चार धाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवा की बढ़ती मांग को भुनाते हुए साइबर ठगों ने एक नया रैकेट चलाया है। एक सरकारी अधिकारी सहित कई श्रद्धालु फर्जी वेबसाइट के जरिए ठगे गए। दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह घोटाला पूरे देश में फैला हुआ प्रतीत होता है, जिसमें अब तक करीब 30 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं और ठगी गई राशि लगभग 10 लाख रुपये बताई जा रही है। मामला 12 मई का है, जब दिल्ली में तैनात एक सरकारी अधिकारी ने केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर टिकट बुक करने की कोशिश की। गूगल सर्च पर ‘irctc-heliyatra.com’ नाम की वेबसाइट दिखी, जो आधिकारिक पोर्टल की तरह दिखाई दे रही थी। साइट पर ‘Divine journey to four sacred Himalayan abodes’ का टैगलाइन और 4 धामों के पैकेज (5N/6D से शुरू ₹89,999) के विज्ञापन थे। अधिकारी ने ‘Book Now’ पर क्लिक किया और Phata-Kedarnath शटल सेवा के लिए दो टिकट बुक किए। WhatsApp और ईमेल पर पुष्टि और ई-टिकट मिल गए। कुल राशि ₹20,328 चुकाई गई।
परिवार जब फाटा हेलीपैड पहुंचा तो सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि टिकट फर्जी हैं। वास्तविक ऑपरेटर Trans Bharat Aviation की आधिकारिक वेबसाइट heliyatra.irctc.co.in है, जो सीधे बुकिंग नहीं करती और केवल IRCTC पोर्टल से ही बुकिंग वैध मानी जाती है। ठगा गया अधिकारी राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराने के बाद दिल्ली दक्षिण जिले के साइबर थाने में मामला पहुंचा।
गिरोह का मॉडस ऑपरेंडी:
दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (साउथ) अनंत मित्तल के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह एक बड़ा साइबर फ्रॉड नेटवर्क सामने आया। टीम ने बैंक अकाउंट्स, मनी ट्रेल, डोमेन रजिस्ट्रेशन, जीमेल रिकॉर्ड्स और आईपी लॉग्स के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। 2 जून को बिहार के नालंदा से ओमप्रकाश कुमार और रोहित कुमार गिरफ्तार किए गए। पूछताछ में तीसरे आरोपी श्रेयांश तिवारी उर्फ शिवम (जौनपुर, उत्तर प्रदेश का बीटेक छात्र) का नाम सामने आया, जिसे नोएडा से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, ओमप्रकाश ने टेलीग्राम के जरिए श्रेयांश से संपर्क किया और ₹40,000 देकर फर्जी वेबसाइट बनाने का काम सौंपा। श्रेयांश टेक्निकल मास्टरमाइंड था, जबकि रोहित ग्राहकों से WhatsApp पर बात करता, भुगतान लेता और कई बैंक अकाउंट्स के जरिए पैसे घुमाता था। गिरोह ने मेटा प्लेटफॉर्म्स पर पेड विज्ञापन देकर फर्जी साइट को प्रमोट किया और आधिकारिक दिखने वाली साइट्स क्लोन कीं।
पुलिस की बरामदगी: आठ मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक आईपैड, कई एटीएम-डेबिट कार्ड्स और ₹20,328 की राशि फ्रीज की गई। ओमप्रकाश पर 2022 में दिल्ली में साइबर जॉब फ्रॉड का पुराना केस भी दर्ज है।
व्यापक खतरा: जांच से पता चला कि यह गिरोह चार धाम के अलावा अन्य धार्मिक स्थलों या पर्यटन सेवाओं के लिए भी फर्जी पोर्टल चला रहा हो सकता है। कई यात्री हेलीपैड पहुंचने के बाद ही ठगी का पता लगाते हैं, इसलिए असली संख्या ज्यादा हो सकती है। I4C और उत्तराखंड पुलिस पहले भी ऐसे फ्रॉड्स पर अलर्ट जारी कर चुकी है।
सावधानी बरतें:
पुलिस और प्रशासन की सलाह है कि गूगल पर पहली लिंक पर भरोसा न करें। हमेशा आधिकारिक वेबसाइट heliyatra.irctc.co.in ही इस्तेमाल करें। WhatsApp लिंक्स या अनधिकृत एजेंट्स से बचें। संदेह होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या NCRP पर शिकायत करें। चार धाम यात्रा के सीजन में सीमित सीटों की वजह से जल्दबाजी में ठगी का खतरा ज्यादा रहता है। यह घटना साइबर अपराधियों द्वारा धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाने की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करती है। दिल्ली पुलिस आगे और पीड़ितों से संपर्क कर रही है और बड़े नेटवर्क की जांच कर रही है। यात्री सतर्क रहें और आधिकारिक माध्यमों का ही सहारा लें।
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