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सुपर एल नीनो की दोहरी मार: भारत में भारी बारिश-बाढ़ से तबाही, मानसून पर सतर्कता बढ़ी – जय हिन्द जनाब सुपर एल नीनो की दोहरी मार: भारत में भारी बारिश-बाढ़ से तबाही, मानसून पर सतर्कता बढ़ी – जय हिन्द जनाब

सुपर एल नीनो की दोहरी मार: भारत में भारी बारिश-बाढ़ से तबाही, मानसून पर सतर्कता बढ़ी

प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे ‘सुपर एल नीनो’ की आशंका के बीच भारत के विभिन्न राज्यों में हालिया भारी बारिश ने बाढ़ और भूस्खलन की तबाही मचा दी है। मौसम विभाग के अनुसार, एल नीनो की सक्रियता के कारण मानसून में अनियमितता देखी जा रही है, जिससे कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा तो कुछ में सूखे की आशंका बनी हुई है। यह स्थिति कृषि, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर गंभीर प्रभाव डाल रही है।

सुपर एल नीनो क्या है और क्यों चिंता?

सुपर एल नीनो प्रशांत महासागर की सतह के तापमान में सामान्य से अधिक असामान्य वृद्धि का परिणाम है। जब यह अत्यधिक शक्तिशाली होता है, तो विश्व स्तर पर भीषण गर्मी, सूखा, बाढ़ और फसल नुकसान जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, 2026 में मध्यम से मजबूत एल नीनो की स्थिति मानसून सीजन के दौरान बनी रह सकती है, जिससे भारत में वर्षा औसत से कम (लगभग 90-92% एलपीए) रहने की संभावना है। इससे खाद्य सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है, महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रखने को मजबूर हो सकते हैं।

हालिया बारिश से राज्यों में तबाही

पिछले कुछ दिनों में उत्तर भारत, उत्तर-पूर्व और अन्य हिस्सों में भारी बारिश ने कहर बरपाया है:

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब: हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन और बाढ़ से दर्जनों मौतें हुई हैं। पंजाब में फसलें और पशुधन नष्ट हो गए, लाखों लोग प्रभावित। हिमाचल में 20 से अधिक मौतें रिपोर्ट हुई हैं।

उत्तर-पूर्व (असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि): असम में ब्रह्मपुत्र नदी उफान पर, लाखों लोग प्रभावित, हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि डूबी। अरुणाचल में फ्लैश फ्लड से मौतें और लापता लोग, सड़कें-ब्रिज क्षतिग्रस्त।

कोलकाता और पश्चिम बंगाल: भारी बारिश से जलभराव, ट्रैफिक ठप, दार्जिलिंग में भूस्खलन से संपर्क प्रभावित।

अन्य क्षेत्र: हैदराबाद, केरल आदि में भी जलभराव और यातायात बाधित।
इन घटनाओं से सड़क-रेल यातायात ठप, घर-मकान क्षतिग्रस्त और कृषि को भारी नुकसान हुआ है। राहत कार्य जारी हैं, सेना और एनडीआरएफ की टीमें लगी हुई हैं।

आर्थिक प्रभाव: कृषि से शेयर बाजार तक

एल नीनो के प्रभाव से खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ेगी। पंजाब-हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों में बाढ़ से फसलों का नुकसान पहले ही दिखने लगा है। इससे शेयर बाजार पर दबाव पड़ेगा, क्योंकि आरबीआई ब्याज दरें ऊंची रख सकती है। कुछ क्षेत्रों को लाभ भी हो सकता है, जैसे जल प्रबंधन, सिंचाई और बीमा कंपनियों की मांग बढ़ेगी। लेकिन बैंकिंग क्षेत्र चुनौतियों का सामना कर रहा है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल कॉर्पोरेट नतीजों पर नहीं, बल्कि मौसम पूर्वानुमान और जलवायु पैटर्न पर भी नजर रखें।

वैश्विक और भारतीय चिंताएं

विश्व स्तर पर सुपर एल नीनो से सूखा, बाढ़ और चरम मौसम बढ़ सकता है, जो खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्थाओं को झकझोर सकता है। भारत में मानसून की शुरुआत में देरी और अनियमितता पहले ही देखी जा चुकी है। मौसम विभाग एल नीनो को मुख्य कारण मान रहा है।

जागरूकता का संदेश: विशेषज्ञ जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता और बेहतर तैयारियों की अपील कर रहे हैं। सरकारों को बाढ़ प्रबंधन, फसल बीमा और वैकल्पिक सिंचाई पर जोर देना चाहिए। यह स्थिति याद दिलाती है कि जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर की बात नहीं, बल्कि वर्तमान की चुनौती है। नागरिकों को जल संरक्षण अपनाने और सतर्क रहने की जरूरत है। आगे के मौसम पूर्वानुमानों पर नजर रखना आवश्यक है।

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