Israel-US-Iran war threatening the Dholera project: इज़रायल-अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और जंग की आशंकाओं के बीच गुजरात का महत्वाकांक्षी ढोलेरा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पूरी तरह सुरक्षित नज़र है। एनबीटी (नवभारत टाइम्स) ने पिछले सालों में इस प्रोजेक्ट की प्रगति पर काफी कवरेज किया, लेकिन कोई भी रिपोर्ट या ताजा अपडेट यह नहीं कहता कि जंग से प्रोजेक्ट “खराब” हो जाएगा या “डूब” जाएगा। उल्टा, मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट्स बताती हैं कि दुबई रियल एस्टेट से निवेशक ढोलेरा की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, क्योंकि भारत की स्थिरता और सरकारी बैंकों की स्कीम उन्हें आकर्षित कर रही है। बीजेपी मंत्रियों या निजी निवेशकों का पैसा डूबने का कोई सवाल ही नहीं – प्रोजेक्ट पूरी तरह सरकारी (केंद्र + गुजरात) और बड़े कॉर्पोरेट (टाटा, माइक्रॉन) फंडिंग पर चल रहा है।
ढोलेरा की ताजा स्थिति (मार्च 2026): ढोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR) 920 वर्ग किमी में फैला है। एक्टिवेशन एरिया (22.5 वर्ग किमी) पूरी तरह ऑपरेशनल हो चुका है – 72 किमी इंटरनल रोड्स, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (50 MLD), सीवेज और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, 500 MVA पावर इंफ्रा सब तैयार। अहमदाबाद-ढोलेरा एक्सप्रेसवे 91% पूरा (फरवरी 2025 तक), जून 2025 में चालू होने वाला है। ढोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंस्ट्रक्शन में है। सेमीकंडक्टर हब बन रहा है – टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का ₹91,000 करोड़ प्लांट, नेक्स्टजेन का ₹10,000 करोड़ कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, ताइवान की PSMC और हिमैक्स के साथ समझौते। पहला मेड-इन-इंडिया चिप 2025 के अंत तक, प्रोडक्शन दिसंबर 2026 से। फेज-1 लगभग पूरा, बाकी 2032 और 2042 तक। गुजरात सेमीकंडक्टर पॉलिसी और डीएमआईसी के तहत केंद्र-राज्य सरकारें फंड दे रही हैं।
जंग का असर: दुबई से फायदा, ढोलेरा को नुकसान नहीं कनारा रोबेको जैसे फंड हाउस कह रहे हैं कि इज़रायल-ईरान जंग का भारत पर असर “सीमित” रहेगा – सिर्फ तेल की कीमतें थोड़ी बढ़ सकती हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था मजबूत है। ढोलेरा पर तो कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं। उल्टा, मार्च 2026 की रिपोर्ट्स (बुकमायएसेट्स, ढोलेरा टाइम्स) साफ कहती हैं: अमेरिका-इज़रायल-ईरान तनाव की वजह से दुबई रियल एस्टेट से निवेशक भारत की ओर मुड़ रहे हैं। वजह – दुबई में जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता, जबकि ढोलेरा भारत सरकार की गारंटी वाला, लंबे समय का इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। एनआरआई और ग्लोबल इन्वेस्टर (अमेरिका, यूके, सिंगापुर, यूएई, हॉन्गकॉन्ग) ढोलेरा में प्लॉट और लैंड की पूछताछ बढ़ा रहे हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया, “जियोपॉलिटिकल टेंशन के समय निवेशक स्थिर अर्थव्यवस्थाओं की ओर जाते हैं – ढोलेरा भारत की सबसे तेज बढ़ती इकोनॉमी का हिस्सा है।”
बीजेपी मंत्रियों और इन्वेस्टरों का पैसा? बिल्कुल सुरक्षित ढोलेरा कोई प्राइवेट स्कीम नहीं, यह डीएमआईसी और गुजरात एसआईआर एक्ट के तहत सरकारी प्रोजेक्ट है। अमित शाह और पीएम मोदी ने इसे काफ़ी प्रमोट भी किया है, लेकिन फंडिंग केंद्र और राज्य सरकार की है (पुराने आंकड़ों में ₹3,000 करोड़ DMIC से)। मुख्य निवेश टाटा, माइक्रॉन, जापानी डेलिगेशन और अन्य कॉर्पोरेट से आ रहा है। कोई रिपोर्ट नहीं मिली जिसमें बीजेपी मंत्रियों का “निजी पैसा” डूबने की बात हो। एनबीटी ने भी सिर्फ प्रोग्रेस रिपोर्ट्स छापीं, कोई “कैंपेन” जंग से जोड़कर नहीं किया।
निष्कर्ष: ढोलेरा मजबूत और आकर्षक बना हुआ है इज़रायल-अमेरिका-ईरान जंग का ढोलेरा पर कोई बुरा असर नहीं पड़ रहा। उल्टा, स्थिर भारत की वजह से निवेश बढ़ रहा है। सरकारी बैकिंग, सेमीकंडक्टर बूम और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स इसे 2042 तक भारत का ग्लोबल हाई-टेक हब बना देंगे। जो लोग एनबीटी कवरेज देखकर चिंतित हैं, उन्हें ताजा अपडेट्स से राहत मिलनी चाहिए, पैसा डूबने का कोई खतरा नहीं, बल्कि ग्रोथ का मौका है। गुजरात सरकार और केंद्र दोनों इसे प्राथमिकता दे रहे हैं।

