जमुई बैड टच केस, नाबालिगों से बदसलूकी, वायरल वीडियो, एनकाउंटर और 120 अकाउंट पर FIR की पूरी टाइमलाइन

बिहार के जमुई जिले में एक भीड़ द्वारा दो नाबालिग छात्र-छात्रा को सड़क पर घेरकर प्रताड़ित करने का मामला बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन गया है। पुलिस के मुताबिक 19 सितंबर की शाम को एक नाबालिग छात्र और छात्रा स्कूटी से लौट रहे थे, तभी कुछ युवकों ने उन्हें घेर लिया और रास्ते में रोककर बदसलूकी की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ही यह मामला सामने आया।

केस में अब तक की कार्रवाई

जांच में सामने आया कि इस मामले में तीन आरोपी नाबालिग हैं, जिन्हें हिरासत में लिया जा चुका है। मुख्य वयस्क आरोपियों की पहचान नंदन कुमार (नंदन यादव) और हरेराम यादव के रूप में हुई, जो जमुई सदर थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं और ट्रैक्टर चलाकर बालू ढोने का काम करते थे।

22 सितंबर को पुलिस टीम मुख्य फरार आरोपी को पकड़ने गई, इसी दौरान मुठभेड़ हुई। पुलिस के मुताबिक, वीडियो वायरल करने वाले मुख्य फरार आरोपी को पकड़ने गई टीम की मुठभेड़ हो गई, जिसमें आरोपी को गोली लगी। दूसरे आरोपी हरेराम का भी भागने के दौरान पैर टूट गया बताया जा रहा है। एडीजी (कानून-व्यवस्था) के. एस. अनुपम के अनुसार, मामले की निगरानी के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट की कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है, जिनमें बीएनएस की धारा 128, 74 और 75 के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 8 और 12 शामिल हैं।

वीडियो वायरल करने वालों पर भी शिकंजा

जमुई पुलिस ने साफ किया है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना खुद एक अलग अपराध है। एसपी विश्वजीत दयाल के अनुसार, करीब 120 अलग-अलग सोशल मीडिया प्रोफाइल धारकों के खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है, और लोगों से अपील की गई है कि पीड़िता से जुड़ा वीडियो डाउनलोड, शेयर या दोबारा वायरल न करें। पुलिस ने बताया है कि उल्लंघन करने वालों पर पॉक्सो एक्ट की धारा 23 और जेजे एक्ट की धारा 74 के तहत कार्रवाई होगी, जिनमें जमानत मिलना भी मुश्किल है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस घटना पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं आईं। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने वायरल वीडियो को बेहद विचलित करने वाला बताया, वहीं भाजपा ने एनकाउंटर के वीडियो को साझा करते हुए चेतावनी दी कि ऐसा करने की कोई सोचे भी नहीं। राष्ट्रीय महिला आयोग भी इस मामले में सक्रिय हो गया है।

⚠️ ज़रूरी सूचना: पॉक्सो एक्ट, 2012 की धारा 23 के तहत किसी भी नाबालिग पीड़ित की पहचान (नाम, फोटो, पता, स्कूल आदि) उजागर करना दंडनीय अपराध है। ऐसा करने पर 6 महीने से 1 साल तक की सजा या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। यही वजह है कि इस रिपोर्ट में पीड़ित नाबालिग छात्र-छात्रा की कोई पहचान संबंधी जानकारी नहीं दी गई है।

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