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सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर को दिया तगड़ा झटका  – जय हिन्द जनाब सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर को दिया तगड़ा झटका  – जय हिन्द जनाब

सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर को दिया तगड़ा झटका 

बहुचर्चित 2017 उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उनकी उम्रकैद की सजा को निलंबित करने के आदेश को रद्द कर दिया है। अब दिल्ली हाईकोर्ट को इस मामले पर नए सिरे से विचार करना होगा। सुप्रीम कोर्ट की सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि दिल्ली हाईकोर्ट दो महीने के भीतर नए सिरे से फैसला करे और इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान आदेश से बिल्कुल प्रभावित न हो।

मामले की पृष्ठभूमि

2017 में उन्नाव जिले में एक नाबालिग लड़की (तब 17 वर्ष) का कथित तौर पर कुलदीप सेंगर और उनके सहयोगियों ने बलात्कार किया था। पीड़िता की मां और अन्य परिजनों पर दबाव बनाने के लिए उसके पिता को फर्जी मामले में गिरफ्तार कर लिया गया, जहां वह 2018 में पुलिस हिरासत में मर गया। इस मामले में सेंगर को उन्नाव की विशेष अदालत ने दुष्कर्म के लिए उम्रकैद और पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 वर्ष की सजा सुनाई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में सेंगर की अपील पर उनकी उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया था, जिसमें POCSO एक्ट की धारा 5(c) के तहत ‘पब्लिक सर्वेंट’ की परिभाषा पर सवाल उठाए गए थे। हाईकोर्ट ने माना था कि आरोपी पब्लिक सर्वेंट नहीं है, इसलिए कुछ धाराएं लागू नहीं होतीं।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

सीबीआई ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। शीर्ष अदालत ने इसे “peculiar facts and circumstances” वाला मामला बताते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर तुरंत रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि सजा निलंबन और जमानत जैसे मुद्दों में पीड़िता और समाज की भावनाओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।  इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर को राहत देने से इनकार किया था। पिता की हिरासत मौत मामले में सजा निलंबन की मांग पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इसे “highly debatable” करार दिया था और दिल्ली हाईकोर्ट को अपील का जल्द निपटारा करने का निर्देश दिया था।

पीड़िता की लड़ाई

उन्नाव रेप पीड़िता ने इस पूरे मामले में लगातार न्याय की लड़ाई लड़ी है। उसकी मां और भाई की भी बाद में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता को सीबीआई की अपील में पक्षकार बनने की इजाजत दी थी, ताकि उसकी आवाज भी सुनी जा सके।

कुलदीप सेंगर वर्तमान में जेल में ही हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद उनकी रिहाई की संभावना फिलहाल टल गई है। यह फैसला न सिर्फ उन्नाव कांड बल्कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सजा के निलंबन और जमानत के मुद्दों पर भी मिसाल बन सकता है। यह मामला वर्षों से सुर्खियों में रहा है और न्याय व्यवस्था में देरी तथा राजनीतिक प्रभाव के आरोपों को भी जन्म देता रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप पीड़िता पक्ष को मजबूती देता है, हालांकि अंतिम फैसला अब दिल्ली हाईकोर्ट पर निर्भर करेगा।

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