नयी दिल्ली, भारत के युवा-नेतृत्व वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले गिरफ्तार करने के बाद शनिवार को सशर्त जमानत दे दी गई। अदालत ने उन्हें शांति बांड पर रिहा करने का आदेश दिया। दीपके को शुक्रवार शाम दिल्ली के झंडेवालान इलाके में अपने ठिकाने से निकलते समय पुलिस ने हिरासत में लिया। वे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज लहराने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने पहले उन्हें दो नोटिस जारी कर चेतावनी दी थी कि वे कनॉट प्लेस न जाएं, क्योंकि वह अधिसूचित प्रदर्शन स्थल नहीं है। फिर भी वे निकले तो पुलिस ने उन्हें प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत पकड़ लिया।
शनिवार सुबह दीपके को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने 10 अक्टूबर को दिए गए शांति बांड (₹50,000) का उल्लंघन किया, जिसमें एक साल तक शांति भंग न करने की शर्त थी। कोर्ट ने सशर्त जमानत देते हुए उन्हें फिर से शांति बांड पर रिहा करने का आदेश दिया। CJP के कानूनी मामलों के प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि दीपके की लोकेशन पहले अज्ञात रही और वकीलों को उनसे मिलने नहीं दिया गया था। पार्टी ने इसे “किडनैपिंग” करार दिया था।
पृष्ठभूमि: कॉकरोच मूवमेंट क्या है?
यह आंदोलन मई 2026 में शुरू हुआ था जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं को “कॉकरोच” और “परजीवी” कहकर संबोधित किया (बाद में उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को गलत समझा गया)। अभिजीत दीपके (बोस्टन यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट और दलित पृष्ठभूमि से) ने इसे अपनाया और “कॉकरोच जनता पार्टी” बनाई। युवाओं ने इसे लचीलापन और प्रतिरोध का प्रतीक बना लिया। जुलाई में इस आंदोलन ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे में भूमिका निभाई। अब CJP चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में करीब 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए, जिससे भाजपा को फायदा हो रहा है। चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि गलत तरीके से हटाए गए वोटर दोबारा नामांकन कर सकते हैं।
हालिया घटनाक्रम
– 13 अक्टूबर को CJP के दो शीर्ष नेता सौरव दास और आशुतोष रांका जंतर मंतर (जिसे पुलिस ने हाल ही में अधिसूचित प्रदर्शन स्थल से हटा दिया था) पर बैरिकेड्स पार कर तिरंगा फहराने के आरोप में गिरफ्तार हुए। कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
– दीपके ने उनके समर्थन में तिरंगा मार्च का ऐलान किया था।
– शुक्रवार को AISA राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी हिरासत में ली गईं, जिन्हें शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया।
CJP ने सोशल मीडिया पर कहा, “अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास इतिहास में 1947 के बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए जेल जाने वाले पहले लोग होंगे। भारत के युवा ने साहस दिखाया है।” विपक्षी नेताओं ने गिरफ्तारियों की निंदा की है। सरकार का पक्ष है कि ये प्रदर्शन सार्वजनिक शांति भंग कर रहे हैं और विदेशी ताकतों के इशारे पर लोकतंत्र को अस्थिर करने की कोशिश है। दीपके की रिहाई के बावजूद CJP ने कहा है कि संघर्ष जारी रहेगा। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनी हुई है।
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