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गाजियाबाद अलकनंदा टावर बनी खतरनाक: वैशाली के GDA टावरों में दरारें निवासियों की जान खतरे में, स्ट्रक्चरल ऑडिट की माँग – जय हिन्द जनाब गाजियाबाद अलकनंदा टावर बनी खतरनाक: वैशाली के GDA टावरों में दरारें निवासियों की जान खतरे में, स्ट्रक्चरल ऑडिट की माँग – जय हिन्द जनाब

गाजियाबाद अलकनंदा टावर बनी खतरनाक: वैशाली के GDA टावरों में दरारें निवासियों की जान खतरे में, स्ट्रक्चरल ऑडिट की माँग

गाजियाबाद अलकनंदा टावर बनी खतरनाक: गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर-4 में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) द्वारा निर्मित दशकों पुराने आवासीय टावरों की दुर्दशा एक बार फिर चर्चा में है। इन इमारतों में गहरी दरारें पड़ने, प्लास्टर झड़ने और तहखानों में पानी भरने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, जिससे हजारों निवासी भय और असुरक्षा के साये में जीवन बिताने पर मजबूर हैं। वैशाली, गाजियाबाद स्थित अलकनंदा टावर के निवासी वर्ष 2018 से डर में जी रहे हैं, जब इस इमारत को खतरनाक और असुरक्षित घोषित किया गया था। GDA से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें रेट्रोफिटिंग के लिए 3.5 करोड़ रुपये का बोझ खुद उठाने को कहा गया।

पुराना दर्द, नया संकट

अलकनंदा टावर का निर्माण 1989 में GDA ने किया था। वहाँ रहने वाले अमित कुमार के अनुसार, “हम लगातार डर में जी रहे हैं। मॉनसून में तहखाना पानी से भर जाता है और रोज़ाना प्लास्टर झड़ता रहता है।” अलकनंदा के पास स्थित कावेरी टावर की हालत भी खतरनाक है उसके प्लास्टर झड़ रहे हैं, तहखाना सालभर जलमग्न रहता है और नींव कमजोर पड़ चुकी है।

स्ट्रक्चरल ऑडिट का मुद्दा

GDA ने इस वर्ष जनवरी में प्रस्तावित किया था कि बहुमंजिला इमारतों का हर तीन साल में अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट किया जाए। इसके लिए IIT, NIT जैसे प्रमुख संस्थानों को जिम्मेदारी सौंपने की योजना थी। हालाँकि, GDA के बोर्ड ने बहुमंजिला इमारतों के अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट को स्थगित करने का निर्णय लिया यह कहते हुए कि पहले डेवलपर्स के संगठन CREDAI के साथ चर्चा की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार, यदि ऑडिट में बड़ी खामी मिलती है — जैसे नींव या दीवारों में दरारें तो एक महीने के भीतर मरम्मत शुरू कर छह महीने में पूरी करनी होगी। छोटी खामियों को भी छह महीने में ठीक करना अनिवार्य होगा।

GDA और निवासियों के बीच जिम्मेदारी का टकराव

GDA अधिकारियों का कहना है कि अलकनंदा टावर की देखभाल की जिम्मेदारी RWA की है। उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से सेफ्टी ऑडिट कराया, जिसमें रेट्रोफिटिंग की सिफारिश की गई — लेकिन यह काम RWA को करना है। GMC के मुख्य अभियंता मोइनुद्दीन ने बताया कि नोटिस देने के बावजूद कई निवासी इमारत खाली करने से इनकार कर रहे हैं।

वित्तीय बोझ भी निवासियों पर

GDA ने वैशाली के मूल संपत्ति मालिकों से 200 करोड़ रुपये की वसूली का फैसला भी किया है यह राशि 1986-89 में अधिग्रहीत जमीन के बदले किसानों को बढ़े हुए मुआवज़े के रूप में देनी है, जो सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई हारने के बाद अब वसूली जाएगी।

निवासियों की माँग

स्थानीय निवासी मांग कर रहे हैं कि GDA तुरंत इन सभी पुरानी इमारतों का स्वतंत्र स्ट्रक्चरल ऑडिट कराए, मरम्मत का खर्च खुद वहन करे और जब तक इमारतें सुरक्षित न हों, वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करे। उनका कहना है कि GDA ने इन्हें बनाया, तो इनकी सुरक्षा भी GDA की जिम्मेदारी है।

विशेषज्ञों की राय

भवन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 30-35 साल पुरानी इन इमारतों की तत्काल जाँच जरूरी है। लखनऊ में भी इसी तरह की लापरवाही के चलते इमारतें ढह चुकी हैं। नोएडा का ट्विन टावर हादसा और देश में बढ़ते भवन-दुर्घटना के मामले यह साफ करते हैं कि निर्माण के बाद की देखभाल में कोताही जानलेवा साबित हो सकती है। फिलहाल यह मामला प्राधिकरण, निवासियों और अदालत के बीच उलझा हुआ है और इस बीच हजारों परिवार हर रात टूटती छतों के नीचे सोने को मजबूर हैं।​​​​​​​​​​​​​​​​

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