ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में किसानों के नाम की आड़ में आबादी भूखंड हासिल करने का बड़ा खेल सामने आया है। यमुना सिटी में जमीन खरीदने वाले कुछ फाइनेंसर और निवेशक खुद को स्थानीय किसान बताकर प्राधिकरण से भूखंड मांग रहे थे। प्राधिकरण की जांच में दस्तावेजों और सैटेलाइट डाटा के सत्यापन के बाद यह हेराफेरी पकड़ी गई। अब प्राधिकरण नियमों के खिलाफ लाभ लेने की कोशिश करने वालों पर कार्रवाई की तैयारी में है।
जांच में क्या मिला?
प्राधिकरण ने फेज वन में शामिल 30 गांवों से जुड़े 88 मामलों में भूखंड शिफ्टिंग की मांग पर सुनवाई की। जांच के नतीजे चौंकाने वाले रहे:
- 52 मामलों में आवेदक स्थानीय निवासी ही नहीं पाए गए।
- 23 मामलों में अधिसूचना जारी होने के बाद निर्माण किए जाने या मौके पर निर्माण न होने की बात सामने आई।
- कुल 88 मामलों में से केवल 13 को ही भूखंड शिफ्टिंग के योग्य पाया गया।
यानी करीब 85 प्रतिशत दावे जांच में टिक नहीं पाए।
कैसे चल रहा था खेल?
प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक विकास योजना शुरू होने के बाद जमीन की कीमतें बढ़ने लगीं। आबादी भूखंड मिलने की उम्मीद में बाहरी लोगों ने कृषि भूमि खरीदी। इसके बाद कुछ फाइनेंसरों ने खुद को काश्तकार बताकर प्राधिकरण के सामने आबादी भूखंड की मांग रखी। कुछ ने मौके पर निर्माण दिखाकर उसे पुराना बताने का दावा भी किया, ताकि उन्हें भी किसानों जैसा लाभ मिल सके। जांच में यह दावे सही नहीं पाए गए।
क्या होती है भूखंड शिफ्टिंग?
सामान्य तौर पर सड़क या किसी अन्य विकास कार्य के लिए किसी व्यक्ति के भूखंड की जमीन जरूरी होने पर प्रभावित व्यक्ति को दूसरी जगह भूखंड दिया जाता है। इसे भूखंड शिफ्टिंग कहते हैं। यह सुविधा असली प्रभावित किसानों के लिए है, लेकिन इसे निवेश के जरिए लाभ कमाने का साधन बनाने की कोशिश हुई।
सीईओ का बयान: सिर्फ जरूरतमंद किसानों को मिलेगा लाभ
प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आर.के. सिंह का कहना है कि निवेश के उद्देश्य से जमीन खरीदने वाले लोगों को आबादी के भूखंड नहीं दिए जा सकते। उनके अनुसार यह सुविधा केवल जरूरतमंद किसानों के लिए है। अफसरों ने साफ किया है कि नियमों के विपरीत लाभ लेने वालों को किसी भी कीमत पर भूखंड नहीं मिलेंगे।
64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और एनसीएलटी का मामला
खबर के अनुसार किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा दिलाने के मामले में भी प्राधिकरण बकाया भुगतान को लेकर सुरक्षा ग्रुप के खिलाफ एनसीएलटी में पैरवी कर रहा है। यानी बिल्डर समूह के बकाये की वसूली का मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण में चल रहा है।
किसान आंदोलन से जुड़ा संदर्भ
यह खबर ऐसे समय आई है जब यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में किसान संगठन 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा, विकसित भूखंड और आबादी के निस्तारण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। प्राधिकरण का रुख साफ है कि असली किसानों की मांगों पर विचार होगा, लेकिन निवेशकों और फाइनेंसरों को किसान के नाम पर लाभ नहीं दिया जाएगा। जांच के नतीजे इस पूरी बहस में प्राधिकरण का पक्ष मजबूत करते हैं, जबकि किसान संगठन असली पात्र किसानों के लंबित मामलों के जल्द निस्तारण की मांग पर कायम हैं।
आगे क्या?
प्राधिकरण अब उन आवेदकों पर कार्रवाई की तैयारी में है जिन्होंने गलत तथ्यों या फर्जी दावों के आधार पर लाभ लेने की कोशिश की। कार्रवाई का स्वरूप (नोटिस, आवेदन निरस्तीकरण या कानूनी कदम) अभी स्पष्ट नहीं है।

