नोएडा में ऑटिज़्म जागरूकता का अनूठा आयोजन: वर्ष 2026 में 19वाँ विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस मनाया गया। इस वर्ष की थीम “Autism and Humanity – Every Life Has Value” रखी गई, जो इस बात पर जोर देती है कि हर जीवन मूल्यवान है और समाज को हर व्यक्ति को समान सम्मान और अवसर देने की आवश्यकता है। इस अवसर पर नोएडा के सेक्टर-73 स्थित संस्कार अध्ययन केन्द्र, सर्फाबाद में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जो चर्चा का केन्द्र बन गया।
कार्यक्रम की रूपरेखा
नोएडा लोकमंच द्वारा संचालित संस्कार अध्ययन केन्द्र में फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन ने इस जागरूकता सत्र का आयोजन किया। कार्यक्रम में बच्चों ने समावेशिता का उत्सव मनाते हुए ऑटिज़्म के लक्षणों और अपने साथियों के प्रति संवेदनशीलता के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा, आज के दौर की एक बड़ी चुनौती मोबाइल के अत्यधिक उपयोग और खराब पोस्चर के दुष्प्रभावों पर भी विशेष चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने किया आगाह
फाउंडेशन के डॉ. महिपाल सिंह एवं डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव ने बच्चों और शिक्षकों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आँखों पर दबाव, गर्दन व कंधों में दर्द, एकाग्रता में कमी तथा सीखने की गति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और यह न्यूरो-विकास से जुड़ी चुनौतियों को भी बढ़ा सकता है। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो बच्चों के दिमाग के विकास को प्रभावित करती है और उनके व्यवहार, बोलने की क्षमता तथा सामाजिक जुड़ाव में अंतर पैदा करती है। डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑटिज़्म हर बच्चे में नहीं होता, लेकिन वर्तमान जीवनशैली जैसे कामकाजी अभिभावक और सीमित सामाजिक संपर्क कुछ बच्चों में इससे मिलते-जुलते (ओवरलैपिंग) लक्षण दिखा सकते हैं।
शिक्षकों को दिए व्यावहारिक सुझाव
कार्यक्रम में शिक्षकों को कक्षा स्तर पर बच्चों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के व्यावहारिक सुझाव दिए गए। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि जब तक सही जानकारी नहीं होगी, सही व्यवहार भी नहीं हो पाएगा और ऑटिज़्म को एक कमज़ोरी नहीं, बल्कि एक अलग तरह की क्षमता के रूप में देखा जाना चाहिए।
बच्चों ने बनाई पत्रिका, दिए उपहार
इस अवसर पर फाउंडेशन की ओर से केन्द्र के बच्चों द्वारा तैयार इन-हाउस पत्रिका, हैंडवॉश एवं ग्लास क्लीनर शिक्षकों और बच्चों को भेंट किए गए जो बच्चों के आत्मनिर्भर कौशल का प्रमाण है।
कार्यक्रम में मौजूद रहे ये गणमान्य
फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुष्मिता भाटी, एडमिन हेड कृष्णा यादव, स्पेशल एजुकेटर इलिका रावत, फिज़ियोथेरेपिस्ट अभिनव प्रताप सिंह, नैतिक ओझा व रजत शर्मा कार्यक्रम में उपस्थित रहे। संस्कार अध्ययन केन्द्र की प्राचार्य पुष्पा सिंह, कोषाध्यक्ष मुक्ता गुप्ता एवं विशेष अतिथि रेनू छिब्बर सहित अन्य अध्यापिकाओं ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई।
समाज के लिए संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों को सहानुभूति नहीं, बल्कि समझ, स्वीकार्यता और सम्मान की जरूरत है। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि समावेशी समाज बनाने की शुरुआत स्कूल की कक्षाओं से ही होती है और नोएडा में यह पहल उसी दिशा में एक सराहनीय कदम है।

