राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में खुलासा करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय पर बढ़ा पुलिस का शिकंजा, FIR दर्ज, राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

ग़ाज़ियाबाद।उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में मिले चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर बड़ा खुलासा करने वाले वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। इस खुलासे के बाद से ही पत्रकार और उनके परिवार पर प्रशासनिक दबाव और कानूनी कार्रवाई का दौर जारी है।

हालिया घटनाक्रम में गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ रोड्रिज/रोड-रेज और मारपीट से संबंधित धाराओं के तहत एक नया मुकदमा दर्ज किया गया है। पत्रकार पक्ष का आरोप है कि इस नए मामले को आधार बनाकर पुलिस लगातार उनके और उनके परिवार पर दबाव बना रही है।

गाजियाबाद में नई FIR दर्ज, उत्पीड़न के आरोप

गाजियाबाद के इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में दर्ज इस ताजा मामले को लेकर अभिषेक उपाध्याय ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से और सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया कि यह कार्रवाई विशुद्ध रूप से उनके खिलाफ बदले की भावना से की जा रही है। उनका कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में खोजी रिपोर्टिंग करने के चलते उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है और पुलिस प्रशासन उनके परिजनों को पूछताछ के नाम पर प्रताड़ित कर रहा है।

पुलिस और प्रशासन का रुख

दूसरी ओर, गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई मिली शिकायत और निष्पक्ष जांच के आधार पर की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार:

 घटना की शिकायत पीड़ित पक्ष द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद वैधानिक धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

 पुलिस का दावा है कि कानून के मुताबिक सभी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं और इसमें कोई द्वेषपूर्ण कार्रवाई शामिल नहीं है।

राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख

अपने और अपने परिवार के खिलाफ लगातार हो रही कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अभिषेक उपाध्याय ने सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में उन्होंने:

 अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों (FIRs) को रद्द करने की मांग की है।

 दुर्भावनापूर्ण पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण/सुरक्षा की गुहार लगाई है।

 खोजी पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रशासनिक उत्पीड़न रोकने के संबंध में भी निर्देश देने का अनुरोध किया है।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मीडिया जगत और पत्रकार संगठनों में भी गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

यहां से शेयर करें