नोएडा: नोएडा के सेक्टर-56 स्थित ऐतिहासिक कब्रिस्तान की दीवार तोड़कर इंडियन ऑयल सोसाइटी के लिए रास्ता बनाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और कुछ रसूखदार लोगों पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय निवासियों और मुस्लिम समाज के कड़े विरोध के बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर अजीबोगरीब तरीके से निर्माण कार्य जारी है, जिससे इलाके में तनाव का माहौल है।
क्या है पूरा मामला? (Choura Raghunathpur Graveyard Dispute)
नोएडा शहर के बसने और आधुनिक सेक्टरों के विकास से पहले, यहां स्थानीय चौड़ा रघुनाथपुर गांव के बाशिंदों का प्राचीन और पारंपरिक कब्रिस्तान मौजूद है।
प्राधिकरण द्वारा बाउंड्री: पूर्व में इस कब्रिस्तान की सुरक्षा और पहचान को सुरक्षित रखने के लिए नोएडा प्राधिकरण खुद इसकी मजबूत बाउंड्री वॉल (दीवार) का निर्माण कराया था।
रास्ते का विवाद: अब आरोप है कि प्राधिकरण के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से सेक्टर-56 स्थित इसी कब्रिस्तान की दीवार को तोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य पास की इंडियन ऑयल सोसाइटी के लिए एक नया रास्ता निकालना है।
स्थानीय लोगों का तीखा विरोध और आरोप
कब्रिस्तान की पवित्रता और ऐतिहासिक अस्तित्व के साथ खिलवाड़ होते देख स्थानीय ग्रामीणों और मुस्लिम समाज के लोगों में भारी गुस्सा है।
दबंगई और अनदेखी: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लगातार इस अवैध निर्माण का विरोध कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और सोसाइटी के दबंग लोग जनता की आवाज़ को पूरी तरह दरकिनार कर रहे हैं।
अनोखा और अवैध तरीका: लोगों का आरोप है कि बिना किसी विधिवत अनुमति या सार्वजनिक सहमति के, रात के अंधेरे या गुप्त तरीके से दीवार को गिराकर रास्ता बनाने का काम तेजी से अंजाम दिया जा रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे सवाल
नोएडा प्राधिकरण जैसे जिम्मेदार संस्थान द्वारा निर्मित बाउंड्री वॉल को खुद ढहाना और किसी प्राइवेट सोसाइटी को रास्ता देना कई बड़े सवाल खड़े करता है:
- क्या कब्रिस्तान की ज़मीन और बाउंड्री का कमर्शियल या रेजिडेंशियल इस्तेमाल के लिए डायवर्जन किया गया है?
- स्थानीय लोगों की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुँचाए बिना इस तरह का कदम उठाने के पीछे कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं?
- क्या इस मामले में उच्च अधिकारियों या जिला प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?
आगे की स्थिति
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध गतिविधि को तुरंत नहीं रोका गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन और कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाएंगे। इस संवेदनशील मामले पर अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की भी नजर टिकी हुई है।
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