नई दिल्ली, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को चुनाव आयोग और दिल्ली पुलिस दोनों पर दोहरे हमले किए। एक तरफ उन्होंने ‘वोट चोरी’ के आरोप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ देहरादून में छिपी एक महिला का नाम लिए बिना जिक्र किया, तो दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस पर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की क्रूर पिटाई का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने इंडिया ब्लॉक के प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह हमारा वादा है कि जिन्होंने यह काम किया है—प्रधानमंत्री मोदी, शाह, ज्ञानेश कुमार, देहरादून में अभी छिपी हुई महिला और अन्य सभी को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।”
उनके इस बयान के बाद अटकलों का बाजार गर्म हो गया। कांग्रेस नेताओं और टिप्पणीकारों ने इसे चुनाव आयोग की आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना से जोड़कर देखा। सीमा खन्ना 2025 में एनआईसी से प्रतिनियुक्ति पर चुनाव आयोग आई थीं। भारतीय एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट में ईआरओनेट सॉफ्टवेयर पर उनके नियंत्रण को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि सीमा खन्ना उत्तराखंड चुनाव की तैयारियों के लिए देहरादून में तैनात हैं।
पुलिस पिटाई का आरोप: एक कान सुनना बंद
इसके अलावा राहुल गांधी ने मंगलवार को सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिरासत में लिए गए युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाया। उन्होंने केरल की दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अथिरा का मामला उठाया।
राहुल गांधी ने कहा, “अथिरा का एक कान सुनना बंद हो गया है। उसे कान पर मारा गया, इसलिए वह एक कान से बहरी हो गई है। पिछली बार मैंने एक लड़के को दिखाया था जिसकी आंख खराब हो गई थी, अब यह लड़की एक कान से सुन नहीं पा रही।” अथिरा का आरोप है कि हिरासत में लेते समय बस में कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। उन्होंने पूछा तो बस कनॉट प्लेस थाने के बाहर रोकी गई और चेहरे पर बार-बार मार पीट की गई, जिससे आंख और कान में चोट आई।
एक अन्य एनएसयूआई कार्यकर्ता ने भी आरोप लगाया कि महिला कांस्टेबल चंचल यादव ने उसे गर्दन से पकड़कर सीट पर धकेला, नाखूनों से चेहरा और कान के पास खरोंचा और थप्पड़ मारा। युवा कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पुलिस ने लाठियों से पीटा और प्राइवेट पार्ट्स पर लातें मारीं। कुछ नाबालिगों को फोन-पैसे के बिना छोड़ दिया गया, जबकि पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया। ये आरोप विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के बीच आए हैं, जिसमें विपक्ष सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
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