कानपुर की कंपनी ने दिल्ली के चाँदनी चौक हवाला चैनल से भेजी थी रिश्वत, अदालत ने बढ़ाई रिमांड
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रक्षा खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते हुए भारतीय सेना के आर्मी ऑर्डिनेंस कोर के एक वरिष्ठ अधिकारी कर्नल हिमांशु बाली को गिरफ्तार किया है। यह अधिकारी कोलकाता स्थित ईस्टर्न कमांड, फोर्ट विलियम में तैनात था। मामले की परतें खुलती गईं तो जांच का धागा नोएडा तक आ पहुँचा, जहाँ से हवाला के जरिए भेजे गए ₹50 लाख की नकद रकम बरामद हुई।
क्या है पूरा मामला?
CBI के अनुसार, 16 मई 2026 को कर्नल हिमांशु बाली ने रिश्वत की बकाया राशि की माँग की थी। इस राशि को दिल्ली-NCR क्षेत्र में हवाला चैनल के माध्यम से स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही थी। CBI ने आरोप लगाया है कि कर्नल बाली ने रक्षा खरीद टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी की, घटिया सामग्री के नमूनों को मंजूरी दी और लंबित तथा बढ़े-चढ़े बिलों की क्लियरेंस के बदले अवैध भुगतान स्वीकार किया।
कानपुर की कंपनी और हवाला का जाल
आरोप है कि कानपुर के रक्षा आपूर्तिकर्ता अक्षत अग्रवाल और मयंक अग्रवाल ने दिल्ली के चाँदनी चौक हवाला चैनल के जरिए ₹50 लाख की रिश्वत पहुँचाई। CBI ने अदालत में बताया कि आशुतोष शुक्ला ने हवाला से रकम इकट्ठा कर 18 मई को नरेश कुमार पाल को सौंपी और यह रकम नोएडा में यश गुप्ता के घर से CBI टीम ने बरामद की।
नोएडा कनेक्शन: यश गुप्ता के घर से बरामद हुई रकम
विशेष CBI जज स्मिता गर्ग ने कर्नल हिमांशु बाली की CBI हिरासत को बढ़ाते हुए अक्षत अग्रवाल और मयंक अग्रवाल को पाँच दिन की नई रिमांड दी। अदालत ने कहा “मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जांच में सहायता के लिए दोनों आरोपियों को पाँच दिन की हिरासत CBI को दी जाती है। उन्हें 30 मई को पेश किया जाए।” एक अन्य आरोपी यश गुप्ता की जमानत सुनवाई भी 30 मई को निर्धारित है और वह न्यायिक हिरासत में है।
फरार आरोपी पकड़े गए
CBI के सरकारी अभियोजक ने अदालत को बताया कि अक्षत अग्रवाल और मयंक अग्रवाल फरार थे और लगातार प्रयासों के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। CBI ने इनका मोड ऑपरेंडी और अन्य अज्ञात सरकारी व निजी व्यक्तियों से संबंध उजागर करने के लिए पाँच दिन की हिरासत माँगी।
FIR में कौन-कौन नामजद?
इस मामले में कर्नल हिमांशु बाली के साथ-साथ अक्षत अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, आशुतोष शुक्ला, नरेश पाल और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) के तहत दर्ज किया गया है।
रक्षा मंत्रालय में भ्रष्टाचार की श्रृंखला
यह पहला मामला नहीं है जब CBI ने रक्षा महकमे में ऐसे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया हो। दिसम्बर 2025 में CBI ने लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा को रक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन में तैनाती के दौरान दुबई स्थित एक लॉजिस्टिक्स कंपनी के लिए MEA की मंजूरी दिलाने के बदले ₹3 लाख रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उनके दिल्ली आवास पर छापे में ₹2.36 करोड़ से अधिक की नकदी बरामद हुई। उस मामले में CBI ने लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा की पत्नी कर्नल काजल बाली, 16वीं इन्फेंट्री डिवीजन ऑर्डिनेंस यूनिट, श्री गंगानगर (राजस्थान) की कमांडिंग ऑफिसर, और दुबई स्थित कंपनी के प्रतिनिधियों को भी आरोपी बनाया था।
जांच का दायरा
CBI सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में हवाला नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या रक्षा सौदों और टेंडर प्रक्रियाओं में और भी अधिकारियों की संलिप्तता है। चाँदनी चौक के हवाला ऑपरेटरों से पूछताछ जारी है और नोएडा में यश गुप्ता की भूमिका की भी गहन जांच हो रही है।

