सीएनजी के दामों में 11 दिन में चौथी बार आग, दिल्ली में ₹83, नोएडा-गाज़ियाबाद में ₹91 के पार; आम आदमी की जेब पर भारी बोझ

पहले से महंगाई की मार झेल रही आम जनता को मंगलवार की सुबह एक और झटका लगा। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने मंगलवार, 26 मई को सुबह छह बजे से दिल्ली-NCR में सीएनजी के दाम ₹2 प्रति किलोग्राम बढ़ा दिए। यह पिछले 11 दिनों में चौथी बार है जब सीएनजी की कीमतों में वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में सीएनजी की नई कीमत ₹83.09 प्रति किलोग्राम हो गई है, जबकि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में यह दर ₹88.70 प्रति किलोग्राम पर जा पहुंची है। वहीं, रिपब्लिक वर्ल्ड के अनुसार नोएडा और गाजियाबाद में कुछ क्षेत्रों में यह दर ₹91.70 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।

एक पखवाड़े में कितनी बढ़ी कीमतें?

15 मई को ₹2, फिर 23 मई को ₹1, और अब 26 मई को ₹2 की बढ़ोतरी — यानी मात्र 11 दिनों में कुल ₹5 प्रति किलोग्राम की वृद्धि हो चुकी है। हालांकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार अगर 17 मई की बढ़ोतरी को भी जोड़ा जाए तो दिल्ली में सीएनजी की कीमतें 15 मई के बाद से संचयी रूप से ₹7 प्रति किलोग्राम तक बढ़ चुकी हैं। तुलना के लिए देखें तो कुछ सप्ताह पहले दिल्ली में सीएनजी ₹76-77 प्रति किलोग्राम के आसपास थी।

मुंबई में भी महंगी हुई CNG

मुंबई में महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने मई माह की शुरुआत में ₹2 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की थी, जिससे वहां सीएनजी की कीमत ₹84 प्रति किलोग्राम हो गई। आज 26 मई को दिल्ली-NCR में नई वृद्धि के बावजूद मुंबई में MGL ने फिलहाल कोई नई बढ़ोतरी नहीं की है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

IGL ने बताया कि यह संशोधन इनपुट गैस की बढ़ती लागत और अमेरिकी डॉलर की तेज मजबूती के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित करने के लिए किया गया है। कंपनी ने कहा, “सीएनजी की खुदरा कीमतों में संशोधन केवल इनपुट गैस लागत में वृद्धि और USD की तीव्र मजबूती के प्रभाव को मामूली रूप से ऑफसेट करने के लिए किया गया है।” मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और इससे उपजी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अस्थिरता के चलते राज्य नियंत्रित तेल कंपनियों ने बढ़ती ऊर्जा लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने का निर्णय किया है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल और गैस की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल मचा रखी है।

टैक्सी चालक और ऑटो यूनियनें सड़क पर

दिल्ली-NCR में टैक्सी संघों और वाणिज्यिक परिवहन संगठनों ने इस बढ़ोतरी का विरोध तेज कर दिया है। वे न केवल मूल्य वृद्धि को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, बल्कि बढ़ी हुई परिचालन लागत को दर्शाने के लिए किराए में संशोधन की भी मांग कर रहे हैं। मुंबई में भी ऑटो-रिक्शा यूनियनों ने MGL द्वारा पहले की गई बढ़ोतरी के बाद किराया संशोधन की मांग पहले ही उठा दी थी।

आम उपभोक्ता और महंगाई पर असर

विश्लेषकों ने आगाह किया है कि सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बार-बार हो रही वृद्धि से परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है और इससे समग्र महंगाई दर में और बढ़ोतरी होने की आशंका है। जो लोग सीएनजी चालित वाहनों पर निर्भर हैं  चाहे वे दैनिक यात्री हों, व्यावसायिक वाहन चालक हों या टैक्सी ड्राइवर हों उनके लिए पेट्रोल-डीजल की तुलना में सीएनजी की जो सापेक्ष सस्तेपन की बढ़त थी, वह लगातार हो रही वृद्धियों से सिकुड़ती जा रही है।

IGL का पक्ष — फिर भी सस्ता है CNG

IGL ने यह भी कहा कि बढ़ोतरी के बावजूद सीएनजी परंपरागत ईंधनों की तुलना में अभी भी सस्ती है और यात्रा लागत में करीब 45 प्रतिशत तक की बचत देती है। कंपनी का तर्क है कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह संशोधन अपरिहार्य था।

PNG और LPG अभी स्थिर

राहत की एक बात यह है कि घरेलू उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में अभी तक कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव जारी रहा तो इन पर भी दबाव बढ़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में सीएनजी को ‘हरित और सस्ते’ विकल्प के रूप में प्रचारित किया गया था और लाखों वाहन चालकों ने इसी आधार पर अपने वाहन बदले। लेकिन जिस गति से अभी दाम बढ़ रहे हैं, उससे उनका वह हिसाब-किताब गड़बड़ा रहा है। सरकार को चाहिए कि वह न केवल कंपनियों की मजबूरियों को समझे, बल्कि उन लाखों आम नागरिकों की परेशानी का भी संज्ञान ले जो रोज़ाना इसी ईंधन पर निर्भर हैं।

यह भी पढ़ें: ट्विशा शर्मा केस: सीबीआई ने संभाली जांच, भोपाल में दर्ज की नई एफआईआर, सुप्रीम सुनवाई जारी 

यहां से शेयर करें