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YEIDA: मिंडा-गोयनका ग्रुप यीडा में करेंगे बड़ा निवेश, जानिए कितने अरब रुपये का किया एमओयू – जय हिन्द जनाब YEIDA: मिंडा-गोयनका ग्रुप यीडा में करेंगे बड़ा निवेश, जानिए कितने अरब रुपये का किया एमओयू – जय हिन्द जनाब

YEIDA: मिंडा-गोयनका ग्रुप यीडा में करेंगे बड़ा निवेश, जानिए कितने अरब रुपये का किया एमओयू

YEIDA News: मिंडा कॉर्पोरेशन लिमिटेड और आरपी-संजीव गोयनका ग्रुप अब यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में बड़ा निवेश करने जा रहे है। दोनों मिलकर कई अरब रुपये का निवेश करेगे। दरअसल, मिंडा कॉर्पोरेशन लिमिटेड क्लस्टर, सेंसर और कनेक्टर सहित वायरिंग हार्नेस का एक प्रोजेक्ट स्थापित करेगा। वायरिंग हार्नेस विभाग लागत-प्रभावी इंजीनियरिंग के माध्यम से वायरिंग हार्नेस डिजाइनों को बेहतर बनाने और श्रम उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। इसमें अनुमानित रुप से 2200 लोगों को रोजगार मिलेगा तथा 5000 से अधिक अप्रत्यक्ष लोग जुड़ेंगे। इसके अलावा कुल 5 अरब रुपये का निवेश किया जाएगा।

ऑटोमोटिव वायरिंग हार्नेस बाजार में हुई जबरदस्त वृद्धि
बता दें कि वाहनों की बढ़ती जटिलता और उन्नत ऑटोमोटिव तकनीकों के तेजी से अपनाए जाने के कारण वैश्विक ऑटोमोटिव वायरिंग हार्नेस बाजार में जबरदस्त वृद्धि हुई है। वायरिंग हार्नेस की माँग ऑटोमोटिव उद्योग के समग्र विकास से निकटता से जुड़ी हुई है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), स्वचालित ड्राइविंग तकनीकों और उन्नत ड्राइवर-सहायता प्रणालियों (एडीएएस) के एकीकरण के कारण एक क्रांतिकारी बदलाव का अनुभव कर रहा है। कुल निवेश 500 करोड़ रुपये से अधिक, जिसमें संयंत्र और मशीनरी में 250 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश शामिल है

 

30 अरब का निवेश करेगा आरपी-संजीव गोयनका समूह

आरपी-संजीव गोयनका समूह, उत्तर प्रदेश में 60 मेगावाट के कैप्टिव सौर ़ ऊर्जा भंडारण (ईएसएस) संयंत्र के साथ-साथ यीडा में 3 गीगावाट सौर सेल और एकीकृत सौर पारिस्थितिकी तंत्र केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखता है। ₹3,000 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ, यह परियोजना भारत के नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगी और साथ ही उत्तर प्रदेश को सौर विनिर्माण में अग्रणी के रूप में स्थापित करेगी।
बिजली की लागत होगी कम
यह पहल उन्नत सौर प्रौद्योगिकियों जैसे टाॅपकान और पेरोव्स्काइट-टेंडेम सेल पर केंद्रित होगी, जो 28-30 प्रतिशत से अधिक दक्षता का वादा करती हैं। इन नवाचारों से बिजली की लागत में 10-15 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है, साथ ही भारत वैश्विक सौर अनुसंधान एवं विकास और विनिर्माण में अग्रणी स्थान पर आ जाएगा। यह परियोजना फ्रेम, इनकैप्सुलेंट्स और प्रक्रिया उपभोग्य सामग्रियों के लिए सहायक इकाइयों सहित एक मजबूत एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण भी करेगीकृजिससे घरेलू मूल्यवर्धन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और आयातित सौर मॉड्यूल (वर्तमान में लगभग 90ः) पर भारत की भारी निर्भरता कम होगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे 1,200 से ज्यादा प्रत्यक्ष और 4,000 से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा और सेमीकंडक्टर उद्योगों से जुड़े उन्नत कौशल का विकास होगा। यह परियोजना भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में योगदान करते हुए, नवाचार, आत्मनिर्भरता और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए समूह की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

 

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