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ईंधन का झटका: पहले 3 रुपये और अब 90 पैसे की बढ़ोतरी, पिछले 10 सालों में इस तरह आसमान पर पहुंचीं पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें – जय हिन्द जनाब ईंधन का झटका: पहले 3 रुपये और अब 90 पैसे की बढ़ोतरी, पिछले 10 सालों में इस तरह आसमान पर पहुंचीं पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें – जय हिन्द जनाब

ईंधन का झटका: पहले 3 रुपये और अब 90 पैसे की बढ़ोतरी, पिछले 10 सालों में इस तरह आसमान पर पहुंचीं पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें

नई दिल्ली/नोएडा: अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है। देश में तेल कंपनियों ने एक बार फिर आम उपभोक्ताओं को बड़ा झटका देते हुए पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू कर दिया है। हाल ही में प्रति लीटर करीब 3 रुपये की बड़ी वृद्धि के बाद, तेल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल-डीज़ल के दामों में 90 पैसे का इज़ाफ़ा कर दिया है। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने मध्यम वर्ग के बजट को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।

लगातार हो रही बढ़ोतरी: ओएमसी पर दबाव और बढ़ती क़ीमतें

तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की आसमान छूती कीमतों के कारण वे भारी घाटे (under-recoveries) से जूझ रही हैं। जानकारों के मुताबिक, करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद देश में खुदरा ईंधन की कीमतों में यह पहला बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। पहले हुई 3 रुपये की बढ़ोतरी से जहां दिल्ली में पेट्रोल लगभग ₹97.77 और डीज़ल ₹90.67 प्रति लीटर के पार पहुंच गया था, वहीं अब इस ताजा 90 पैसे की वृद्धि ने कीमतों को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में तो कीमतें पहले ही ₹100 से ₹108 प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर चुकी हैं।

पिछले 10 सालों का इतिहास: कब-कब और कैसे बढ़ीं कीमतें?

अगर हम पिछले 10 वर्षों (2016 से 2026) के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों का ग्राफ़ लगातार ऊपर की ओर भागा है। इस दौरान सरकारी नीतियों, एक्साइज़ ड्यूटी (उत्पाद शुल्क), राज्यों के वैट (VAT) और वैश्विक परिस्थितियों ने कीमतों को तय करने में बड़ी भूमिका निभाई।

आइए देखते हैं पिछले 10 सालों में ईंधन की कीमतों का ऐतिहासिक सफ़र (औसत कीमतें दिल्ली के आधार पर):

वर्ष पेट्रोल की औसत क़ीमत (₹/लीटर) डीज़ल की औसत क़ीमत (₹/लीटर) मुख्य कारण और प्रशासनिक बदलाव
2016 ₹64.38 ₹54.28 कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर नियंत्रण में थीं। जून 2010 में पेट्रोल और अक्टूबर 2014 में डीज़ल को डी-रेगुलेट (सरकारी नियंत्रण से मुक्त) कर दिया गया था।
2017 ₹69.99 ₹58.00 दैनिक आधार पर कीमतों की समीक्षा (Daily Pricing) की शुरुआत हुई। सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी में धीरे-धीरे बढ़ोतरी शुरू की।
2018 ₹78.52 ₹69.00 अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने और रुपये की कमजोरी के कारण कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने लगी थीं।
2019 ₹73.83 ₹67.00 वैश्विक बाज़ार में थोड़ी राहत मिलने से कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
2020 ₹80.43 ₹73.00 कोरोना महामारी के दौरान कच्चे तेल के दाम ऐतिहासिक रूप से गिरे, लेकिन सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ाकर (पेट्रोल पर ₹32.98 और डीज़ल पर ₹31.83) राजस्व जुटाया, जिससे आम जनता को कम कीमतों का लाभ नहीं मिला।
2021 ₹95.41 ₹86.00 यह साल ईंधन के इतिहास में सबसे भारी रहा। नवंबर 2021 में पेट्रोल की कीमत ₹110 प्रति लीटर के सर्वकालिक उच्च स्तर (All-time High) पर पहुंच गई। बाद में केंद्र ने एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती की।
2022 ₹96.72 ₹89.62 रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक संकट गहराया। मई 2022 में सरकार ने दोबारा एक्साइज़ ड्यूटी घटाई (पेट्रोल पर ₹19.98 और डीज़ल पर ₹15.80) जिससे कीमतें स्थिर हुईं।
2023 ₹96.72 ₹89.62 पूरे साल तेल कंपनियों ने कीमतों को स्थिर रखा और खुदरा कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने दिया।
2024 ₹94.77 ₹87.67 लोकसभा चुनावों से ठीक पहले मार्च 2024 में सरकार और तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीज़ल के दामों में ₹2 प्रति लीटर की मामूली राहत दी थी।
2025 ₹105.01 ₹101.23 वैश्विक तनाव और ओपेक (OPEC) देशों द्वारा उत्पादन में कटौती के चलते कुछ राज्यों में कीमतें पुनः ₹100 के पार चली गईं।
2026 (वर्तमान) ₹97.77 – ₹108.00+ ₹90.67 – ₹102.00+ मई 2026 में चार साल बाद पहली बार बड़ी बढ़ोतरी हुई। पहले ₹3 और अब 90 पैसे बढ़ाए गए। हालांकि सरकार ने राहत देने के लिए केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) को न्यूनतम स्तर पर ला दिया है, फिर भी कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

आम बजट और चौतरफा महंगाई का ख़तरा

ईंधन की कीमतों में आ रहे इस लगातार उछाल का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर माल ढुलाई (Freight Charges) पर पड़ता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: “चूंकि भारत में अधिकांश खाद्य सामग्रियां, सब्जियां, फल और दवाएं सड़क परिवहन के जरिए एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजी जाती हैं, इसलिए डीज़ल महंगा होने से आने वाले दिनों में रसोई का बजट बिगड़ना तय है। फल-सब्जियों के साथ-साथ रोजमर्रा के एफएमसीजी प्रोडक्ट्स और ऑनलाइन डिलीवरी सर्विसेज भी महंगी हो सकती हैं।”

इसके अलावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसकी सीधी मार पड़ेगी क्योंकि किसान सिंचाई के लिए पंपसेट और ट्रैक्टरों में बड़े पैमाने पर डीज़ल का इस्तेमाल करते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता इसी तरह बनी रही, तो आने वाले दिनों में आम जनता को कुछ और छोटे-बड़े झटकों के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।

 

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