K-dramas, K-pop, and kimchi: कोरियन कल्चर ने कैसे जीता भारत का दिल, हल्यू वेव की असली वजहें

K-dramas, K-pop, and kimchi: गाजियाबाद की तीन बहनों की दुखद आत्महत्या की खबर ने कोरियन कल्चर को लेकर बहस छेड़ दी है, लेकिन इससे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कोरियन पॉप कल्चर (हल्यू वेव) ने भारत में इतनी गहरी पैठ कैसे बना ली? 2022 से तेजी से बढ़ते इस ट्रेंड में के-ड्रामा, के-पॉप, कोरियन खाना, फैशन और भाषा सीखने की ललक शामिल है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का नतीजा है जो परिवार, परंपरा, महिला केंद्रित कहानियों और ‘सॉफ्ट मस्कुलिनिटी’ से आता है।

परिवार और परंपरा की समानता
कोरियन ड्रामा भारतीय दर्शकों को इसलिए भाते हैं क्योंकि इनमें परिवार सबसे ऊपर होता है। बुजुर्गों का सम्मान, कर्तव्य, त्याग और सामाजिक दबाव जैसी थीम भारतीय और एशियाई मूल्यों से मेल खाती हैं। पश्चिमी शोज में जहां बगावत और स्वतंत्रता दिखाई जाती है, वहीं के-ड्रामा में व्यक्तिगत इच्छा और परिवार की जिम्मेदारी के बीच संघर्ष को बारीकी से दिखाया जाता है।
ऐतिहासिक और पीरियड ड्रामा में राजपरिवार, साजिशें और उत्तराधिकार की लड़ाई भारतीय मिथकों और सीरियलों से मिलती-जुलती हैं। नतीजा यह कि 50-60 साल के दर्शक भी हिंदी डब्ड वर्जन में के-ड्रामा देख रहे हैं। OTTScrape रिसर्च (2025) के अनुसार, 30 साल से ऊपर के दर्शक अब के-ड्रामा के बड़े हिस्से हैं, खासकर परिवार के साथ देखने में।

दिल्ली की 58 साल की गृहिणी जयति चटर्जी कहती हैं, “के-ड्रामा में मासूम चेहरे, नेचुरल एक्टिंग, प्यार-रोमांस और मजबूत परिवार मूल्य हैं। ये हमारी जिंदगी से जुड़े लगते हैं। ज्यादातर शोज महिला केंद्रित होते हैं, जो मुझे ज्यादा आकर्षित करते हैं।”

महिला दर्शकों के लिए नया नजरिया
भारतीय मुख्यधारा सिनेमा में हाइपर-मस्कुलिन हीरो (दबंग, सिंघम, KGF, पुष्पा) हावी हैं, जहां आक्रामकता और भावनाहीनता को आदर्श माना जाता है। के-ड्रामा इसका उलटा है। पुरुष किरदार भावुक, कोमल, ध्यान देने वाले और कमजोर पड़ने वाले होते हैं। वे रोते हैं, बात करते हैं, खाना बनाते हैं और माफी मांगते हैं।

यह ‘सॉफ्ट मस्कुलिनिटी’ महिलाओं और लड़कियों के लिए ताजगी भरी है। के-पॉप में भी स्टाइल, स्किनकेयर और ब्यूटी को जेंडर न्यूट्रल दिखाया जाता है, जो भारतीय युवतियों को अपनी भावनाओं का प्रतिबिंब लगता है।

स्क्रीन से सड़क तक: खाना, फैशन और लाइफस्टाइल
कोरियन कल्चर अब सिर्फ स्क्रीन तक सीमित नहीं है। Swiggy के 2025 डेटा के मुताबिक, जुलाई 2025 में मेट्रो शहरों में कोरियन फूड ऑर्डर 50% बढ़े, जबकि टियर-2/3 शहरों (सूरत, मैसूरू) में 59% की ग्रोथ हुई। रेमन, ट्टेओकबोक्की, कॉर्न डॉग और किमची की डिमांड के-ड्रामा से प्रेरित है।

फैशन में ओवरसाइज सिल्हूट, लेयर्ड क्लोथिंग और मिनिमल स्टाइल कॉलेज कैंपस और सोशल मीडिया पर छा गया है। कोलकाता की 34 साल की सुतपा दास सरकार कहती हैं, “मैं स्कूल में सुपर जूनियर के गानों से शुरू हुई। अब कोरियन सोसाइटी की समानताएं (बंगाली और भारतीय संस्कृति से) मुझे बांधे रखती हैं।”

संगीत, भाषा और नई पीढ़ी
के-पॉप बच्चों से लेकर बड़ों तक पहुंचा है। नेटफ्लिक्स की ‘KPop Demon Hunters’ ने 2025 में 266 मिलियन व्यूज के साथ भारत में नंबर-1 रहा। 2026 ग्रैमी में ‘गोल्डन’ गाने ने बेस्ट सॉंग फॉर विजुअल मीडिया का अवॉर्ड जीता – पहली बार किसी के-पॉप ट्रैक ने।

Duolingo के 2023 स्टडी में भारत में कोरियन सीखने वालों में 75% सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई, ज्यादातर 13-22 साल के। डांस स्टूडियो, कॉलेज फेस्ट और रील्स में BTS और के-पॉप कोरियोग्राफी आम है।

पैनिक के बजाय समझना जरूरी
गाजियाबाद की घटना दुखद है और स्क्रीन एडिक्शन, भावनात्मक दबाव जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन कोरियन कल्चर को पूरी तरह दोष देना गलत है। यह भारतीय दर्शकों (खासकर युवाओं और महिलाओं) को वह भावनात्मक सुरक्षा, सुंदरता और परिचितता देता है जो कहीं और कम मिलती है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि हल्यू वेव भारत में सॉफ्ट पावर का बेहतरीन उदाहरण है, जो सांस्कृतिक समानताओं और भावनात्मक कमी को भरता है। यह ट्रेंड आगे और मजबूत होता दिख रहा है।

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