Hydrogen bus trials suspended: नोएडा में हाइड्रोजन बसों का ट्रायल 18 दिन में बंद, अब ग्रेटर नोएडा-आगरा रूट पर होगा परीक्षण

Hydrogen bus trials suspended: नोएडा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी में हाइड्रोजन बसों को लेकर शुरू किया गया प्रयोग फिलहाल उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सका है। एक महीने के लिए तय किए गए ट्रायल के लिए उतारी गई तीन हाइड्रोजन बसों का संचालन महज 18 दिन बाद ही रोक दिया गया। ट्रायल के दौरान यात्रियों की संख्या उम्मीद से काफी कम रही, जबकि संचालन लागत ई-बसों की तुलना में कहीं ज्यादा सामने आई।

17,444 किलोमीटर का सफर, फिर भी नहीं मिला अपेक्षित रिस्पॉन्स

अधिकारियों के मुताबिक तीनों बसों ने ट्रायल के दौरान करीब 17,444 किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान कुछ तकनीकी दिक्कतें भी सामने आईं। बसों का संचालन तय रूट पर किया गया, लेकिन यात्रियों की संख्या उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। वहीं दूसरी ओर हाइड्रोजन ईंधन और बसों के रखरखाव पर आने वाला खर्च भी काफी अधिक पाया गया। फिलहाल बसों का संचालन रोककर इन तकनीकी खामियों को दूर करने और ट्रायल से जुटाए गए आंकड़ों का विस्तृत आकलन करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने प्रयोग को तत्काल आगे बढ़ाने के बजाय पहले इसकी तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता समझने का फैसला किया है।

अब ग्रेटर नोएडा से आगरा तक चलेंगी हाइड्रोजन बसें

यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोजन बसों को छोटे रूट तक सीमित रखने के बजाय अब इन्हें ग्रेटर नोएडा से आगरा तक चलाने की योजना पर काम किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे रूट पर संचालन से बसों की वास्तविक क्षमता, हाइड्रोजन की खपत और संचालन लागत का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा जैसे लंबे कॉरिडोर पर हाइड्रोजन वाहनों के परीक्षण की योजना पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर बनाई जा चुकी है।

डीजल बसों की तरह नहीं छोड़तीं धुआं

हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों में हाइड्रोजन का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जाता है, जिससे डीजल बसों की तरह धुआं नहीं निकलता। ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल से परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि नोएडा के इस ट्रायल ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पर्यावरण के लिहाज से बेहतर तकनीक के साथ-साथ कम लागत, पर्याप्त यात्री संख्या, ईंधन की उपलब्धता और तकनीकी भरोसा भी उतना ही जरूरी है।

देशभर में 70 हाइड्रोजन वाहनों के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी

केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 70 हाइड्रोजन वाहनों को 21 रूट पर उतारने के लिए 12 पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें 27 बसें और 43 ट्रक शामिल हैं। इन परियोजनाओं के लिए देशभर में 16 हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन भी प्रस्तावित हैं। ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा रूट भी हाइड्रोजन वाहनों की तकनीक के परीक्षण के लिए चुने गए कॉरिडोर में शामिल है। ऐसे में नोएडा-ग्रेटर नोएडा में हुआ यह ट्रायल आगे हाइड्रोजन बसों के संचालन की योजना के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध करा सकता है।

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