नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर ढही पांच मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सूत्रों को मिली जानकारी के मुताबिक, हादसे से कुछ घंटे पहले ही एक मजदूर ने इमारत में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर आगाह किया था, लेकिन इसके बावजूद काम नहीं रोका गया।
मजदूर ने फोन पर दी थी चेतावनी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस इलाके में ‘Hostel Daze’ नाम की चेन चलाने वाले 31 वर्षीय संचालक सुधांशु को एक मजदूर ने फोन कर बताया था कि बेसमेंट में चल रहे निर्माण कार्य का दबाव इमारत नहीं झेल पाएगी और दीवार गिर सकती है। पुलिस के अनुसार, लगातार निर्माण कार्य से इमारत की संरचना कमजोर हो चुकी थी।
हादसे में सात लोगों की मौत
इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया। बचाव अभियान 24 घंटे से अधिक समय तक चला, जिसमें दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और पुलिस की टीमें शामिल रहीं। स्थानीय लोगों और चश्मदीदों के मुताबिक हादसे के वक्त इमारत में 30 से 40 लोगों के मौजूद होने की आशंका जताई गई थी।
पहले से जर्जर थी इमारत, फिर भी किराए पर ली गई
पुलिस जांच में सामने आया कि यह इमारत अगस्त 2025 में सुधांशु और उनके साथी शुभम त्यागी ने 1.05 लाख रुपये प्रतिमाह के किराए पर ली थी। बताया जा रहा है कि इमारत की जर्जर हालत की वजह से ही यह अपेक्षाकृत कम किराए पर मिली थी। दोनों ऑपरेटर सत्य निकेतन इलाके में ‘Hostel Daze’ के नाम से कुल सात PG और आवासीय सुविधाएं चला रहे थे। पुलिस को शक है कि सुधांशु को मरम्मत और निर्माण कार्य से जुड़े खतरों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
हादसे के वक्त मौके से भाग गया संचालक
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हादसे के समय सुधांशु घटनास्थल से महज 100 मीटर दूर अपने दफ्तर में मौजूद था। हादसे की जानकारी मिलने के बावजूद वह मौके पर नहीं पहुंचा। बताया जाता है कि उसने कुछ फोन कॉल किए और फिर इलाका छोड़कर चला गया। इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता को भी गुरुग्राम के पास भिवाड़ी से हिरासत में लिया गया।
बगल की गर्ल्स PG में फंसी छात्राएं
हादसे के बाद बगल में स्थित गर्ल्स PG की करीब 22 छात्राओं को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। छात्राओं का आरोप है कि तीन दिन से उन्हें वार्डन, खाना और वाई-फाई जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और संचालकों ने उनके फोन कॉल का जवाब देना भी बंद कर दिया है।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस हादसे ने दिल्ली में अवैध और असुरक्षित निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व मुख्य सचिव ओमेश सहगल ने कहा कि दिल्ली में हर पांच में से एक इमारत अनधिकृत निर्माण की श्रेणी में आती है। दिल्ली सरकार ने शहरभर में भवनों के ऑडिट के आदेश दिए हैं और नगर निगम ने कई अधिकारियों को निलंबित भी किया है।

