नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल में भ्रष्टाचार की भरमार, कई ऐसे जेई जिनकी संपत्ति 4-5 सालों में 100 गुना से अधिक बढी

नोएडा। औद्योगिक विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे के लिए देशभर में पहचान रखने वाले नोएडा में नोएडा प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में रही है। आरोप लगते रहे हैं कि प्राधिकरण के कुछ कर्मचारी अपने पद और जिम्मेदारियों का कथित तौर पर दुरुपयोग कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं। जय हिन्द जनाब को पता चला है कि प्राधिकरण के वर्क सर्किलों में खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा हैै। कई ऐसे जेई है जिन्होंने अफसरों को संपत्ति के मामले में फेल कर दिया है। वर्क सर्किल 1 में तो एक ऐसा जेई है जिसकी संपत्ति 4-5 सालों में 100 गुना से अधिक बढी है। इसके पीछे का कारण है सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण की शिकायतों के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं होने से भी विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकारी जमीन की सुरक्षा, अवैध निर्माण पर रोक लगाने और प्राधिकरण की संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हीं की निगरानी में इस तरह की गतिविधियां होने के आरोप क्यों सामने आते रहते हैं? यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक अवैध निर्माण चलता रहता है, तो संबंधित वर्क सर्किल के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच होना जरूरी है।

वर्क सर्किल-1 के जेई की संपत्ति को लेकर उठ रहे सवाल

नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-1 में तैनात एक अवर अभियंता (जेई) की कथित संपत्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप हैं कि संबंधित कर्मचारी ने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियां अर्जित की हैं। साथ ही, बेनामी संपत्ति होने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व की जांच आवश्यक है।

यदि किसी सरकारी कर्मचारी की आय और उसके नाम पर अर्जित संपत्तियों के बीच असंगति सामने आती है, तो इसकी जांच संबंधित सक्षम एजेंसियों के माध्यम से कराई जानी चाहिए। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संपत्तियां वैध आय से अर्जित की गई हैं या नहीं, उनके खरीदने के लिए धन का स्रोत क्या था और क्या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर संपत्ति रखे जाने के ठोस प्रमाण मौजूद हैं।

यह मामला केवल किसी एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि शिकायत में तथ्य मिलते हैं, तो संबंधित कर्मचारी की संपत्ति के साथ-साथ उसके कार्यकाल, तैनाती वाले क्षेत्रों और उन स्थानों पर हुई विभागीय गतिविधियों की भी पड़ताल की जानी चाहिए, जहां उसके पास निगरानी या कार्रवाई की जिम्मेदारी रही है।

सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण, जिम्मेदार अधिकारी कहां हैं?

नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों और गांवों में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण तथा अवैध निर्माण की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में वर्क सर्किल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों पर नजर रखने, अतिक्रमण की पहचान करने और नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाती है।

इसके बावजूद यदि किसी सरकारी जमीन पर लगातार निर्माण होता रहे और समय रहते कार्रवाई न हो, तो यह जांच का विषय है। क्या संबंधित कर्मचारियों को इसकी जानकारी नहीं थी? क्या शिकायतें मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई? क्या निरीक्षण नियमित रूप से किए गए? और यदि अनियमितताएं पाई गईं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए?

इन सवालों का जवाब केवल औपचारिक नोटिस या कार्रवाई के दावों से नहीं मिल सकता। प्राधिकरण को क्षेत्रवार निरीक्षण रिपोर्ट, प्राप्त शिकायतों, जारी नोटिस, दर्ज मुकदमों और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने पर विचार करना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस क्षेत्र में कितनी कार्रवाई हुई और कहां लापरवाही बरती गई।

योगी सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी दावों की कसौटी पर नोएडा प्राधिकरण

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर कई बार सख्त रुख अपनाने की बात कही गई है। सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति का विवरण उपलब्ध कराने संबंधी निर्देशों का उद्देश्य भी पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।

लेकिन सवाल यह है कि ऐसे निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर किस हद तक हो रहा है? यदि किसी कर्मचारी से संपत्ति का विवरण मांगा गया है, तो संबंधित विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्धारित समय में विवरण जमा हो। जिन कर्मचारियों का विवरण उपलब्ध नहीं है या जिनके रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां पाई जाती हैं, उनके मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, किसी कर्मचारी द्वारा संपत्ति का विवरण जमा नहीं करने या रिकॉर्ड में कमी होने मात्र से भ्रष्टाचार साबित नहीं होता। लेकिन ऐसे मामलों की जांच और नियमों के अनुसार जवाबदेही तय करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। नोएडा प्राधिकरण में भी इस व्यवस्था का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

वर्क सर्किल की जवाबदेही तय करना जरूरी

प्राधिकरण के वर्क सर्किलों में तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित नहीं है। सरकारी भूमि को अतिक्रमण से बचाना, अनधिकृत निर्माण की पहचान करना और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाना भी उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा है। यदि किसी क्षेत्र में अवैध निर्माण लंबे समय तक जारी रहता है, तो यह देखना आवश्यक है कि संबंधित जेई और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने निरीक्षण कब किया, किस स्तर पर शिकायत प्राप्त हुई और कार्रवाई में देरी क्यों हुई। साथ ही, यह भी जांचा जाना चाहिए कि कहीं किसी कर्मचारी ने जानबूझकर कार्रवाई में ढिलाई तो नहीं बरती। ऐसी जांच में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रहने के बजाय जरूरत के अनुसार संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए। इससे यह पता चल सकेगा कि समस्या व्यक्तिगत लापरवाही की है या निगरानी व्यवस्था में व्यापक खामियां मौजूद हैं।

संपत्ति की जांच हो, लेकिन कार्रवाई तथ्यों के आधार पर

वर्क सर्किल-1 के संबंधित जेई की कथित संपत्ति को लेकर उठ रहे सवालों पर प्राधिकरण के सक्षम अधिकारियों को शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर आय के ज्ञात स्रोतों, संपत्ति के खरीद दस्तावेजों, घोषित संपत्ति विवरण और अन्य वैधानिक रिकॉर्ड का मिलान कराया जा सकता है। यदि जांच में प्रथमदृष्टया अनियमितता सामने आती है, तो मामले को सक्षम सतर्कता या भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी के पास भेजने पर विचार किया जाना चाहिए।

जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिलना चाहिए। इससे एक ओर गलत आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी, वहीं दूसरी ओर यदि भ्रष्टाचार या आय से अधिक संपत्ति के प्रमाण मिलते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

बड़ा सवाल: सरकारी जमीन और जनता के हितों की रक्षा कौन करेगा?

नोएडा प्राधिकरण की जमीन सार्वजनिक संपत्ति है। इस पर अवैध कब्जा या अनधिकृत निर्माण होने से केवल जमीन का नुकसान नहीं होता, बल्कि नियोजित विकास, बुनियादी सुविधाओं और सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी वर्क सर्किल में लगातार शिकायतें मिलने पर उन्हें सामान्य विभागीय मामला मानकर टालना उचित नहीं है।

अब जरूरत इस बात की है कि नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी वर्क सर्किलवार समीक्षा कराएं, कर्मचारियों के संपत्ति विवरण की स्थिति स्पष्ट करें और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करें। यदि किसी जेई या अन्य कर्मचारी के खिलाफ शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं, तो निष्पक्ष जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

यह भी पढ़ें: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ऐस डिविनो सोसाइटी में युवक की मौत, लंबे समय से तनाव का असर

यहां से शेयर करें