ग्रेटर नोएडा। अपनी लंबित मांगों को लेकर किसान एक बार फिर धरना-प्रदर्शन की तैयारी में हैं। लेकिन पिछले दो दिन से गौतमबुद्ध नगर में तस्वीर कुछ और है। किसान जैसे ही प्राधिकरण कार्यालयों की ओर बढ़ने के लिए जुटते हैं, पुलिस उन्हें बीच रास्ते में ही रोककर हिरासत में ले लेती है। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र और ग्रेटर नोएडा में बुधवार और गुरुवार को यही नजारा दिखा। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या जिले में किसानों को धरना देने की इजाजत ही नहीं मिलेगी। पुलिस अधिकारियों का जवाब है कि जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू है।
बुधवार को यमुना प्राधिकरण जाते किसान हिरासत में
नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू कराने समेत अन्य मांगों को लेकर यमुना प्राधिकरण कार्यालय पर प्रदर्शन के लिए निकले 50 से अधिक किसानों को पुलिस ने परी चौक के पास अंसल के नजदीक हिरासत में लिया। प्राधिकरण की ओर जाने वाले रास्ते सुबह से ही बंद कर दिए गए थे और रास्ते में जो भी किसान मिला, उसे हिरासत में ले लिया गया।
दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने किसानों का रास्ता एफएनजी मॉल के पास रोका। पुलिस का कहना है कि गौतमबुद्धनगर में धारा 163 बीएनएसएस लागू है और बिना अनुमति करीब 30 से 35 लोग धरने के लिए एकत्र हुए थे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें हटाया गया।
महिला किसानों को घसीटने का आरोप
किसान संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान नेता सुखबीर खलीफा और रुपेश वर्मा का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को टांगकर और घसीटकर वाहनों में डाला गया। आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार संगठन ने कार्रवाई की कड़ी निंदा की और आरोप लगाया कि महिला किसानों के साथ अभद्र व्यवहार हुआ और उन्हें घसीटकर बसों में बैठाया गया। पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अलग से कोई विस्तृत बयान फिलहाल सामने नहीं आया है।
गुरुवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर भी रोक
अगले दिन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर भी यही स्थिति रही। चार फीसदी भूखंड की मांग को लेकर प्राधिकरण कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना देने जा रहे करीब 60 किसानों को पुलिस ने अलग-अलग जगहों से हिरासत में लिया, जिनमें 15 महिला किसान भी थीं।
- किसान नेता अमित भाटी पाली गांव के करीब 12 किसानों के साथ जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें अंडरपास के पास रोक लिया।
- मोहित भाटी के नेतृत्व में किसानों का एक जत्था जैतपुर गोल चक्कर पर पहुंचा, जहां पुलिस ने आगे बढ़ने से रोककर हिरासत में ले लिया।
- प्राधिकरण जाने वाले रास्तों पर जेसीबी और ट्रक खड़े करके आवागमन बंद कर दिया गया था और पूरे दिन भारी पुलिस बल तैनात रहा।
- देर शाम पुलिस ने सभी किसानों को रिहा कर दिया।
क्या हैं किसानों की मांगें?
किसान संगठनों की मुख्य मांगें जमीन अधिग्रहण से जुड़ी हैं। इनमें 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट, 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और आबादी से जुड़े लंबित मामलों का निस्तारण शामिल है। जेवर क्षेत्र में भी किसान अलग से आंदोलनरत हैं। वहां किसान 5 अक्टूबर से 7 प्रतिशत आवासीय भूखंड, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और 60 मीटर सर्विस रोड में आबादी के निस्तारण की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं।
आंदोलन की पृष्ठभूमि: वार्ता के आश्वासन का मुद्दा
किसान संघर्ष मोर्चा ने 8 अक्टूबर को सेक्टर-144 में बैठक कर 21 अक्टूबर से यमुना प्राधिकरण पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू करने का निर्णय लिया था। मोर्चे का कहना है कि वे 17 जुलाई से लगातार आंदोलनरत हैं।
किसान नेताओं का कहना है कि वार्ता के वादे पूरे नहीं हुए:
- किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान के मुताबिक पुलिस कमिश्नर और प्राधिकरण अधिकारियों ने 5 अक्टूबर तक शासन स्तर पर वार्ता कराने का आश्वासन दिया था, जो पूरा नहीं हुआ।
- रुपेश वर्मा ने बताया कि 2023 में 124 दिन के धरने के बाद 10 प्रतिशत प्लॉट का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, पर अब तक मंजूरी नहीं मिली।
धारा 163 क्या है और क्यों उठ रहे हैं सवाल?
बीएनएसएस की धारा 163 पुरानी सीआरपीसी की धारा 144 की जगह लेने वाला प्रावधान है। इसके तहत प्रशासन कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पर लोगों के एकत्र होने जैसी गतिविधियों पर रोक लगा सकता है। (अगर आपके संस्थान में ‘बीएनएस-163’ लिखा जा रहा है, तो सही संदर्भ बीएनएसएस की धारा 163 है।)
इसी महीने की शुरुआत में जिले में यह आदेश जारी हुआ था। टाइम्स नाउ हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारों, प्रतियोगी परीक्षाओं और किसान संगठनों के प्रदर्शनों को देखते हुए 10 से 20 अक्टूबर 2026 तक धारा 163 लागू की गई थी, जिसमें बिना अनुमति भीड़ जुटाने और ड्रोन उड़ाने जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित थीं। आज समाज की रिपोर्ट के मुताबिक लाउडस्पीकर पर भी रोक थी।
एक अहम बिंदु: रिपोर्ट किया गया यह आदेश 20 अक्टूबर तक का था, जबकि 21 अक्टूबर को पुलिस ने धारा 163 लागू होने की बात कही। आदेश के विस्तार या नए आदेश की आधिकारिक पुष्टि हमारे पास उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली। पुलिस कमिश्नरेट से इसकी स्पष्टता जरूरी है।
अतीत में भी हुआ है टकराव
गौतमबुद्ध नगर में किसानों और पुलिस के बीच टकराव नया नहीं है। दिसंबर 2024 में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी के गांवों के लिए मुआवजा बढ़ाने की मांग पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने दलित प्रेरणा स्थल खाली कराया था और कई किसान हिरासत में लिए गए थे। उसी दौरान ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट पर धरना दे रहे सुखबीर खलीफा सहित 34 किसान नेताओं को पुलिस ने देर रात हिरासत में लेकर जेल भेजा था।
किसान संगठनों ने संकेत दिया है कि मांगों का ठोस समाधान न होने तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर पुलिस का रुख साफ है कि बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में टकराव बढ़ने की आशंका है। जानकारों का मानना है कि एकमात्र रास्ता शासन स्तर पर वार्ता और लंबित प्रस्तावों पर फैसला है।

