शाहनवाज राणा के ठिकानों पर ED की कार्रवाई के बाद बड़ा खुलासा, नोएडा-गाजियाबाद में मिलीं कथित फर्जी कंपनियां; करोड़ों की ITC पर जांच तेज

नोएडा/गाजियाबाद। फर्जी कंपनियों और जाली दस्तावेजों के जरिए कथित तौर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई अब बसपा के पूर्व एमएलसी शाहनवाज राणा से जुड़े लोगों तक पहुंच गई है। ईडी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश और हरियाणा में शाहनवाज राणा तथा उनके करीबियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये की नकदी के साथ बड़ी संख्या में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए गए हैं।

ईडी की जांच आगे बढ़ने के साथ अब नोएडा और गाजियाबाद में शाहनवाज राणा के कथित रिश्तेदारों से जुड़ी कई कंपनियां जांच के घेरे में आ गई हैं। जांच एजेंसी को संदेह है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल कागजों पर कारोबार दिखाकर फर्जी ITC का लाभ लेने और उसे आगे ट्रांसफर करने के लिए किया गया।

रजिस्टर्ड पते पर नहीं मिलीं कंपनियां

जांच के दौरान ईडी को ऐसी कंपनियों के बारे में जानकारी मिली, जिनके नाम पर करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाया गया था। इन कंपनियों ने कथित तौर पर ITC क्लेम भी किया।

इसके बाद जांच टीम ने संबंधित कंपनियों के पंजीकृत पतों का मौके पर जाकर सत्यापन किया। जांच में सामने आया कि जिन पतों पर कंपनियां सरकारी रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड थीं, वहां वास्तविक तौर पर संबंधित कंपनियां मौजूद ही नहीं थीं।

इससे ईडी का शक और गहरा गया है कि कहीं इन कंपनियों को सिर्फ कागजों पर बनाकर फर्जी बिलिंग और टैक्स क्रेडिट के नेटवर्क में तो इस्तेमाल नहीं किया गया।

फर्जी ITC नेटवर्क की जांच में सामने आए कई अहम तथ्य

मामले की जांच फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ी हुई है। पहले हुई GST जांच में करीब ₹9.63 करोड़ के ITC को गलत तरीके से हासिल करने और करीब ₹10.28 करोड़ के ITC को आगे पास करने की गड़बड़ी सामने आने की जानकारी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक नेटवर्क में सर्कुलर ट्रांजैक्शन, फंड की लेयरिंग और नकदी निकासी जैसे पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

ED इसी आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी कंपनियों के जरिए तैयार किए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल किन कारोबारियों और कंपनियों ने किया और इस कथित नेटवर्क से वास्तविक आर्थिक लाभ किसे मिला।

3.80 करोड़ रुपये नकद बरामदगी ने बढ़ाया मामला

ED की कार्रवाई के दौरान शाहनवाज राणा और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों से करोड़ों रुपये नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग रिपोर्टों में बरामद नकदी का आंकड़ा ₹3.60 करोड़ से ₹3.89 करोड़ के बीच बताया गया है।

ईडी ने कार्रवाई के दौरान दस्तावेजों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी कब्जे में लिए हैं। इनसे संबंधित कंपनियों, बैंक लेनदेन और कथित ITC नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

गाजियाबाद की कंपनी भी जांच के दायरे में

जांच में गाजियाबाद स्थित सुधा स्टील्स का नाम भी सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक इस ठिकाने से भी नकदी बरामद की गई थी। जांच एजेंसी फर्जी इनवॉइस, ई-वे बिल और कथित ITC लेनदेन के बीच संबंधों को खंगाल रही है।

ईडी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कागजों पर दिखाए गए माल की वास्तविक खरीद-बिक्री हुई थी या केवल दस्तावेज तैयार करके टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया।

नोएडा कनेक्शन पर भी नजर

मामले में नोएडा का कनेक्शन सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी जांच महत्वपूर्ण हो गई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि नोएडा और गाजियाबाद में रजिस्टर्ड कथित फर्जी कंपनियों का संचालन कौन कर रहा था, उनके बैंक खातों में कितना लेनदेन हुआ और किन कारोबारियों को इन कंपनियों से बिल या ITC मिला।

अगर जांच में कंपनियों के फर्जी होने और उनके जरिए गलत तरीके से ITC लेने की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग समेत अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।

जंबूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स भी जांच में

ED की कार्रवाई का संबंध जंबूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े कथित फर्जी ITC मामले से भी बताया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक शाहनवाज राणा पहले इस कंपनी के निदेशक रहे हैं और वर्तमान में कंपनी का संचालन शाह आजम राणा के पास है। एजेंसी का आरोप है कि बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के जाली इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिए ITC तैयार करने और उसे आगे पास करने का नेटवर्क चलाया गया।

अब सितंबर में पूछताछ की तैयारी

ED की कार्रवाई के बाद जांच एजेंसी अब संबंधित लोगों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक आरोपियों को सितंबर के पहले सप्ताह में समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

पूछताछ में मुख्य फोकस कथित फर्जी कंपनियों के गठन, उनके बैंक खातों, ITC क्लेम, इनवॉइस और ई-वे बिल, वास्तविक कारोबार तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर रह सकता है।

जांच आगे बढ़ने पर खुल सकता है बड़ा नेटवर्क

फिलहाल ED की जांच जारी है और किसी व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। हालांकि नोएडा और गाजियाबाद में कागजों पर रजिस्टर्ड कंपनियों के वास्तविक पते पर मौजूद न होने की जानकारी ने जांच को नया एंगल दे दिया है।

अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या ये कंपनियां केवल कागजों पर बनाई गई थीं और क्या इनके जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाकर फर्जी ITC का नेटवर्क चलाया जा रहा था। आने वाले दिनों में बैंक लेनदेन, GST रिकॉर्ड, इनवॉइस और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य कंपनियों और लोगों के नाम सामने आने की संभावना है।

 

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