GST अधिकारी बनकर 29 लाख की वसूली: कंसल्टेंट पर दबाव की असली वजह क्या? कंपनियों के GST बचाने के खेल की भी जांच

नोएडा। जीएसटी अधिकारी बनकर एक जीएसटी कंसल्टेंट से करीब 29 लाख रुपये की वसूली करने वाले गैंग का सेंट्रल नोएडा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के बाद जहां फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर वसूली करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है, वहीं इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—आखिर जीएसटी कंसल्टेंट संदीप कुमार गैंग के दबाव में इतनी बड़ी रकम देने को क्यों तैयार हुआ?

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी इस बात से वाकिफ थे कि संदीप कुमार जीएसटी से जुड़े काम करते हैं और बड़ी कंपनियों के टैक्स एवं जीएसटी संबंधी मामलों को संभालते हैं। इसी जानकारी को आधार बनाकर गैंग ने उन्हें निशाना बनाया और खुद को जीएसटी विभाग से जुड़ा अधिकारी बताकर कार्रवाई का डर दिखाया।

29 लाख की वसूली के पीछे क्या था गैंग का भरोसा?

जांच का सबसे अहम पहलू यही है कि आरोपियों को संदीप कुमार के बारे में इतनी जानकारी कैसे मिली। बताया जा रहा है कि संदीप कुमार कई बड़ी कंपनियों के जीएसटी संबंधी मामलों में कंसल्टेंसी का काम करते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों को उनके काम, क्लाइंट और कथित जीएसटी अनियमितताओं की जानकारी कहां से मिली।

गैंग को कथित तौर पर यह अंदाजा था कि यदि संदीप कुमार पर जीएसटी विभाग की कार्रवाई का दबाव बनाया जाए तो वह डर सकते हैं। इसी रणनीति के तहत आरोपियों ने खुद को जीएसटी अधिकारी बताया और कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे बड़ी रकम वसूल ली।

क्या कंपनियों का GST बचाने के लिए होता था कोई खेल?

इस मामले में अब पुलिस की जांच सिर्फ फर्जी जीएसटी अधिकारियों द्वारा की गई वसूली तक सीमित नहीं रहने वाली है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदीप कुमार किन कंपनियों के लिए जीएसटी कंसल्टेंसी का काम करते थे और उन कंपनियों के जीएसटी दायित्व को कम करने के लिए किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती थी।

यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो यह मामला और गंभीर हो सकता है। पुलिस यह भी जांच सकती है कि जीएसटी बचाने के नाम पर कहीं फर्जी बिलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट या अन्य किसी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल तो नहीं किया गया।

हालांकि, किसी कंपनी या व्यक्ति द्वारा जीएसटी में अनियमितता किए जाने की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। अभी तक सामने आई जानकारी के आधार पर इसे आरोप और जांच का विषय ही माना जाना चाहिए।

गैंग को कैसे मिली इतनी अंदरूनी जानकारी?

पुलिस के सामने अब एक और महत्वपूर्ण सवाल है कि गैंग को संदीप कुमार की प्रोफेशनल गतिविधियों की जानकारी किसने दी। क्या किसी परिचित या कारोबारी के जरिए आरोपियों तक यह जानकारी पहुंची या फिर गैंग पहले से ही जीएसटी कंसल्टेंट और उनके क्लाइंट्स पर नजर रख रहा था?

यह पहलू सामने आने पर इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने में पुलिस को मदद मिल सकती है। जांच एजेंसियां यह भी पता कर सकती हैं कि क्या इस गैंग ने इससे पहले भी किसी कारोबारी, टैक्स कंसल्टेंट या कंपनी के अधिकारी को इसी तरह जीएसटी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे वसूले हैं।

GST विभाग के नाम पर डर का इस्तेमाल

फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करने वाले गिरोह अक्सर सरकारी विभाग की कार्रवाई का डर पैदा करके पीड़ित को मानसिक दबाव में लेते हैं। जीएसटी से जुड़े मामलों में नोटिस, जांच, छापेमारी और भारी जुर्माने का डर दिखाकर कारोबारी या कंसल्टेंट को जल्दी निर्णय लेने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

इस मामले में भी पुलिस को यह समझने की जरूरत होगी कि आरोपियों ने संदीप कुमार पर किस तरह दबाव बनाया और 29 लाख रुपये की रकम तक मामला कैसे पहुंचा।

अब पुलिस की जांच के दायरे में कई सवाल

सेंट्रल नोएडा पुलिस के सामने अब इस मामले में कई महत्वपूर्ण सवाल हैं—

  • संदीप कुमार किन कंपनियों के लिए जीएसटी कंसल्टेंसी करते थे?
  • उनके क्लाइंट्स की जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची?
  • क्या आरोपियों को कथित जीएसटी अनियमितताओं की पहले से जानकारी थी?
  • संदीप कुमार से 29 लाख रुपये की रकम किस प्रक्रिया के जरिए वसूली गई?
  • क्या इस गैंग ने इससे पहले भी जीएसटी अधिकारी बनकर किसी कारोबारी को निशाना बनाया?
  • क्या इस पूरे नेटवर्क में कोई अंदरूनी व्यक्ति या जानकारी उपलब्ध कराने वाला शख्स शामिल है?
  • क्या जीएसटी कंसल्टेंसी के काम में भी किसी तरह की अनियमितता हुई है?

इन सवालों के जवाब पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकते हैं।

फर्जी GST अधिकारी गैंग के साथ अब असली सवाल भी जरूरी

फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर 29 लाख रुपये की वसूली करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी निश्चित तौर पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई है, लेकिन इस मामले का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर संदीप कुमार को इस बात का डर था कि जीएसटी विभाग उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, तो उस डर की वजह क्या थी?

क्या गैंग ने सिर्फ झूठी कहानी बनाकर उन्हें डराया या फिर आरोपियों को उनके कारोबारी काम और जीएसटी मामलों से जुड़ी ऐसी जानकारी पहले से थी, जिसका इस्तेमाल करके उन्हें दबाव में लिया गया?

अब पुलिस की जांच इन दोनों पहलुओं पर आगे बढ़ती है तो यह साफ हो सकता है कि 29 लाख रुपये की वसूली केवल साइबर/फर्जी अधिकारी गैंग की चाल थी या इसके पीछे जीएसटी कंसल्टेंसी से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

 

यह भी पढ़ें: Noida Skywalk: नोएडा का पहला स्काईवॉक 16 अगस्त से शुरू, 45 करोड़ की लागत से दो मेट्रो लाइनें होंगी कनेक्ट

यहां से शेयर करें