मध्यप्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार और राहुल गांधी की करीबी सहयोगी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को रद्द किए जाने के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। कांग्रेस की इस एकमात्र उम्मीदवार के नामांकन पत्रों की जांच के दौरान 9 जून को रिटर्निंग अधिकारी ने उन्हें खारिज कर दिया। पार्टी ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार देते हुए तत्काल कानूनी राहत लेने का ऐलान किया है।
क्या है पूरा मामला?
भाजपा के राज्य महासचिव राहुल कोठारी ने नटराजन के नामांकन पर आपत्ति उठाते हुए हैदराबाद की एक अदालत में उनके खिलाफ लंबित एक निजी शिकायत का हवाला दिया। भाजपा का आरोप था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में लंबित एक अदालती मामले की जानकारी जानबूझकर छुपाई। हालांकि कांग्रेस इस तर्क को पूरी तरह खारिज करती है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तनखा ने स्पष्ट किया कि यह कोई आपराधिक मामला नहीं है केवल एक नोटिस मिला है जिसमें पूछा गया है कि उनके और अन्य लोगों के खिलाफ ₹10 करोड़ के मुआवजे की कार्यवाही क्यों न की जाए। नटराजन के वकील ने इस नोटिस का जवाब भी दे दिया था।
“क़ानूनी तौर पर पूरी तरह गैरकानूनी” — कांग्रेस का पक्ष
तनखा ने कहा, “यह दो प्रमुख आधारों पर बिल्कुल अवैध है। पहला, रिटर्निंग अधिकारी इस तरह नामांकन नहीं रद्द कर सकते जब तक उम्मीदवार को कमी सुधारने का मौका न दिया जाए। दूसरा, यह तथाकथित मामला एक निजी शिकायत पर नोटिस मात्र है न कोई FIR दर्ज हुई है, न अदालत ने संज्ञान लिया है। ऐसे में यह ‘लंबित मामला’ कैसे बनता है और इसमें आपराधिकता कहाँ है?”, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी की कानूनी समिति के प्रमुख अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “रिटर्निंग अधिकारी का यह फैसला घोर पक्षपाती है। यह कानून की दृष्टि में स्पष्ट रूप से अवैध है क्योंकि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला ही नहीं है।”
चुनाव आयोग के दरवाजे पर धरना
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस सांसदों के.सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचा, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया, जिसके बाद वे बाहर धरने पर बैठ गए। जयराम रमेश ने कहा, “हम यहाँ एक याचिका जमा करने आए हैं। हमारी उम्मीदवार को अयोग्य घोषित किया गया है। हम बस अपनी याचिका देना चाहते हैं… मैं 35 से अधिक वर्षों से सांसद रहा हूँ, आज तक ऐसा नहीं देखा।” बाद में के.सी. वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला, जयराम रमेश, दीपा दासमुंशी, विवेक तनखा और अभिषेक सिंघवी सहित शीर्ष नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से मुलाकात की और इस फैसले को पलटने की मांग की।
भाजपा का रुख: “कांग्रेस ने जानबूझकर छुपाई जानकारी”
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने जानबूझकर आपराधिक मामले की जानकारी छुपाई और रिटर्निंग अधिकारी को गुमराह किया।
राजनीतिक दांव बड़ा, तीनों सीटें जा सकती हैं भाजपा के पास
18 जून को होने वाले राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव में अगर नटराजन को राहत नहीं मिली, तो भाजपा मध्यप्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटें निर्विरोध जीत सकती है। भाजपा ने अपने दो उम्मीदवारों तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल के अलावा तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को भी उतारा था। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस के लिए एक नई राजनीतिक और कानूनी लड़ाई खोल दी है, ऐसे समय में जब राज्यसभा में उसकी ताकत पहले से घटती जा रही है।
मीनाक्षी नटराजन की प्रतिक्रिया
नटराजन ने कहा, “जब भाजपा ने ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया जो विधायक भी नहीं है, तभी स्पष्ट हो गया था कि यह संविधान और लोकतंत्र को कुचलने की राजनीति है। इस फैसले ने भाजपा की नीयत और नीति दोनों को उजागर कर दिया है।”
आगे क्या?
कांग्रेस ने तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप का रास्ता अपनाने का संकेत दिया है। पार्टी के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि यह “भाजपा द्वारा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को तबाह करने की एक बेशर्म कोशिश है।” कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी और चुनाव आयोग पर हर लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब संवैधानिक संस्थाएं राजनीतिक सुविधा का औजार बन जाती हैं तो लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता। यह मामला न केवल एक नामांकन की वैधता का सवाल है, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है जिसका फैसला अदालत की दहलीज पर होगा।

