लुका-छिपी मत खेलो: सुप्रीम कोर्ट की यूपी पुलिस को कड़ी फटकार, मुस्लिम धर्मगुरु हमले मामले में जांच पर उठाए गंभीर सवाल

लुका-छिपी मत खेलो: सुप्रीम कोर्ट ने साल 2021 में नोएडा में एक मुस्लिम धर्मगुरु पर हुए हमले की जांच में लापरवाही बरतने और ‘लुका-छिपी’ का खेल खेलने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को सख्त लहजे में फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्यप्रणाली न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने जैसी है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मुस्लिम धर्मगुरु काजिम अहमद शेरवानी से जुड़ा है। अपनी याचिका में शेरवानी ने आरोप लगाया था कि जुलाई 2021 में जब वह नोएडा के सेक्टर-37 से अलीगढ़ जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे, तब कुछ लोगों ने उन्हें कार में बिठाया और सुनसान जगह ले जाकर उन पर हमला किया। याचिकाकर्ता के अनुसार, हमलावरों ने न केवल उनके साथ मारपीट की, बल्कि उनकी दाढ़ी खींची, टोपी उतारी और उनकी धार्मिक पहचान को लेकर भद्दे कमेंट्स किए। शेरवानी का आरोप है कि यह पूरी तरह से हेट क्राइम‘ (नफरत से प्रेरित अपराध) का मामला था, जिसे पुलिस ने सामान्य अपराध की तरह पेश करने की कोशिश की।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस के रवैये पर भारी नाराजगी जताई। कोर्ट की प्रमुख आपत्तियां निम्नलिखित रहीं:

धाराओं को हटाने पर सवाल: पीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद एफआईआर में IPC की धारा 153बी (राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन या आरोप) को शामिल क्यों नहीं किया गया।

अदालत के साथ लुका-छिपी‘: कोर्ट ने सीधे तौर पर जांच अधिकारी (IO) की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा, जांच अधिकारी अदालत के साथ लुका-छिपी का खेल क्यों खेल रहा है? क्या वह अपनी मर्जी से IPC की धारा 153बी और 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) जैसी महत्वपूर्ण धाराओं को हटाने का अधिकार रखता है?”

जांच की निष्पक्षता: जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस ने घटना की गंभीरता को कम करने और इसे सांप्रदायिक एंगल से बचाने की कोशिश की है।

पुलिस की दलील और कोर्ट का निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि जांच जारी है और उचित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखा। कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता ने स्पष्ट रूप से अपनी धार्मिक पहचान के आधार पर हुए अपमान का विवरण दिया है, तो पुलिस इन धाराओं को जोड़ने से पीछे क्यों हट रही है।

आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले में यूपी पुलिस को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और सुधार करने का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि हेट क्राइम जैसे गंभीर मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई में पुलिस को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी।

महत्वपूर्ण तथ्य: भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153बी उन मामलों में लगाई जाती है जहाँ किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ उनके धर्म, नस्ल या जन्म स्थान के आधार पर ऐसी बयानबाजी या कृत्य किया जाता है जो राष्ट्रीय अखंडता के लिए खतरा हो।

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