Dhannipur Mosque in Ayodhya: फंड संकट गहराया, एक करोड़ भी नहीं जुटा, विदेशी दान पर टिकी उम्मीदें

Dhannipur Mosque in Ayodhya: राम मंदिर निर्माण के तेजी से पूरा होने और 30 अप्रैल 2026 तक सभी कार्य समाप्त करने की घोषणा के बीच, अयोध्या से करीब 25 किमी दूर धन्नीपुर गांव में प्रस्तावित मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह मस्जिद का निर्माण कार्य अब भी अधर में लटका हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के 2019 फैसले के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आवंटित 5 एकड़ जमीन पर मस्जिद समेत अस्पताल, कम्युनिटी किचन और लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं का सपना फंड की कमी से जूझ रहा है। ट्रस्ट के पास नक्शा पास कराने और निर्माण शुरू करने के लिए जरूरी 15 करोड़ रुपये में से एक करोड़ भी नहीं जुट सका है।

ट्रस्ट चेयरमैन का बयान: विदेशी मदद जरूरी
इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) ट्रस्ट के चेयरमैन जुफर अहमद फारुकी ने नवभारत टाइम्स से बातचीत में बताया कि मस्जिद का नया डिजाइन अवधी संस्कृति के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। रमजान (जो मार्च-अप्रैल 2026 में है) के बाद अप्रैल में नक्शा अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) में जमा करने की योजना है। लेकिन इसके लिए लाखों रुपये सिर्फ नक्शा पास कराने में ही खर्च होंगे।

फारुकी ने कहा, “हम घर-घर चंदा नहीं मांगेंगे और ना ही कोई बड़ा जनजागरण अभियान चलाएंगे। समाज के अमीर लोगों और विदेश में बसे मुसलमानों से संपर्क किया जाएगा। लेकिन सबसे बड़ी समस्या FCRA (विदेशी चंदा नियामक कानून) रजिस्ट्रेशन की है, जो अभी नहीं हुआ। इसके बिना विदेश से दान नहीं ले सकते। हम जल्द FCRA के लिए प्रयास तेज करेंगे, क्योंकि निर्माण काफी हद तक विदेशी सहयोग पर निर्भर है।”

नाम और डिजाइन में बदलाव, निर्माण चरणबद्ध
पहले धन्नीपुर मस्जिद कहलाने वाली इस मस्जिद का नाम अब मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह मस्जिद रखा गया है। पुराना डिजाइन विवादों और आपत्तियों के बाद बदला गया। ट्रस्ट पहले मस्जिद निर्माण पूरा करेगा, उसके बाद अस्पताल, लाइब्रेरी आदि की बारी आएगी। दिसंबर 2025 में ट्रस्ट ने नक्शा जमा करने का दावा किया था, लेकिन फंड और तकनीकी कारणों से देरी हो रही है। सितंबर 2025 में ADA ने कुछ अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) न मिलने के कारण नक्शा खारिज कर दिया था। अब नया ट्रेडिशनल डिजाइन तैयार है, लेकिन फंड न होने से आगे की प्रक्रिया रुकी हुई है।

पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
2019: सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के लिए विवादित जमीन दी और मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया।
2021: धन्नीपुर में भूमि पूजन हुआ, लेकिन निर्माण शुरू नहीं।
2024-2025: फंड क्रंच के कारण कमेटियां भंग, FCRA पर फोकस।
फरवरी 2026: अभी जमीन पर कोई निर्माण नहीं, सिर्फ सॉयल टेस्टिंग पूरी हुई। ट्रस्ट को दान में हिंदू और कॉर्पोरेट से भी कुछ मदद मिली, लेकिन अपर्याप्त।

अन्य विकास: बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ का विवाद
इसी बीच पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायुन कबीर द्वारा नई ‘बाबरी मस्जिद’ का निर्माण शुरू होने की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। फरवरी 2026 में इसका शिलान्यास हो रहा है, जिसे लेकर हिंदुत्व संगठनों ने विरोध जताया है। कबीर ने 1.30 करोड़ से ज्यादा दान जुटाया है। यह अलग प्रोजेक्ट है और धन्नीपुर मस्जिद से इसका कोई संबंध नहीं। ट्रस्ट का कहना है कि धन्नीपुर प्रोजेक्ट अप्रैल 2026 से आगे बढ़ सकता है, अगर ADA अप्रूवल और फंड मिल जाए। फिलहाल फंड संकट सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है, जबकि राम मंदिर परियोजना 1900 करोड़ की लागत से तेजी से पूरी हो रही है। आने वाले महीनों में इस पर नजर रहेगी।

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