Noida News: एमपी-टू एलिवेटेड रोड पर एक महीने में दो बार गड्ढा, IIT रुड़की की जांच पूरी, रिपोर्ट से खुलेगा सड़क की गुणवत्ता का राज

नोएडा: नोएडा के एमपी-टू एलिवेटेड रोड पर बार-बार सड़क क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता और मरम्मत कार्यों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक महीने के भीतर दो बार सड़क खराब होने की घटना सामने आने के बाद अब आईआईटी रुड़की की टीम ने जांच पूरी कर ली है। टीम ने सड़क से पांच तरह के सैंपल लिए हैं। अधिकारियों को एक-दो दिन में जांच रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर नोएडा प्राधिकरण आगे सुधार कार्य कराएगा।

एक महीने में दो बार सड़क क्षतिग्रस्त, मरम्मत पर उठे सवाल

एमपी-टू एलिवेटेड रोड पर पिछले महीने सेक्टर-28 की ओर उतरते समय सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया था। इस घटना के करीब एक महीने बाद सेक्टर-33 के सामने फिर गहरा गड्ढा हो गया। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने सड़क की मजबूती और पहले कराए गए मरम्मत कार्यों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इससे पहले भी निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। लापरवाही के मामले में नोएडा प्राधिकरण निर्माण कंपनी पर 35 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा चुका है। इसके बावजूद सड़क के बार-बार खराब होने से समस्या के स्थायी समाधान पर सवाल उठ रहे हैं।

2020 में आई थी दरार, 2022 में भी उठे थे सवाल

एमपी-टू एलिवेटेड रोड की गुणवत्ता पर पहली बार सवाल नहीं उठ रहे हैं। वर्ष 2020 में सेक्टर-61 से सेक्टर-18 की ओर जाने वाले हिस्से पर दरार आ गई थी। इसके बाद सेक्टर-31 की ओर से एलिवेटेड रोड पर चढ़ने वाला रैंप बंद करना पड़ा था। मरम्मत कार्य में कई महीने लगे थे।

वर्ष 2022 में भी सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे। उस समय आईआईटी रुड़की से जांच कराई गई थी। अब एक बार फिर सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद तकनीकी जांच की गई है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के चलते सड़क के निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है।

2013 में शुरू हुआ था निर्माण, 2017 में खुला पहला हिस्सा

एमपी-टू एलिवेटेड रोड का निर्माण नोएडा प्राधिकरण ने आईटीडी सीमेंटेशन इंडिया लिमिटेड से कराया था। परियोजना का निर्माण वर्ष 2013 में शुरू हुआ। 29 जून 2017 को एलिवेटेड रोड का एक हिस्सा वाहनों के लिए खोल दिया गया, जबकि दूसरा हिस्सा वर्ष 2018 में शुरू हुआ।

निर्माण पूरा होने के कुछ वर्षों बाद ही सड़क की मजबूती को लेकर शिकायतें सामने आने लगी थीं। अब बार-बार सड़क क्षतिग्रस्त होने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर समस्या की मूल वजह क्या है और स्थायी समाधान कब तक हो पाएगा।

रखरखाव के खर्च पर कंपनी और प्राधिकरण में विवाद

एलिवेटेड रोड के शुरू होने के बाद शुरुआती पांच वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की थी। हालांकि, रखरखाव पर होने वाले खर्च को लेकर कंपनी और नोएडा प्राधिकरण के बीच विवाद हो गया। मामला व्यावसायिक अदालत में विचाराधीन है।

इस विवाद के चलते रखरखाव की जिम्मेदारी और खर्च को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। ऐसे में सड़क की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाना महत्वपूर्ण होगा।

IIT रुड़की की रिपोर्ट से पता चलेगी सड़क खराब होने की वजह

हालिया घटना के बाद आईआईटी रुड़की की टीम ने एलिवेटेड रोड का निरीक्षण कर जांच पूरी कर ली है। टीम ने सड़क से पांच तरह के सैंपल लिए हैं। अधिकारियों को एक-दो दिन में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

जांच रिपोर्ट से सड़क क्षतिग्रस्त होने के संभावित कारणों का पता चल सकेगा। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर जरूरी सुधार कार्य कराएगा। अब देखना होगा कि जांच में सड़क की खराबी की क्या वजह सामने आती है और क्या इस बार समस्या का स्थायी समाधान हो पाता है।

 

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