नई दिल्ली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी रोल की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर बुलाए गए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई ने प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानसिंह रोड और आसपास के इलाकों में स्वतंत्र पत्रकारों, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को बैरिकेड पर रोका गया, हिरासत में लिया गया और बसों में बैठाया गया, जबकि ANI, PTI जैसे स्थापित मीडिया संस्थानों के कर्मियों को पहचान पत्र दिखाते ही अंदर जाने की अनुमति मिल गई।
रेड माइक के पत्रकार सौरभ शुक्ला ने मौके से रिपोर्टिंग करते हुए बताया कि सुबह से ही पत्रकारों को रोकने का सिलसिला चल रहा था। जंतर-मंतर के नजदीक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर बाहर आना पड़ रहा था क्योंकि अंदर इंटरनेट नहीं चल रहा था। फुटेज भेजने के बाद फिर अंदर जाना पड़ता था। इस दौरान एएनआई की गाड़ी आई, आई-कार्ड दिखाया और चली गई। पीटीआई वाले भी इसी तरह निकल गए, लेकिन स्वतंत्र पत्रकारों और छोटे कंटेंट क्रिएटर्स को “चले जाइए, किसी और जगह से जाइए” कहकर रोका गया।
एक दृश्य में पुलिस अधिकारी ने रेड माइक के पत्रकार से पूछा, “ये कौन सा माइक है?” जब पत्रकार ने अपना आईडी कार्ड और वेबसाइट का क्यूआर कोड दिखाया तो अधिकारी का जवाब था – “I cannot recognize you” (मैं आपको पहचान नहीं पा रहा)। पत्रकार ने कहा कि 15 साल NDTV में काम करने और कई राज्यों के हेड रहने के बावजूद वर्दी वाले उन्हें नहीं पहचान रहे थे।
हिरासत में लिए गए लोगों की गवाही
बस में बैठाए गए राज भाई (द्वारका सेक्टर-1) ने बताया कि वे कवरेज के लिए घूमते-घूमते पहुंचे थे। इंस्पेक्टर और कांस्टेबलों से बात बताई, फिर भी उठाकर हिरासत में ले लिया गया। एक कांस्टेबल ने धमकी दी – “तुम्हारी सारी कॉकरोच गिरी निकाल दूंगा।” राज भाई ने कहा कि उन्होंने क्यूआर कोड वाला आईडी दिखाया, फिर भी विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस बस और ईंधन पर खर्च हो रहे पैसे को देश के विकास या दिल्ली पुलिस के टीए-डीए बढ़ाने में क्यों नहीं लगाया जाता। ताज मानसिंह होटल के पास विदेशी पर्यटकों के सामने कैद दिखने पर शर्म महसूस होने की बात भी कही। एक अन्य हिरासत में लिए गए विशाल (नजफगढ़ से) ने बताया कि सुबह 10-11 बजे के आसपास रोका गया। पुलिस ने फोन ले लिया, ओटीपी मांगा, बाइक/रैपिडो का किराया पूछा और “मजे लेने” की बात कही। वे प्रदर्शन में शामिल होने आए थे और घंटों बस में बैठे रहे।
रॉयटर्स के पत्रकार सौरभ शर्मा को भी हिरासत में लिया गया। भीड़ चिल्ला रही थी – “अरे वो जर्नलिस्ट है! रॉयटर्स के जर्नलिस्ट हैं!” शर्मा ने बताया कि वे कवरेज कर रहे थे, प्रेस कार्ड दिखाए, फिर भी खींचातानी हुई और बैठा लिया गया। बाद में एक घंटे के अंदर उन्हें छोड़ दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार एक मास्क पहने नाम टैग रहित अधिकारी ने उन्हें घसीटा और लात मारी।
चयनात्मक व्यवहार और “कोई मीडिया नहीं है”
कई स्वतंत्र मीडिया संगठनों न्यूज़लॉन्ड्री, स्क्रॉल, नवभारत टाइम्स, द क्विंट के पत्रकारों को प्रेस कार्ड दिखाने के बावजूद हिरासत में लिया गया। न्यूज़लॉन्ड्री के तीन पत्रकारों और एक इंटर्न के फोन जब्त किए गए। पुलिस का जवाब था “कोई मीडिया नहीं है।” स्क्रॉल के आयुष तिवारी को आईटीओ के पास, प्रेस कार्ड साफ दिखने के बावजूद वैन में बैठाया गया। बाद में अधिकांश पत्रकार रिहा कर दिए गए।
बीबीसी के पत्रकार दिलनवाज ने कैमरा पर बोलते हुए कहा कि सुबह से कई रिपोर्टरों को हिरासत में लिया गया, फोन आए और बदसलूकी की खबरें मिलीं। पत्रकारिता का काम तटस्थ रहकर जो दिखे वही रिपोर्ट करना है। रेड माइक ने कहा कि लेगेसी मीडिया को कवरेज की अनुमति मिल जाती है, लेकिन स्वतंत्र और मेहनत करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को नहीं। “हमारे पास ओबी वैन, लाइव व्यू, पीआईबी या डीआईपी कार्ड नहीं थे, फिर भी खड़े थे और खड़े रहेंगे क्योंकि हम सच के साथ खड़े हैं।”
ताजा स्थिति
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में हजारों लोग हिरासत में लिए गए। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई नेता हिरासत में रहे। अधिकांश पत्रकार और कई प्रदर्शनकारी बाद में रिहा कर दिए गए। CJP ने 11 अक्टूबर को फिर जंतर-मंतर मार्च का आह्वान किया। सुरक्षा बल तैनात रहे और बैरिकेडिंग जारी रही। पत्रकार संगठनों और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स के समूहों ने हिरासत की निंदा की और तत्काल रिहाई की मांग की।
यह घटनाक्रम प्रेस की स्वतंत्रता, चयनात्मक व्यवहार और प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है। स्वतंत्र पत्रकारिता करने वाले और छोटे कंटेंट क्रिएटर्स को मुख्यधारा के मीडिया से अलग व्यवहार मिलने की शिकायतें बार-बार सामने आईं। इतिहास जब लिखा जाएगा, तो ये तस्वीरें भी दर्ज होंगी – जहां प्रेस कार्ड भी वर्दी के आगे बेअसर साबित हुए।

