यूपी में ‘आधी आबादी’ पर सियासी दांव! योगी की फ्री बस-स्कूटी के बाद अखिलेश का ₹40 हजार सालाना का ऐलान, 2027 चुनाव से पहले महिलाओं को साधने की होड़

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी कई महीने बाकी हैं, लेकिन सियासी दलों ने महिलाओं को अपने पाले में करने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच महिलाओं को केंद्र में रखकर कल्याणकारी योजनाओं और चुनावी वादों की तस्वीर अब साफ दिखाई देने लगी है। खास तौर पर रक्षाबंधन के आसपास महिलाओं के लिए की गई घोषणाओं ने यूपी की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

एक तरफ योगी सरकार ने 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा की योजना शुरू की है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने सत्ता में आने पर महिलाओं के लिए हर साल आर्थिक सहायता देने का बड़ा चुनावी वादा किया है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में महिला मतदाता भाजपा और सपा के बीच मुकाबले का सबसे बड़ा केंद्र बनने वाली हैं?

अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान, महिलाओं को हर साल मिलेंगे ₹40 हजार

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 26 अगस्त 2026 को महिलाओं के लिए ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ का ऐलान किया। इसके तहत सपा की सरकार बनने पर गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाली महिलाओं को हर साल ₹40,000 की आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक यह योजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी और आने वाले वर्षों में सहायता राशि बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

अखिलेश यादव ने महिलाओं को प्रदेश की ‘आधी आबादी’ बताते हुए कहा कि समाज और प्रदेश का विकास महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना पूरा नहीं हो सकता। सपा ने इस घोषणा को महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, सम्मान और सुरक्षा से जोड़कर पेश किया है।

सिर्फ ₹40 हजार नहीं, छात्राओं के लिए लैपटॉप और मुफ्त यात्रा का भी वादा

समाजवादी पार्टी ने महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए कई अन्य घोषणाएं भी की हैं। इनमें इंटरमीडिएट पास करने वाली छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप देने का वादा शामिल है। इसके साथ ही छात्राओं के स्कूल-कॉलेज आने-जाने के लिए मुफ्त बस और मेट्रो सेवा देने की बात भी कही गई है।

अखिलेश यादव ने सपा सरकार बनने पर बंद पड़े करीब 26 हजार प्राथमिक स्कूलों को दोबारा खोलने, आंगनबाड़ी केंद्रों को बेहतर करने और छात्राओं के लिए पहले की तरह साइकिल वितरण की व्यवस्था को आगे बढ़ाने की बात भी कही है।

यानी सपा की रणनीति केवल सीधे आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है। पार्टी महिलाओं के साथ-साथ छात्राओं, गरीब परिवारों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को भी अपने महिला-केंद्रित एजेंडे में शामिल करती दिखाई दे रही है।

योगी सरकार का बड़ा कदम, 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को जीवनभर मुफ्त बस यात्रा

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भी महिलाओं के लिए बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं के लिए राज्य रोडवेज की साधारण बसों में मुफ्त यात्रा की व्यवस्था को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत बड़ी संख्या में वरिष्ठ महिलाओं को रोजमर्रा की यात्रा में आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकारी अनुमान के मुताबिक करीब 88,438 महिला यात्री प्रतिदिन इस सुविधा का लाभ उठा सकती हैं। योजना पर सरकार को लगभग ₹22.50 करोड़ प्रतिमाह खर्च होने का अनुमान है। लाभार्थी महिलाओं की पहचान के लिए विशेष स्मार्ट कार्ड की व्यवस्था भी की जा रही है।

इस योजना को भाजपा के 2022 विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र में किए गए वादे से भी जोड़ा जा रहा है। यानी सरकार इसे केवल रक्षाबंधन की घोषणा के तौर पर नहीं, बल्कि पुराने चुनावी वादे को पूरा करने के रूप में भी पेश कर रही है।

मेधावी छात्राओं के लिए ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’

