गर्मी में कंबल, सर्दी में बर्फ पर नींद, महेंद्रगढ़ के संतलाल के आगे मौसम भी हुआ बेबस

हरियाणा में महेंद्रगढ़ जिले के डेरोली अहीर गांव में रहने वाले संतलाल का शरीर मानो मौसम की आम भाषा ही नहीं समझता। जिस वक्त पूरा इलाका मई-जून की तपती धूप में पंखे-कूलर के सहारे दिन काट रहा होता है, संतलाल कंबल ओढ़कर बैठे मिलते हैं। और जब दिसंबर-जनवरी की कड़ाके की ठंड में लोग रजाई से बाहर निकलने का नाम नहीं लेते, तब यही बुजुर्ग सुबह पांच बजे उठकर नहाने चले जाते हैं।

डॉक्टरी जांच में भी कोई बीमारी नहीं

गांव वालों के मुताबिक संतलाल की यह आदत बरसों पुरानी है। हैरानी की बात यह है कि जांच में उन्हें कोई मेडिकल बीमारी नहीं पाई गई है — न बुखार, न कोई और तकलीफ। यही वजह है कि इलाके में उनका मामला किसी अजूबे से कम नहीं माना जाता।

भीषण गर्मी में अलाव और कंबल

मई-जून की भीषण गर्मी में, जब पारा 45 डिग्री के आसपास पहुंच जाता है, संतलाल कंबल ओढ़कर अलाव के पास बैठे नजर आते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस मौसम में भी उन्हें ठंड का एहसास होता है, जबकि आसपास के लोग गर्मी से बेहाल रहते हैं।

कड़ाके की सर्दी में सुबह-सुबह स्नान

वहीं जब दिसंबर की हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ती है, संतलाल सुबह पांच बजे से ही नहाने लगते हैं। कुछ बुजुर्गों का यह भी कहना है कि वे कड़ाके की ठंड में बिना किसी हिचक के सामान्य दिनों जैसा बर्ताव करते हैं, मानो मौसम उन्हें छूता ही न हो।

गांव में चर्चा का विषय

संतलाल का यह उलटा मिजाज पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना रहता है। हर सर्दी और गर्मी में उनकी यह आदत नए सिरे से लोगों को हैरान करती है, और गांव के लोग इसे प्रकृति के एक अनोखे खेल के रूप में देखते हैं।

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