अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में कांग्रेस का नियंत्रण दांव पर, मतदाताओं का आर्थिक गुस्सा और मिशिगन में नाटकीय मोड़

वाशिंगटन/डेट्रॉइट, अमेरिका के महत्वपूर्ण मिडटर्म चुनाव मंगलवार को होने जा रहे हैं, जिसमें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटें और सीनेट की 35 सीटें दांव पर हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले दो वर्षों का यह पहला राष्ट्रव्यापी फैसला साबित हो सकता है। रिपब्लिकन पार्टी फिलहाल हाउस में संकीर्ण बहुमत (लगभग 218-214) और सीनेट में 53-47 का नियंत्रण रखती है। डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने के लिए नेट चार-चार सीटें पलटनी होंगी।

रॉयटर्स/इप्सोस पोल सहित हालिया सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स सामान्य कांग्रेसियल बैलट पर 8 से 9 अंक आगे दिख रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स/सिएना पोल के अनुसार डेमोक्रेट्स कई प्रमुख सीनेट बैटलग्राउंड राज्यों में आगे हैं। विश्लेषक हाउस में डेमोक्रेट जीत की संभावना ज्यादा बता रहे हैं, जबकि सीनेट का नियंत्रण अनिश्चित है। अर्ली वोटिंग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है—सोमवार तक करीब 5.7 करोड़ वोट डाले जा चुके थे, जो 2022 के पूरे मिडटर्म से ज्यादा है।

आर्थिक मूड खट्टा, महंगाई और ईरान युद्ध का असर

मतदाताओं का आर्थिक मूड काफी निराशाजनक है। महंगाई, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतें प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। कई मतदाता ट्रंप की नीतियों, खासकर टैरिफ और ईरान के साथ युद्ध को महंगाई का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स ने लगभग रिकॉर्ड निचला स्तर दिखाया है। अर्थव्यवस्था की वृद्धि (पिछली तिमाही में 3.4 प्रतिशत) और बेरोजगारी के निचले स्तर के बावजूद लोग रोजमर्रा के खर्चों से परेशान हैं। कॉस्ट ऑफ लिविंग इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है।

मिशिगन में नाटकीय मोड़

मिशिगन की सीनेट रेस सबसे ज्यादा चर्चा में है। डेमोक्रेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद (जो पहले मुस्लिम सीनेटर बन सकते हैं) और रिपब्लिकन माइक रोजर्स के बीच कड़ी टक्कर है। रविवार को डेमोक्रेट कांग्रेसवुमन हेली स्टीवंस, जिन्होंने प्राइमरी में अल-सैयद से हारकर बाद में उनका समर्थन किया था, अचानक रिपब्लिकन रोजर्स का समर्थन कर दिया। उन्होंने डेट्रॉइट के एक चर्च में रोजर्स के साथ उपस्थिति दर्ज कराई और कहा कि वे अल-सैयद के अभियान में नहीं हैं। इस कदम को डेमोक्रेट नेताओं ने “घृणित विश्वासघात” करार दिया। सीनेट माइनॉरिटी लीडर चक शूमर समेत कई नेताओं ने इसकी निंदा की। ट्रंप ने स्टीवंस की तारीफ की। यह घटना डेमोक्रेट्स के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि मिशिगन सीनेट नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण राज्य माना जा रहा है।

जस्टिस डिपार्टमेंट का पारंपरिक सीमाओं से आगे हस्तक्षेप

ट्रंप प्रशासन के जस्टिस डिपार्टमेंट ने दशकों पुरानी परंपरा तोड़ते हुए चुनाव प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप किया है। कैलिफोर्निया में लगभग 20,000 मेल-इन बैलट्स को अलग रखने की मांग की गई, जिन्हें गैर-नागरिकों का बताया गया। अलास्का में रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन की रेस में नाम की समानता वाले उम्मीदवार को लेकर जांच तेज की गई और हार की स्थिति में नतीजों के सर्टिफिकेशन रोकने की कोशिश की गई। अदालतों ने दोनों मामलों में प्रशासन के पक्ष में फैसला नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी कैलिफोर्निया बैलट्स वाले मामले में ट्रंप प्रशासन की याचिका खारिज कर दी। आलोचक इसे राजनीतिक दखल बता रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे चुनाव की अखंडता बचाने का प्रयास बता रहा है। जस्टिस डिपार्टमेंट चुनाव दिवस पर करीब एक हजार मॉनिटर तैनात करने की योजना बना रहा है।

बाजार, AI और डेट सीलिंग पर संभावित असर

निवेशक कांग्रेस नियंत्रण के नतीजों को करीब से देख रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से मिडटर्म के बाद बाजार साल के अंत तक कुछ बढ़त दिखाता है। अगर डेमोक्रेट्स दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल करते हैं तो AI सेक्टर पर सख्त निगरानी और जांच बढ़ने की आशंका है, जो डेटा सेंटर्स और AI कंपनियों के शेयरों पर दबाव डाल सकती है। विभाजित कांग्रेस में डेट सीलिंग (जो 2027 में फिर मुद्दा बन सकती है) और बजट पर गतिरोध तथा सरकार बंद होने का खतरा बढ़ सकता है। रिपब्लिकन नियंत्रण जारी रहने पर टैक्स और रक्षा खर्च में बदलाव की उम्मीद है। कुल मिलाकर, नतीजे अमेरिकी अर्थव्यवस्था, AI निवेश और राजकोषीय नीति को प्रभावित कर सकते हैं। ट्रंप ने अंतिम अपील में रिपब्लिकनों से कहा कि वे ऐसा समझकर वोट दें जैसे वे खुद बैलट पर हैं। दोनों पार्टियां अंतिम तर्क दे रही हैं। नतीजे ट्रंप के एजेंडे, जांचों और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं। मतदान प्रक्रिया में देरी, विवाद और अदालती चुनौतियों की भी आशंका जताई जा रही है।

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