Allahabad High Court gets tough: नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को 24 अगस्त को अदालत में हाजिर होने का आदेश, काउंटर एफिडेविट न दाखिल करने पर नाराजगी

Allahabad High Court gets tough: नोएडा/प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) से जुड़े एक हत्या के मामले में जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों की कथित लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ ने क्रिमिनल मिसलेनियस बेल एप्लीकेशन संख्या 23856/2026 (सन्नी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार) में 14 जुलाई 2026 के अपने निर्देशों का पालन न होने पर नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने 19 अगस्त 2026 के आदेश में गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को 24 अगस्त 2026 को दोपहर दो बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।

मामला थाना नॉलेज पार्क के अपराध संख्या 65/2026 से जुड़ा है। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से सबूत जुटाए थे, जिसमें आरोपियों द्वारा मृतक को लेकर जाने और किसी व्यक्ति का शव फेंके जाने का दृश्य दिखाया गया है। 14 जुलाई की सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य और सूचनाकर्ता को विस्तृत काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने विशेष रूप से पूछा था कि जमानत मांगने वाले आवेदक की पहचान सीसीटीवी फुटेज से की गई है या नहीं। राज्य को तीन सप्ताह का समय दिया गया था, जिसके बाद प्रत्युत्तर शपथपत्र के लिए दो सप्ताह अतिरिक्त समय का प्रावधान था।

19 अगस्त की सुनवाई में सूचनाकर्ता की ओर से काउंटर एफिडेविट रिकॉर्ड में लिया गया, लेकिन राज्य की तरफ से विस्तृत काउंटर एफिडेविट अभी तक दाखिल नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि उसके निर्देशों का पालन न होने से, खासकर हत्या जैसे गंभीर मामलों में जमानत याचिकाओं के निपटारे में विलंब हो रहा है। इससे आरोपी/आवेदक के साथ गंभीर अन्याय होने की संभावना बन रही है।

आरोपी अमित कुमार के अधिवक्ता अमित भाटी बोड़ाकी के अनुसार, चार्जशीट में सन्नी और अमित कुमार को भी आरोपी बनाया गया है, जबकि संलग्न सीसीटीवी फुटेज में मुख्य आरोपी अमरपाल उर्फ छोटे की पहचान स्पष्ट दिखती है। अधिवक्ता का दावा है कि फुटेज की अस्पष्टता के कारण सन्नी और अमित कुमार की पहचान पर संदेह उठता है। हालांकि, यह पक्ष अभियुक्त की ओर से रखा गया है और हाईकोर्ट ने अभी तक कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं दिया है कि फुटेज में केवल अमरपाल की ही पहचान हुई है या अन्य आरोपियों की पहचान आश्वस्त रूप से नहीं हो सकी। जमानत की सुनवाई में सीसीटीवी फुटेज और उससे जुड़ी पहचान संबंधी जानकारी निर्णायक महत्व रखती है। जब तक अदालत स्वयं साक्ष्यों का मूल्यांकन कर अंतिम निष्कर्ष नहीं देती, किसी आरोपी की पहचान या दोष तय कर देना उचित नहीं होगा।

उसी दिन एक अन्य जमानत मामले—क्रिमिनल मिसलेनियस बेल एप्लीकेशन संख्या 22293/2026 (पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू बनाम राज्य उत्तर प्रदेश)—में भी हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को 24 अगस्त को अदालत में हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। डीजीपी को बताना होगा कि पुलिस अधिकारी अदालत के निर्देशों के पालन में किस कारण लापरवाही कर रहे हैं। इस प्रकार 24 अगस्त की सुनवाई में पुलिस द्वारा न्यायालयी आदेशों के पालन से जुड़े गंभीर प्रश्न अदालत के समक्ष आएंगे।

हाईकोर्ट ने अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कार्यालय और रजिस्ट्रार (अनुपालन) को भी निर्देश दिए हैं। आदेश की प्रति 24 घंटे के भीतर अपर सरकारी अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाए और रजिस्ट्रार (अनुपालन) संबंधित पुलिस आयुक्त को भी 24 घंटे के भीतर आदेश की जानकारी दें। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को बताना होगा कि न्यायालय के पूर्व आदेश का संबंधित विवेचक द्वारा पालन क्यों नहीं किया गया और अपने स्तर से निर्देशों के पालन के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। यह आदेश पुलिस की कार्यप्रणाली और न्यायालय के आदेशों के पालन के प्रति उच्च न्यायालय की गंभीरता को दर्शाता है।

यह रिपोर्ट किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराती। आरोपों, सीसीटीवी पहचान और जांच से जुड़ी जानकारियां अधिवक्ता के बयान तथा उपलब्ध अदालती आदेशों पर आधारित हैं। अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय के निर्णायक आदेश पर निर्भर करेगा। 24 अगस्त की सुनवाई महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि उस दिन पुलिस कमिश्नर और पुलिस महानिदेशक दोनों अदालत में मौजूद रहेंगे।

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