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10वीं बार सुशासन बाबू , मौन व्रत पर प्रशांत, मंत्रीमंडल पर खीच तान – जय हिन्द जनाब 10वीं बार सुशासन बाबू , मौन व्रत पर प्रशांत, मंत्रीमंडल पर खीच तान – जय हिन्द जनाब

10वीं बार सुशासन बाबू , मौन व्रत पर प्रशांत, मंत्रीमंडल पर खीच तान

NDA government formation news: बिहार में विधानसभा चुनाव में एनडीए की स्पष्ट जीत के बाद नई सरकार का गठन लगभग अंतिम चरण में पहुँच गया है। जनता दल (यूनाइटेड) के सर्वेसर्वा नीतीश कुमार आज (बुधवार) दोपहर 3:30 बजे पहले जदयू विधायक दल के नेता और उसके बाद एनडीए विधायक दल के नेता चुने जाएँगे। इसके बाद वे मौजूदा सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान को इस्तीफ़ा सौंपेंगे और नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

कल 20 नवंबर 2025 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में भव्य शपथ-ग्रहण समारोह आयोजित होगा, जिसमें नीतीश कुमार रिकॉर्ड दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे।

मंगलवार को नीतीश कुमार ने गांधी मैदान में चल रहे तैयारियों का जायजा लिया। उनके साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत भी मौजूद थे।

मंत्रिमंडल और स्पीकर पद पर खींचतान
एनडीए के घटक दलों में मंत्रिमंडल में विभागों के बँटवारे और विधानसभा अध्यक्ष के पद को लेकर ज़ोरदार लॉबिंग चल रही है। भाजपा, जदयू, हम, लोजपा (रा) और रालोमो के बीच सहमति बनाने की कोशिशें अंतिम दौर में हैं। शपथ-ग्रहण से पहले मंत्रियों की सूची फाइनल कर ली जाएगी।

प्रशांत किशोर का मौन उपवास और नया दांव
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी के सभी 243 सीटों पर हुए सफ़ाए की ज़िम्मेदारी लेते हुए 20 नवंबर को पश्चिम चंपारण के भीटीहरवा गांधी आश्रम में दिनभर का मौन उपवास रखने का ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि अगर नीतीश सरकार 1.5 करोड़ महिलाओं को 2 लाख रुपये दे देती है तो वे हमेशा के लिए राजनीति छोड़ देंगे। उन्होंने जदयू की जीत का बड़ा कारण महिलाओं को दिए गए 10 हज़ार रुपये के नकद हस्तांतरण को भी बताया।

एनडीए की इस जीत को रणनीतिक एकजुटता, सीट बंटवारे में परस्पर निर्भरता और नरेंद्र मोदी-नीतीश कुमार की जोड़ी की मजबूती का परिणाम माना जा रहा है, जबकि महागठबंधन में समन्वय की कमी और वोट ट्रांसफ़र न हो पाना उसकी हार का मुख्य कारण रहा।

20 नवंबर को नीतीश कुमार का दसवाँ शपथ-ग्रहण बिहार की राजनीति में एक नया कीर्तिमान रचेगा।

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