कालीन CEO एम. लोकेश को हटाए जाने के बाद कृष्णा करुणेश को नोएडा प्राधिकरण की जिम्मेदारी दी गई। उस समय वे पहले से ही नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में कार्यरत थे।

वर्तमान में नोएडा और NMRC की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

कृष्णा करुणेश वर्तमान में नोएडा प्राधिकरण के CEO के रूप में कार्य कर रहे हैं। हाल के सार्वजनिक कार्यक्रमों और आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उन्हें CEO, Noida के रूप में दर्ज किया गया है। जुलाई 2026 में आयोजित एक जनसुनवाई की अध्यक्षता उन्होंने नोएडा प्राधिकरण के CEO के तौर पर की।

इसके साथ ही, Noida Metro Rail Corporation (NMRC) की आधिकारिक वेबसाइट पर कृष्णा करुणेश को Managing Director, NMRC और Chief Executive Officer, Noida के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। NMRC की वेबसाइट जुलाई 2026 तक अपडेटेड है, जिससे उनकी वर्तमान जिम्मेदारियों की पुष्टि होती है।

कौन हैं कृष्णा करुणेश?

कृष्णा करुणेश उत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। विभिन्न सार्वजनिक प्रोफाइल और समाचार रिपोर्टों के अनुसार, उनका संबंध बिहार से है और उन्होंने भूगोल में स्नातक, कानून की पढ़ाई तथा पब्लिक पॉलिसी में उच्च शिक्षा प्राप्त की है।

उनके करियर में जिला प्रशासन, ग्रामीण विकास और शहरी विकास—तीनों क्षेत्रों का अनुभव शामिल है। यही विविध अनुभव उन्हें नोएडा जैसे विशाल और जटिल शहरी क्षेत्र की जिम्मेदारी के लिए अलग बनाता है।

कुशीनगर से गाजियाबाद तक शुरुआती प्रशासनिक सफर

आईएएस सेवा में आने के बाद कृष्णा करुणेश ने अपने करियर के शुरुआती वर्षों में कुशीनगर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने गाजियाबाद में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और मुख्य विकास अधिकारी जैसी जिम्मेदारियां संभालीं।

यह दौर उनके लिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि गाजियाबाद जैसे तेजी से शहरीकरण वाले क्षेत्र में काम करते हुए उन्हें विकास योजनाओं, प्रशासनिक प्रबंधन और स्थानीय निकायों से जुड़े मामलों का अनुभव मिला। बाद में यही अनुभव उनके शहरी प्रशासन के करियर में उपयोगी साबित हुआ।

हापुड़ और बलरामपुर के जिलाधिकारी रहे

कृष्णा करुणेश ने हापुड़ और बलरामपुर के जिलाधिकारी एवं जिला मजिस्ट्रेट के रूप में भी काम किया। एक ओर हापुड़ दिल्ली-एनसीआर के तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में शामिल है, जबकि बलरामपुर की प्रशासनिक चुनौतियां अलग प्रकृति की रही हैं।

इन दोनों जिलों में कार्यकाल ने उन्हें कानून-व्यवस्था, राजस्व, विकास योजनाओं और आम जनता से सीधे जुड़े प्रशासनिक कार्यों का व्यापक अनुभव दिया।

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के रूप में मिला शहरी विकास का अनुभव

कृष्णा करुणेश के करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का पद रहा। यहां उन्हें शहरी नियोजन, आवास, भूमि प्रबंधन, विकास परियोजनाओं और प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला।

नोएडा में उनकी मौजूदा जिम्मेदारी को देखते हुए यह अनुभव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नोएडा प्राधिकरण भी भूमि, आवास, औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे और शहर के रखरखाव से जुड़े व्यापक अधिकार रखता है।

गोरखपुर के DM के रूप में मिली बड़ी पहचान

जून 2022 से जुलाई 2025 तक कृष्णा करुणेश गोरखपुर के जिलाधिकारी रहे। यह कार्यकाल उनके प्रशासनिक करियर का सबसे चर्चित दौर माना जाता है।

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह क्षेत्र होने के कारण प्रशासनिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण जिला है। इस दौरान शहर के विकास, पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई काम चर्चा में रहे। विभिन्न रिपोर्टों में रामगढ़ ताल क्षेत्र के विकास और पर्यटन गतिविधियों को गति मिलने का उल्लेख किया गया है। हालांकि कृष्णा करुणेश ने स्वयं भी इसे सामूहिक प्रशासनिक प्रयास बताया था।

रामगढ़ ताल के विकास से बनी अलग पहचान

गोरखपुर में रामगढ़ ताल को पर्यटन और सार्वजनिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया उनके कार्यकाल में आगे बढ़ी। यहां पर्यटन सुविधाओं और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार ने शहर की नई पहचान बनाने में भूमिका निभाई।

एक विस्तृत रिपोर्ट में कृष्णा करुणेश के कार्यकाल के दौरान फ्लोटिंग रेस्टोरेंट, होटल परियोजनाओं और क्रूज जैसी गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। करुणेश ने इन उपलब्धियों को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।

गोरखपुर से नोएडा क्यों भेजे गए?

