सेक्टर-51 नोएडा में अवैध कमर्शियल गतिविधियां और रेड़ी-पटरी का जंजाल, आरडब्ल्यूए ने प्राधिकरण पर लगाए गंभीर आरोप, चेतावनी दी प्रदर्शन की

नोएडा, सेक्टर-51 नोएडा के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र लिखकर रेजीडेंशियल क्षेत्र में अवैध कमर्शियल गतिविधियों और फुटपाथ अतिक्रमण को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। आरडब्ल्यूए का आरोप है कि वर्क सर्कल-3 के अधिकारी इन अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं और शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।

आरडब्ल्यूए के महासचिव संजीव कुमार द्वारा 7 अक्टूबर 2026 को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सेक्टर-51 के रेजीडेंशियल इलाके में पेइंग गेस्ट, गेस्ट हाउस, गर्ल्स हॉस्टल, ब्लाइंड स्कूल, सीनियर सिटीजन होम, किराए पर बिल्डिंग लेकर अस्पताल और नर्सिंग होम चलाना, बैक्वेट हॉल, बेसमेंट में स्टडी सेंटर और डांस एकेडमी जैसे कई कमर्शियल काम अवैध रूप से चल रहे हैं। साथ ही सेक्टर के चारों ओर फुटपाथ अतिक्रमण, रेड़ी-पटरी और चाइनीज वेन का जंजाल बढ़ता जा रहा है।

आरडब्ल्यूए का आरोप है कि पिछले कई महीनों से लगातार लिखित शिकायतें भेजने के बावजूद वर्क सर्कल-3 विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। यहां तक कि शिकायतों को दबाकर रखा जा रहा है। पत्र में साफ कहा गया है कि “यह बोलने में हमें कोई संकोच नहीं है कि सेक्टर-51 में जो भी कमर्शियल कार्य हो रहा है, सब नोएडा प्राधिकरण वर्क सर्कल-3 की मेहरबानी से हो रहा है।”

खासतौर पर वीडीएस मार्केट के पास स्थिति बदतर बताई गई है। जहां पहले 10-12 रेड़ी-पटरी थीं, अब 60-70 दुकानें लग चुकी हैं। फुटपाथ अतिक्रमण और चाइनीज वेन भी हटाने के आदेश के बावजूद जारी हैं। डायमंड बैक्वेट हॉल के सामने सड़क पर खुले में बिल्डिंग मटीरियल बिखेरना और प्रदूषण फैलाना भी जारी है। आरडब्ल्यूए ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत समाधान नहीं निकाला गया तो निवासी नोएडा प्राधिकरण के गेट पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। पत्र में साफ लिखा गया है कि इसे सिर्फ अनुरोध न समझा जाए, बल्कि चेतावनी माना जाए।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि शिकायत करने पर कुछ घंटों के लिए रेड़ी-पटरी हटाई जाती हैं, वीडियो बना लिया जाता है और फिर दोबारा लगा दी जाती हैं। पुलिस और प्राधिकरण के अधिकारी मिलकर इस अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे पूरा सेक्टर नरक बन चुका है। आरडब्ल्यूए ने सवाल किया है कि जब रेजीडेंशियल इलाके में इतनी बड़ी संख्या में कमर्शियल गतिविधियां चल रही हैं तो इसे प्लान सिटी क्यों कहा जाए? निवासी अब बेहद परेशान हैं और तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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