Ghaziabad residents face a double whammy from April 1: गाजियाबादवासियों और व्यवसायियों पर एक साथ दो बड़े झटके लगे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगर निगम की हाउस टैक्स बढ़ोतरी को बरकरार रखते हुए PIL खारिज कर दी, तो वहीं परिवहन विभाग ने 1 अप्रैल 2026 से सभी कमर्शियल वाहनों में VLTD (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) अनिवार्य कर दिया है। बिना डिवाइस के वाहनों का परमिट, फिटनेस, NOC, नामांतरण और टैक्स पेमेंट सब ब्लॉक हो जाएगा। करीब 6 लाख टैक्सपेयर्स और 40,000 कमर्शियल वाहन मालिकों पर सीधा असर पड़ेगा।
हाउस टैक्स बढ़ोतरी: हाईकोर्ट का फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की डिवीजन बेंच ने 77 पेज के विस्तृत फैसले में PIL खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा, “टैक्स बढ़ाने की पूरी प्रक्रिया कानूनी है, कोई गलती नहीं मिली।”नगर निगम ने विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं के लिए टैक्स में भारी बढ़ोतरी की थी। 6 लाख से ज्यादा टैक्सपेयर्स प्रभावित। पूर्व पार्षद राजेंद्र त्यागी समेत तीन पूर्व पार्षदों की PIL खारिज होने के बाद अब डिफॉल्टर्स पर सख्त वसूली होगी। फरवरी तक टैक्स जमा करने वालों को 20% छूट का फायदा मिलेगा। नगर निगम महापौर सुनीता दयाल ने कहा, “जनहित में प्रस्ताव पास हुआ था, अब विकास कार्य तेज होंगे।”
VLTD नियम: 1 अप्रैल से सख्ती
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग का राज्यव्यापी नियम: सभी कमर्शियल वाहनों (बस, टैक्सी, स्कूल वैन, लोडर आदि) में AIS-140 प्रमाणित VLTD (GPS ट्रैकिंग + पैनिक बटन) लगाना जरूरी। 1 जनवरी 2026 से नए वाहनों में अनिवार्य, पुराने वाहनों को 31 मार्च 2026 तक समय।
1 अप्रैल से RTO पोर्टल पर सभी सेवाएं ब्लॉक: फिटनेस, परमिट नया/नवीनीकरण, NOC, नामांतरण, ऑनलाइन टैक्स। डिवाइस की कीमत + इंस्टॉलेशन + 1-3 साल का सिम/सॉफ्टवेयर ≈ ₹5,000 से ₹10,000 तक खर्च मालिक को खुद उठाना पड़ेगा।
उद्देश्य: महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा, रियल-टाइम ट्रैकिंग और इमरजेंसी अलर्ट। आरटीओ गाजियाबाद ने स्पष्ट किया, “सुरक्षा के लिए यह जरूरी है, बिना VLTD के कोई छूट नहीं।”
गाजियाबादवासियों पर क्या असर?
घर मालिकों की जेब ढीली: टैक्स बढ़ोतरी बरकरार, बकायेदारों पर नोटिस और रिकवरी हुई तेज।
वाहन मालिकों पर बोझ: 40,000+ कमर्शियल वाहनों को मार्च तक डिवाइस लगवाना होगा, नहीं तो काम-धंधा ठप।दोनों नियम एक साथ लागू होने से मध्यम वर्ग और छोटे व्यवसायियों पर दबाव बढ़ गया है। परिवहन विभाग और नगर निगम का कहना है कि ये कदम सुरक्षा और विकास के लिए हैं, लेकिन आम आदमी इसे “दोहरी मार” मान रहा है। गाजियाबादवासी अब मार्च में दोनों तैयारियों में जुट गए हैं।

