नोएडा। सेक्टर-128 स्थित जेपी विशटाउन परियोजना में निर्माण कार्य में देरी और स्वीकृत योजना से हटकर काम कराए जाने की शिकायतों पर शासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके लिए नोएडा के ओएसडी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसे एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
जेपी विशटाउन का निर्माण मूल रूप से जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड ने शुरू किया था। परियोजना तय समय पर पूरी न होने और अन्य अड़चनों के चलते मामला एनसीएलटी तक पहुंच गया था। एनसीएलटी से स्वीकृत रिजोल्यूशन प्लान के तहत परियोजना पूरी कराने की जिम्मेदारी सुरक्षा रियल्टी को सौंपी गई थी। अब सुरक्षा रियल्टी के कामकाज पर भी सवाल उठे हैं। परियोजना के निवासी आशीष ने 10 अगस्त 2026 को शासन में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें निर्धारित समयसीमा में निर्माण पूरा न करने, स्वीकृत डीपीआर और मानचित्र के अनुरूप काम न होने तथा मंजूर योजना से अलग निर्माण कराए जाने के आरोप लगाए गए।
कमेटी में कौन-कौन
समिति की अध्यक्षता नोएडा के ओएसडी संतोष कुमार कर रहे हैं। सदस्यों में नोएडा नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक वैभव गुप्ता, नोएडा के वरिष्ठ एवं वित्त लेखाधिकारी विजय स्वरूप, यीडा वित्त विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक सलीम अहमद और यीडा नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक मनीष लाल शामिल हैं।
इन सात बिंदुओं पर होगी जांच
- एनसीएलटी से स्वीकृत रिजोल्यूशन प्लान की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं।
- मौजूदा निर्माण स्वीकृत डीपीआर और मानचित्र के अनुरूप है या नहीं।
- स्वीकृत योजना से अलग कोई अतिरिक्त टावर, फ्लोर, यूनिट या बिल्टअप एरिया बनाया गया है या नहीं, और यदि हां तो उसके लिए प्राधिकरण से अनुमति ली गई थी या नहीं।
- अतिरिक्त निर्माण से खरीदारों के हिस्से का खाली क्षेत्र, हरियाली, कॉमन सुविधाएं, पार्किंग, सड़क और फायर सेफ्टी प्रभावित हुई है या नहीं।
- एफएआर या स्वीकृत ग्राउंड कवरेज में अनधिकृत बढ़ोतरी हुई है या नहीं।
- खरीदारों के अधिकारों पर क्या असर पड़ा और परियोजना की वास्तविक प्रगति कितनी है।
- खरीदारों से मिली धनराशि का उपयोग परियोजना के निर्माण में ही हो रहा है या कहीं और डायवर्ट की गई।
खरीदारों को उम्मीद
लंबे समय से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे खरीदारों के लिए यह जांच अहम मानी जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद शासन आगे की कार्रवाई तय करेगा।
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