Khanauri Border Tension: खनौरी बॉर्डर पर भारी तनाव, NH-52 पर डटे किसान, सुरक्षा बल अलर्ट

Khanauri Border Tension: पंजाब और हरियाणा की सीमा पर एक बार फिर तनाव का माहौल है। सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-52 (NH-52) का एक हिस्सा जाम हो गया, जब संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) से जुड़े किसानों ने खनौरी में सड़क के एक तरफ तंबू गाड़ दिए। हरियाणा प्रशासन ने किसानों की दिल्ली-कूच ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद यह गतिरोध शुरू हुआ। इस घटनाक्रम ने 2024-25 के किसान आंदोलन के दौरान इसी हाईवे पर लगे लंबे जाम की यादें ताज़ा कर दी हैं।

क्या है पूरा मामला

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के संयोजक जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में किसानों ने 16 अगस्त को पंजाब के दातासिंहवाला गांव से यह पदयात्रा शुरू की थी। शुरुआत में 51 किसान पैदल मार्च करने वाले थे, जबकि करीब 200 अतिरिक्त सदस्य सहयोगी स्टाफ के रूप में साथ चल रहे थे। योजना के मुताबिक इन्हें 228 किलोमीटर की दूरी तय कर 29 अगस्त तक दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचना था।डल्लेवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हम 16 अगस्त से 51 किसानों के समूह में जंतर-मंतर की ओर कूच करने वाले थे, साथ में 200 अतिरिक्त सहयोगी स्टाफ भी था। हमें 228 किलोमीटर तय कर 29 अगस्त को जंतर-मंतर पहुंचना था, ताकि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के प्रस्ताव का विरोध किया जा सके। जब हमें पैदल चलने की भी इजाजत नहीं दी गई, तो जहां रोका गया वहीं बैठने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा।”

प्रशासन की सख्ती

जींद प्रशासन ने पदयात्रा शुरू होने से पहले ही खनौरी बॉर्डर को पांच परतों की बैरिकेडिंग से सील कर दिया था। जींद के पुलिस अधीक्षक ने साफ किया कि किसानों को हरियाणा में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी, क्योंकि उनके पास मार्च के लिए जरूरी अनुमति नहीं है। किसानों और प्रशासन के बीच अब तक हुए वार्ता के दौर भी बेनतीजा रहे हैं। रोके जाने के बाद किसानों ने सड़क किनारे ही बिस्तर बिछाकर रात गुजारने का फैसला किया। डल्लेवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा सरकार से शांतिपूर्ण ढंग से सीमित संख्या में दिल्ली कूच की अनुमति देने की अपील भी की है।

खनौरी का भावनात्मक जुड़ाव

खनौरी किसान आंदोलन के लिए एक भावनात्मक प्रतीक बन चुका है। 21 फरवरी 2024 को इसी स्थान पर 21 वर्षीय किसान शुभकरण सिंह की सुरक्षाबलों के साथ झड़प में सिर में चोट लगने से मौत हो गई थी। मौजूदा पदयात्रा शुरू करने से पहले किसानों ने उसी स्थल से मिट्टी उठाई, जहां शुभकरण सिंह की जान गई थी।

मुद्दा क्या है

किसान नेताओं का कहना है कि उनकी लड़ाई सीधे केंद्र सरकार की व्यापार नीति से है, राज्य प्रशासन से नहीं। डल्लेवाल ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री से बातचीत से कोई समाधान नहीं निकलेगा, केंद्र सरकार के साथ सीधी बैठक ही उनकी मांगों का हल निकाल सकती है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अलावा किसान MSP की कानूनी गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और कर्ज माफी जैसी पुरानी मांगें भी उठा रहे हैं। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और किसानों के बीच कोई समझौता होता है या खनौरी एक बार फिर लंबे गतिरोध का गवाह बनता है।

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