महिलाओं और छात्राओं को लेकर योगी सरकार का एक और बड़ा फैसला ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ है। जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मेधावी छात्राओं को मुफ्त पेट्रोल स्कूटर देने की योजना को मंजूरी दी थी।

इस योजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा हासिल करने वाली छात्राओं को कॉलेज तक आने-जाने में सुविधा देना और उनकी गतिशीलता बढ़ाना है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 हजार स्नातक छात्राओं को अक्टूबर-नवंबर में स्कूटी दिए जाने की बात भी कही है।

इससे साफ है कि भाजपा सरकार का महिला-केंद्रित एजेंडा आर्थिक सहायता के साथ-साथ शिक्षा, परिवहन और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी केंद्रित है।

रक्षाबंधन पर मुफ्त बस यात्रा ने भी बढ़ाया संदेश

रक्षाबंधन के मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की व्यवस्था भी करती रही है। 2026 में रक्षाबंधन के दौरान महिलाओं और उनके एक सहयोगी के लिए मुफ्त बस यात्रा की घोषणा की गई है, जो 27 अगस्त की रात से 28 अगस्त की रात तक लागू रहने वाली है।

ऐसे में रक्षाबंधन के आसपास महिला-केंद्रित घोषणाओं का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। त्योहार के भावनात्मक माहौल के बीच सरकार और विपक्ष दोनों ही महिलाओं तक अपने संदेश को पहुंचाने में जुटे हैं।

योगी बनाम अखिलेश: महिलाओं के लिए किसका क्या एजेंडा?

अगर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की रणनीति को देखें तो भाजपा सरकार का जोर मौजूदा योजनाओं और सरकारी फैसलों के जरिए लाभ पहुंचाने पर दिखाई देता है। मुफ्त बस यात्रा, छात्राओं के लिए स्कूटी और महिला उद्यमिता जैसी योजनाएं इसी दिशा का हिस्सा हैं।

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी 2027 को ध्यान में रखते हुए बड़े सीधे आर्थिक वादों के साथ मैदान में उतरती दिखाई दे रही है। ₹40 हजार सालाना आर्थिक सहायता के साथ लैपटॉप, मुफ्त बस-मेट्रो यात्रा, साइकिल और स्कूलों को दोबारा खोलने जैसे वादों के जरिए पार्टी महिलाओं और छात्राओं के बड़े वर्ग को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

2027 में महिला वोट बैंक क्यों अहम?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए अब करीब एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में करना भाजपा और सपा दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

भाजपा पहले से ही महिलाओं से जुड़ी योजनाओं, सुरक्षा और कल्याणकारी कार्यक्रमों को अपनी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती रही है। दूसरी ओर सपा अब महिलाओं के लिए बड़े आर्थिक और सामाजिक वादों के जरिए अपने चुनावी एजेंडे को विस्तार दे रही है।

यही वजह है कि रक्षाबंधन से पहले और उसके आसपास सामने आई घोषणाओं को महज सरकारी योजनाओं या राजनीतिक वादों के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इनका सीधा संबंध 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव और महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति से भी जोड़ा जा रहा है।

‘आधी आबादी’ के लिए बढ़ती घोषणाएं, बढ़ेगा चुनावी मुकाबला

फिलहाल तस्वीर यह है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिलाओं के लिए घोषणाओं की होड़ तेज हो चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार मुफ्त बस यात्रा और छात्राओं के लिए स्कूटी जैसे फैसलों के जरिए महिलाओं तक पहुंच बढ़ा रही है, तो अखिलेश यादव ₹40 हजार सालाना सहायता समेत कई बड़े वादों के साथ चुनावी मैदान तैयार कर रहे हैं।

अब असली सवाल यह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं को कौन-सा एजेंडा ज्यादा प्रभावित करता है—सरकार की मौजूदा योजनाएं और सुविधाएं या विपक्ष के बड़े आर्थिक और सामाजिक वादे? आने वाले महीनों में भाजपा और सपा की ओर से महिलाओं के लिए और भी बड़ी घोषणाएं सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

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