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एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने फर्जी दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर मास्टर कोआॅर्डिनेटर पकड़ा

New Delhi news  दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और क्राइम ब्रांच ने शनिवार को नकली दवाओं के बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए फर्जी दवा फैक्ट्री का भंडाफोड करते हुए गिरोह के मास्टर कोआॅर्डिनेटर अरुण निवासी बिहार को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अब तक कुल 9 सदस्यों को पकड़ा जा चुका है।
एएनटीएफ उप पुलिस आयुक्तसंजीव कुमार यादव ने बताया कि छापेमारी में आरोपी के पास से 1,19,800 नकली जिंक टैबलेट,42,480 नकली एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट, 27 किलोग्राम पैरासिटामोल, 444 नकली डिलोना एक्वा इंजेक्शन एम्प्यूल, इसके अलावा अवैध रूप से दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनें भी बरामद की गईं। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह संगठित तरीके से नकली दवाओं का निर्माण कर उन्हें बाजार में सप्लाई कर रहा था।
अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ट्रामाडोल आधारित दवाओं को तैयार कर विभिन्न राज्यों में सप्लाई करते थे। ट्रामाडोल एक ओपिओइड दवा है, जिसका दुरुपयोग नशे के रूप में भी किया जाता है। ऐसे में नकली और घटिया गुणवत्ता की दवाएं लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं।
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और मोटा मुनाफा कमाने के लिए आम लोगों की जान जोखिम में डाल रहा था। यह सफल आॅपरेशन इंस्पेक्टर नितेश कुमार के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर फैक्ट्री का पता लगाया और छापा मारकर पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर दिया.
कहा सप्लाई होती थीं नकली दवाइयां
पुलिस जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली दवाओं की सप्लाई किन-किन इलाकों में की जा रही थी और इस रैकेट से जुड़े अन्य लोग कौन हैं। साथ ही, बरामद दवाओं के सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा गया है ताकि उनकी गुणवत्ता और संरचना की पुष्टि की जा सके।
पुलिस ने दावा किया कि आरोपी तनिष्क ने गया निवासी अरुण के साथ मिलकर अवैध दवाओं का निर्माण और सप्लाई की साजिश रची थी।
बिना लाइसेंस चल रही थी फैक्ट्री
गया में संचालित फैक्ट्री के पास दवाओं/वायल्स के निर्माण का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। न ही वहां अनिवार्य मैन्युफैक्चरिंग या एनालिटिकल केमिस्ट नियुक्त थे। गया के ड्रग विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया।

 

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