फेलिक्स हॉस्पिटल: महज 26 हफ्ते में जन्मे 660 ग्राम वजन के एक प्री-टर्म नवजात ने फेलिक्स हॉस्पिटल में इलाज के बाद जिंदगी की जंग जीत ली। करीब 72 दिन तक चले उपचार के बाद बच्चे का वजन बढ़कर 1640 ग्राम हो गया और अब उसे स्वस्थ हालत में डिस्चार्ज कर दिया गया है।
डॉक्टरों के अनुसार, फरुर्खाबाद में जन्मे इस बच्चे को लगभग 300 किलोमीटर दूर नोएडा लाना अपने आप में बड़ी चुनौती थी। रास्ते में नवजात की सांस, तापमान और अन्य जरूरी पैरामीटर को स्थिर बनाए रखना बेहद जोखिम भरा था, लेकिन विशेषज्ञों की टीम ने उसे सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाया। अस्पताल पहुंचते ही बच्चे को एनआईसीयू में भर्ती कर गहन निगरानी में रखा गया। फेलिक्स अस्पताल के पीडियाट्रिक एंड नियोनेटोलॉजिस्ट कंसलटेंट डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि जन्म के समय बच्चे का वजन मात्र 660 ग्राम था, जिसे मेडिकल भाषा में एक्सट्रीम लो बर्थ वेट कहा जाता है। ऐसे मामलों में जीवित रहने की संभावना बेहद कम होती है और कई जटिलताओं का खतरा बना रहता है।
शुरूआती दिनों में बच्चे को सांस लेने में दिक्कत के चलते सीपेप सपोर्ट पर रखा गया। बाद में हालत में सुधार होने पर उसे एचएफएनसी सपोर्ट पर शिफ्ट किया गया। इलाज के दौरान ब्लड ट्रांसफ्यूजन, टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रिशन (टीपीएन), सर्फैक्टेंट थेरेपी सहित आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का सहारा लिया गया। डॉक्टरों की सतत निगरानी और उन्नत इलाज के चलते बच्चे की हालत में लगातार सुधार हुआ। सबसे राहत की बात यह रही कि लंबे इलाज के बावजूद बच्चा न्यूरोलॉजिकली पूरी तरह फिट पाया गया और आंखों की गंभीर बीमारी रेटिनोपैथी आॅफ प्रीमैच्योरिटी का खतरा भी टल गया।

