CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद रिहा, मजिस्ट्रेट कोर्ट में पुलिस की विस्तार मांग खारिज

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार (21 अक्टूबर 2026) को दिल्ली के विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया। दोनों सात दिनों से तिहाड़ जेल में बंद थे। पुलिस ने हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन SEM कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया और जमानतदारों (sureties) को स्वीकार कर रिहाई का आदेश दे दिया। रिहाई का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका वापस लेने के कुछ घंटे बाद आया। दोनों ने जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तिरंगा प्रदर्शन करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

पृष्ठभूमि: एयरपोर्ट से हिरासत, पीस बॉन्ड और फिर गिरफ्तारी

10 अक्टूबर को मुंबई से दिल्ली पहुंचे CJP नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 (शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा) और 170 (संज्ञेय अपराध रोकने के लिए गिरफ्तारी) के तहत निवारक कार्रवाई की थी। अगले दिन 11 अक्टूबर को SEM कोर्ट ने 50-50 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरने के बाद तीनों को इस शर्त पर रिहा कर दिया कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे।

14 अक्टूबर को दास और रांका समेत कुछ CJP कार्यकर्ताओं ने जंतर मंतर (जो उस समय डि-नोटिफाइड यानी विरोध स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं था) पर तिरंगा फहराकर प्रदर्शन करने की कोशिश की। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने लॉक किए गए गेट पर चढ़कर इलाके में प्रवेश किया और पीस बॉन्ड का उल्लंघन किया। इसी दिन SEM कोर्ट ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 19 अक्टूबर को नई SEM रितु राज ने हिरासत दो दिन और बढ़ा दी। कोर्ट ने कहा कि दोनों ने जानबूझकर बॉन्ड तोड़ा और तुरंत शांति भंग की। जमानतदारों को भी खारिज कर दिया गया।

हाईकोर्ट में याचिका और वापसी

21 अक्टूबर को दास और रांका ने दिल्ली हाईकोर्ट में हिरासत विस्तार को चुनौती देने वाली याचिका दायर की। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने पूछा कि वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध होने के बावजूद हाईकोर्ट क्यों आए। कोर्ट ने सुझाव दिया कि SEM का फैसला आने तक इंतजार करें। इसके बाद याचिका वापस ले ली गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी गई।

इसके बाद SEM कोर्ट में पेशी हुई। पुलिस ने तीन दिन और हिरासत बढ़ाने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने जमानतदार स्वीकार कर रिहाई का आदेश दे दिया। दोनों ने कोर्ट के समक्ष आश्वासन दिया कि वे जंतर मंतर जैसे डि-नोटिफाइड स्थल पर विरोध नहीं करेंगे और शांति भंग नहीं करेंगे।

CJP का रुख और आगे की स्थिति

CJP नेताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उनका आरोप है कि चुनावी नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ी हुई और मतदाताओं के नाम काटे गए। पार्टी ने हिरासत को राजनीतिक बताया था। रिहाई के बाद सौरव दास ने कहा कि “सत्य की जीत हुई है”।

दोनों नेता अब अन्य किसी मामले में हिरासत में नहीं हैं। CJP का कहना है कि वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। जंतर मंतर विरोध स्थल के रूप में अभी भी प्रतिबंधित है। यह मामला निवारक हिरासत, पीस बॉन्ड और विरोध के अधिकार के बीच संतुलन का मुद्दा उठाता है। SEM कोर्ट के फैसले के बाद दोनों नेता रिहा हो चुके हैं।

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