वाशिंगटन, अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने तकनीकी दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट को H-1B वीजा धारकों के लिए ग्रीन कार्ड आवेदन कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में फ्रॉड टास्क फोर्स से जुड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा करते हुए कंपनी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया।
वेंस ने कहा, “अगर आप गणना करें, तो माइक्रोसॉफ्ट ने हर अमेरिकी कर्मचारी की छंटनी के बदले डेढ़ विदेशी बंधुआ मजदूर रख लिए।” उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी।
श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट के अलावा दुनिया की कई बड़ी आईटी कंपनियों—कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कैपजेमिनी और एडोब—को भी इस कार्यक्रम से निलंबित किया जा रहा है। ये निलंबन स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) हासिल करने की प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें PERM (परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन) महत्वपूर्ण कदम होता है।
इसके अलावा नौ विश्वविद्यालयों—जिनमें हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड शामिल हैं—की जांच शुरू की गई है। आरोप है कि ये अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लाकर अमेरिकी वेतन को कमजोर कर रहे हैं। श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने बताया कि समन जारी किए जा चुके हैं।
H-1B कार्यक्रम पर लंबे समय से विवाद
H-1B वीजा उच्च-कुशल नौकरियों के लिए जारी किया जाता है, जिनके लिए अमेरिकी कर्मचारियों की कमी बताई जाती है। तकनीकी कंपनियां इसका सबसे ज्यादा उपयोग करती हैं और लगभग तीन-चौथाई स्वीकृतियां भारतीय कर्मचारियों को मिलती हैं। ट्रंप समर्थक लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि यह कार्यक्रम अमेरिकी कर्मचारियों के हितों को नुकसान पहुंचाता है और इसमें व्यापक दुरुपयोग होता है।
यह घोषणा उस समय आई है जब एक दिन पहले ही होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम में काम करने पर 70,000 डॉलर का शुल्क प्रस्तावित किया था।
माइक्रोसॉफ्ट की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। एसोसिएटेड प्रेस और रॉयटर्स ने कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन जवाब नहीं मिला।
यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन की व्यापक फ्रॉड टास्क फोर्स का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वीजा और रोजगार संबंधी कथित धोखाधड़ी पर लगाम लगाना है। पहले भी कॉग्निजेंट जैसी कंपनियों के PERM फाइलिंग निलंबित किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय आईटी पेशेवरों और कंपनियों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि ग्रीन कार्ड प्रक्रिया रुकने से कई कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित हो सकता है। अमेरिकी प्रशासन का रुख साफ है—अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा प्राथमिकता रहेगी और किसी भी कथित दुरुपयोग पर सख्ती बरती जाएगी।
यह भी पढ़ें: ज्ञानेश कुमार के कारण शराब के शौक़ीनों को बुरी ख़बर

