नई दिल्ली/कोलकाता। दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का सोशल मीडिया पर वायरल हुआ भावनात्मक वीडियो संदेश सत्यता में सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) विवाद से नहीं, बल्कि दिल्ली में नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई से संबंधित है। हालांकि, SRFTI संस्थान में सितंबर 2026 के अंत में एबीजीपी (ABGP) कार्यक्रम और छात्रों के बीच झड़प को लेकर एक अलग विवाद और विरोध प्रदर्शन देखा गया है, लेकिन नसीरुद्दीन शाह के बयान को इस घटना से जोड़कर सोशल मीडिया पर भ्रामक रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है।
नसीरुद्दीन शाह का वास्तविक बयान (नीट विरोध प्रदर्शन पर)
जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के बाद अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ किए जा रहे क्रूर व्यवहार को देखकर उनका “दिल भरा हुआ है और खून गुस्से से खौल रहा है”। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए तीखे लहजे में कहा कि “अगर एक अज्ञानी देश का नेतृत्व करता है, तो वह चाहेगा कि पूरा देश उसी की तरह अज्ञानी बने”। पुलिस कर्मियों की तुलना अमेरिका के ICE एजेंट्स से करते हुए उन्होंने उन्हें “गुंडे” कहा और चेतावनी दी कि “सब याद रखा जाएगा”। छात्रों को हिम्मत न हारने और लड़ाई जारी रखने का हौसला देते हुए उन्होंने बॉलीवुड की चुप्पी पर भी तंज कसा। वीडियो CJP के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी शेयर किया गया। बाद में एक साक्षात्कार में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रवैये पर भी सवाल उठाए। कई सेलेब्रिटीज जैसे आर. माधवन, सोनाक्षी सिन्हा, स्वरा भास्कर आदि ने भी छात्रों के समर्थन में बयान दिए। एक अलग वायरल क्लिप में शाह को बेटों के साथ प्रदर्शन स्थल पर दिखाया गया था, लेकिन फैक्ट चेक से साबित हुआ कि वह मुंबई के कोलाबा स्थित रीगल सिनेमा के बाहर फिल्म स्क्रीनिंग के बाद का पुराना फुटेज था।
SRFTI में असल में क्या विवाद हुआ?
दूसरी तरफ, सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) में हुआ विवाद पूरी तरह अलग है। सितंबर 2026 के अंत में कैंपस में बिना पर्याप्त पूर्व सूचना के आयोजित दक्षिणपंथी संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP, RSS-लिंक्ड) के कार्यक्रम पर छात्रों ने सवाल उठाए। छात्रों का आरोप था कि कार्यक्रम में शामिल बाहरी लोगों ने उनके साथ मारपीट की, उन्हें ‘देशद्रोही’, ‘कॉकरोच’ आदि कहा और लाठियों-पत्थरों से हमला किया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। तीन FIR दर्ज हुईं। छात्रों ने विरोध प्रदर्शन, सिट-इन और वाइस चांसलर संतोष अजमेरा के इस्तीफे की मांग की। अक्टूबर में भी विरोध जारी रहा, कुछ छात्रों को रस्टिकेट किया गया और कैंपस सुरक्षा को लेकर तनाव बना रहा। फिल्म फ्रेटर्निटी ने भी निंदा की।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सोशल मीडिया पर भ्रम
शाह के वीडियो पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं। विपक्षी खेमे और कई छात्र संगठनों ने समर्थन जताया, जबकि कुछ सरकारी समर्थक और इन्फ्लुएंसर्स ने आलोचना की। एक इन्फ्लुएंसर ने कहा कि प्रधानमंत्री लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए हैं और ऐसी भाषा उचित नहीं। बॉलीवुड की चुप्पी पर शाह के तंज ने भी बहस छेड़ दी। सोशल मीडिया पर दोनों घटनाओं को मिलाकर शेयर किया जा रहा है, जबकि समय-सीमा (जुलाई बनाम सितंबर) और संदर्भ पूरी तरह अलग हैं। फैक्ट-चेक संगठनों ने भी इस मिश्रण को गलत बताया है। नसीरुद्दीन शाह द्वारा सरकार और पुलिस कार्रवाई पर निशाना साधने वाला बयान मुख्य रूप से दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन और परीक्षा अनियमितताओं के संदर्भ में था। इसे इंटरनेट पर SRFTI विवाद के साथ मिलाकर प्रसारित किया जा रहा है। दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं और छात्रों के अधिकार, शिक्षा व्यवस्था तथा परिसर सुरक्षा जैसे मुद्दों को रेखांकित करती हैं।

