नई दिल्ली/इस्लामाबाद। मध्य पूर्व में महीनों से जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच के भीषण युद्ध में एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से बातचीत के बाद दो हफ्ते के लिए ईरान पर बमबारी रोकने का ऐलान किया। इसके बदले में ईरान ने हॉर्मूज जलडमरूमध्य से दो हफ्ते के लिए सुरक्षित आवागमन की अनुमति देने पर सहमति जताई।
आखिरी पलों में पाकिस्तान की ‘मास्टरस्ट्रोक’ डिप्लोमेसी
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप के समयसीमा खत्म होने से कुछ घंटे पहले अपील की कि ट्रंप दो हफ्ते के लिए अपनी डेडलाइन बढ़ाएं और ईरान से अनुरोध किया कि वह हॉर्मूज को दो हफ्ते के लिए खोले। यह अपील काम आई। ट्रंप ने Truth Social पर लिखा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल के अनुरोध पर वे ईरान पर हमला दो हफ्ते के लिए टाल रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने भी पाकिस्तानी नेताओं का नाम लेकर युद्ध रोकने में उनकी भूमिका की सराहना की।
युद्धविराम की शर्तें क्या हैं?
दोनों पक्षों के बीच यह “दोतरफा युद्धविराम” है। ईरान ने कहा कि दो हफ्ते तक ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय से हॉर्मूज से सुरक्षित आवागमन संभव होगा। इसके बाद आगे की बातचीत इस्लामाबाद में होने की उम्मीद है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक शांति समझौते पर बात होगी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने दोनों देशों को इस्लामाबाद में 10 अप्रैल 2026 को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।
इजरायल का क्या रुख?
इजरायल ने भी इस अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई है, हालांकि प्रधानमंत्री नेतान्याहू ने लेबनान में युद्धविराम से इनकार किया और कहा कि वे केवल ईरान के मामले में इसका पालन करेंगे।
पृष्ठभूमि: कैसे शुरू हुआ यह युद्ध?
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों से शुरू हुआ था, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खमेनेई मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों पर मिसाइल हमले किए और हॉर्मूज जलडमरूमध्य बंद कर दिया। इस युद्ध को 1970 के दशक के ऊर्जा संकट के बाद दुनिया की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा बताया जा रहा है, जिससे तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं।
भारत के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका
यह युद्धविराम मानवता के लिए राहत की खबर जरूर है, लेकिन भारतीय कूटनीति के लिहाज से यह एक बड़ी चूक के रूप में देखा जा रहा है। जिस पाकिस्तान को भारत आतंकवाद का पोषक देश कहता है, उसी पाकिस्तान ने आज दुनिया में शांतिदूत की भूमिका निभाई। पाकिस्तान ने 23 मार्च को ही इस्लामाबाद को अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए मंच के रूप में पेश किया था और 31 मार्च को चीन के साथ मिलकर पांच सूत्रीय प्रस्ताव रखा था। पाकिस्तान एक साथ अमेरिका, रूस, चीन और ईरान — सभी का विश्वास जीतने में सफल रहा, जबकि भारत इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया से लगभग अनुपस्थित रहा।
भारत और आम जनता पर असर
हॉर्मूज के खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है। युद्धविराम की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतें 8 प्रतिशत तक गिर गईं। इससे भारत में भी पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में राहत मिलने की संभावना है, हालांकि टैंकरों के पहुंचने में अभी कुछ वक्त लगेगा।
आगे क्या?
यह युद्धविराम अभी अस्थायी है। असली परीक्षा यह होगी कि इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता कोई ठोस और स्थायी नतीजा दे पाती है या नहीं। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने संकेत दिया है कि यदि बातचीत सकारात्मक रही तो युद्धविराम को दो हफ्ते से आगे भी बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हैं।

