जेपी को खरीदने वाली कंपनी सुरक्षा ग्रुप पर ईडी ने कराई एफआईआर, पैसे का प्रोजेक्ट्स में नही दूसरी कंपनियों में डायवर्ट, जानिए पूरा मामला

Noida/ Delhi: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दिल्ली एनसीआर के सभी बिल्डरों पर शिकंजा कस रही है। ईडी ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में सुरक्षा रियल्टी लिमिटेड और लक्षद्वीप इन्वेस्टमेंट्स एंड फाइनेंस लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर कराई है। आरोप है कि जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के टेकओवर योजना के कार्यान्वयन में धोखाधड़ी और क्रमिनल की गई। इस प्रोजेक्ट से मिला पैसा दूसरी दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किया जा रहा है।

हाउसिंग प्रोजेक्ट में लगाना था पैसा
यमुना एक्सप्रेसवे से आने वाला टोल का पैसा भी दूसरी कंपनियों में लगाने का आरोप है, जबकि इस पैसे को प्रोजेक्ट से जुड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट में लगाया जाना था। करीब 20 हजार खरीदार अब भी घर के इंतजार में हैं। वहीं, लगभग सात हजार किसान 1600 करोड़ रुपये के अतिरिक्त मुआवजे के लिए आंदोलन कर रहे हैं। यह मामला जेपी समूह के पूर्व प्रबंधन के खिलाफ चल रही ईडी की कार्रवाई के बाद आया है। नवंबर 2025 में ईडी ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के पूर्व एमडी मनोज गौड़ को हो बायर्स के धन के कथित गबन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। ईडी की जांच जेपी विश टाउन से शुरू हुई। जेपी ग्रीन्स जैसी हाउसिंग परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप में घर खरीदारों और बायर्स द्वारा दायर की गई कई शिकायतों से हुई। इन्हीं शिकायतों पर 2017-18 में दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने जेपी इंफ्राटेक, जयप्रकाश एसोसिएट्स और उनके प्रमोटरों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

बायर्स का करीब 12 हजार 806 करोड़
बता दें कि 7 मार्च 2023 को एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) सुरक्षा समूह (सुरक्षा रियल्टी और लक्षद्वीप इन्वेस्टमेंट्स एंड फाइनेंस) द्वारा पेश समाधान योजना को मंजूरी दी थी। मई 2024 में एनसीएलटी ने भी बरकरार रखा। इस समाधान योजना का उद्देश्य जेपी इंफ्राटेक को ऋणों का निपटान करके रुके हुए फ्लैट्स प्रोजेक्ट को पूरा करके और हितधारकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करके पुनर्जीवित करना था। खरीदारों के दावों की राशि 12,806 करोड़ रुपये थी। इसमें चार वर्षों के भीतर सभी लंबित फ्लैटों को पूरा करने का वादा किया गया था। वित्तीय लेनदारों ने लगभग 9,783 करोड़ रुपये के दावों को स्वीकार किया था। उनको 2,500 एकड़ से अधिक भूमि पार्सल और लगभग 1,300 करोड़ रुपये के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर के माध्यम से पूरा किया जाना था।

 

सुरक्षा ग्रुप ने पूरे नही किये वादे
1 जनवरी को दर्ज कराई गई रिपोर्ट में सुरक्षा ग्रुप पर गड़बड़ी करने का आरोप है। यमुना प्राधिकरण सहित परिचालन लेनदारों के स्वीकृत दावों में कमी आई है। इस योजना के लिए 90 दिनों के भीतर नए निर्माण के लिए 125 करोड़ रुपये इक्विटी, 125 करोड़ रुपये ऋण और 3,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा शामिल थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा ने जेपी इफ्राटेक का अधिग्रहण करने के बाद 11 जून, 2024 को 125 करोड़ रुपये इक्विटी के रूप में जमा किए थे, लेकिन शेष प्रतिबद्धताएं अभी तक पूरी नहीं हुई है।

 

दूसरी कंपनियों में ऐसे भेजा गया धन
आरोप है कि होम बायर्स की जमा राशि और यमुना एक्सप्रेसवे टोल राजस्व से प्राप्त धन का उपयोग करके समूह से जुड़ी संस्थाओं को धनराशि भेजी गई। इसमें आईटीआई गोल्ड लोन, आईटीआई हाउसिंग फाइनेंस और आईटीआई फाइनेंस को हस्तांतरण शामिल है। एफआईआर में आईटीआई म्यूचुअल फंड में 107 करोड़ रुपये के निवेश का भी जिक्र है। आरोप है कि यह निवेश 2024 के अंत में जेपी हेल्थकेयर लिमिटेड को मैक्स हेल्थकेयर लिमिटेड को बेचने से प्राप्त धनराशि से किया गया था।

 

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