जुलाई 2025 में कृष्णा करुणेश को गोरखपुर के जिलाधिकारी पद से हटाकर नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) बनाया गया। उस समय इसे एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक नियुक्ति के रूप में देखा गया।

नोएडा प्राधिकरण में ACEO के रूप में कुछ महीनों के अनुभव के बाद जनवरी 2026 में उन्हें शीर्ष जिम्मेदारी सौंप दी गई। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई जब सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और शहर की बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे।

जिम्मेदारी संभालते ही सामने आई बड़ी चुनौती

नोएडा की कमान संभालते ही कृष्णा करुणेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता का भरोसा बहाल करने की थी। सड़क, जलभराव, ड्रेनेज, सीवर, यातायात, बिल्डर-बायर्स विवाद और किसानों के मुद्दे पहले से ही चर्चा में थे।

रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने आरडब्ल्यूए और आम नागरिकों से संवाद बढ़ाने तथा नियमित जनसुनवाई की दिशा में पहल की। एक साथ विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में लोगों की समस्याएं सुनने की व्यवस्था को उनकी प्रशासनिक कार्यशैली का अहम हिस्सा बताया गया है।

जनता से संवाद और जवाबदेही पर जोर

नोएडा में कृष्णा करुणेश की कार्यशैली की एक खास बात जनसुनवाई और सीधे संवाद पर जोर देना रही है। नोएडा जैसे शहर में आरडब्ल्यूए, अपार्टमेंट ओनर्स, बिल्डर, किसान और औद्योगिक संगठनों के अलग-अलग हित और समस्याएं हैं।

उनके सामने चुनौती केवल नई परियोजनाएं शुरू करने की नहीं, बल्कि पहले से विकसित शहर के रखरखाव और वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान की भी है। उन्होंने स्वयं भी नोएडा की चुनौती को एक विकसित शहर के दैनिक प्रबंधन और अचानक सामने आने वाली शहरी समस्याओं से जोड़कर देखा है।

कृष्णा करुणेश की पोस्टिंग की सबसे बड़ी विशेषता

कृष्णा करुणेश की प्रशासनिक यात्रा को देखें तो उनके पास तीन अलग-अलग प्रकार के प्रशासनिक अनुभव हैं—

  1. जिला प्रशासन – हापुड़, बलरामपुर और गोरखपुर में जिलाधिकारी के रूप में अनुभव।
  2. ग्रामीण एवं विकास प्रशासन – गाजियाबाद में मुख्य विकास अधिकारी सहित विकास से जुड़े पदों पर कार्य।
  3. शहरी विकास प्राधिकरण – गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, नोएडा प्राधिकरण के ACEO और अब CEO के रूप में अनुभव।

यही कारण है कि नोएडा की उनकी पोस्टिंग को केवल एक सामान्य तबादले के रूप में नहीं देखा जा सकता। एक ओर उनके पास बड़े जिलों के प्रशासन का अनुभव है तो दूसरी ओर शहरी विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली की समझ भी है।

NMRC की कमान भी, बढ़ी जिम्मेदारी

नोएडा प्राधिकरण के साथ-साथ कृष्णा करुणेश के पास नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी भी है। NMRC की आधिकारिक वेबसाइट पर उन्हें Managing Director और Noida के CEO के रूप में दर्ज किया गया है।

इस लिहाज से उनके सामने अब शहर के विकास और रखरखाव के साथ-साथ शहरी परिवहन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।

नोएडा में उनके सामने क्या हैं सबसे बड़ी चुनौतियां?

कृष्णा करुणेश के सामने आने वाले समय में कई बड़ी चुनौतियां हैं—

  • जर्जर और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण
  • जलभराव और ड्रेनेज व्यवस्था को बेहतर बनाना
  • सीवर और पेयजल से जुड़ी शिकायतों का समाधान
  • बिल्डर-बायर्स विवाद और फ्लैट रजिस्ट्री के लंबित मामले
  • किसानों के मुआवजे और भूमि से जुड़े मुद्दे
  • यातायात और बढ़ते शहरी दबाव का प्रबंधन
  • सेक्टरों में रखरखाव और नागरिक सुविधाओं की गुणवत्ता सुधारना
  • नोएडा के भविष्य के विकास और नई परियोजनाओं को गति देना

निष्कर्ष: अनुभव, सख्ती और संवाद की परीक्षा

आईएएस कृष्णा करुणेश की अब तक की प्रशासनिक यात्रा उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में स्थापित करती है, जिनके पास जिला प्रशासन से लेकर बड़े शहरी विकास प्राधिकरणों तक काम करने का अनुभव है।

गोरखपुर में विकास कार्यों से मिली पहचान के बाद अब उनकी सबसे बड़ी परीक्षा नोएडा में है। यहां चुनौती केवल नई सड़क, पार्क या परियोजना बनाने की नहीं है, बल्कि पहले से विकसित और तेजी से बढ़ते शहर की रोजमर्रा की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की भी है।

जनता, आरडब्ल्यूए, बिल्डर-बायर्स, किसान और उद्योग—सभी की निगाहें अब इस बात पर हैं कि कृष्णा करुणेश अपने प्रशासनिक अनुभव को नोएडा की जमीनी समस्याओं के समाधान में किस तरह बदलते हैं। आने वाले महीनों में उनके फैसले यह तय करेंगे कि नोएडा में उनकी पोस्टिंग केवल एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक नियुक्ति साबित होती है या फिर शहर के प्रशासन में एक नए बदलाव की शुरुआत।

 

UP IAS Transfer: योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 17 IAS अधिकारियों के तबादले

 

 

यहां से शेयर करें